रक्षा मंत्री बोले- भारत युद्ध-हिंसा का समर्थक नहीं, हमला हुआ तो सीमा पार करने से नहीं हिचकेगा भारत,

(एन एल एन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : भारत न तो दूसरों को परेशान करता है और न ही परेशान करने वालों को बख्शता है। भारत कभी भी युद्ध और हिंसा का पक्षधर नहीं रहा है। हालांकि, यह अन्याय और उत्पीड़न के प्रति तटस्थ नहीं रह सकता है। अन्याय और उत्पीड़न के प्रति तटस्थ रहना हमारे स्वभाव में नहीं है। यह बातें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहीं। वह शहर के वसंतपुरा में भव्य राजाधिराज गोविंदा मंदिर में इस्कॉन की ओर से आयोजित गीता दान यज्ञ में शामिल होने पहुंचे थे।
रक्षा मंत्री ने उन परिस्थितियों का भी जिक्र किया जिनके कारण महाभारत का युद्ध हुआ। उन्होंने कहा, कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने अपना महाकाव्य व्याख्यान दिया था जिसे श्रीमद भगवद गीता के नाम से जाना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कहा कि गीता की सामग्री इसे शाश्वत और सार्वभौमिक बनाती है। भगवद्गीता का पाठ करना और उसे जीवन में उतारना व्यक्ति को निर्भीक बनाता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने शनिवार को कहा कि भारत सीमा पार से देश को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाएगा । रक्षा मंत्री एक कार्यक्रम में बोल रहे थे जिसमें 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में शामिल रहे असम के सैनिकों को सम्मानित किया गया । सिंह ने कहा कि सरकार देश से आतंकवाद को उखाड़ फेंकने के लिए काम कर रही है । उन्होंने कहा, “भारत यह संदेश देने में सफल रहा है कि आतंकवाद से सख्ती से निपटा जाएगा । अगर देश को बाहर से निशाना बनाया जाता है तो हम सीमा पार करने से नहीं हिचकिचाएंगे ।” चीन के साथ हालिया गतिरोध में भारतीय सैनिकों द्वारा प्रदर्शित वीरता की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि दुनिया की कोई भी शक्ति ‘भारत माता’ के सिर को नहीं झुका सकती।” मामले में सेना की भूमिका पर सवाल उठाने वाले विपक्षी नेताओं के एक वर्ग पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा कि इस तरह की आलोचना से सैनिकों का मनोबल गिरता है और लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है । रक्षा मंत्री ने कहा, “मैं नियमित रूप से हमारे सशस्त्र बलों के प्रमुखों के संपर्क में हूं । मैंने उन्हें बताया कि मुझे क्या करना है और उन्होंने वही किया जो उन्हें करना था । उन्होंने भारत माता का सिर ऊंचा रखा है ।” सिंह ने यह भी कहा कि पश्चिमी सीमा की तुलना में देश की पूर्वी सीमा पर वर्तमान में अधिक शांति और स्थिरता है क्योंकि बांग्लादेश एक मित्र पड़ोसी है । उन्होंने कहा, “पश्चिमी सीमा की तरह भारत पूर्वी सीमा पर तनाव का सामना नहीं कर रहा क्योंकि बांग्लादेश एक मित्र देश है ।”
उन्होंने कहा, “घुसपैठ की समस्या लगभग समाप्त हो गई है। सीमा पर (पूर्वी सीमा) अब शांति और स्थिरता है।” सिंह ने रक्षा तैयारियों के लिए आवश्यक मजबूत सीमा बुनियादी ढांचे के निर्माण के प्रयासों के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) की प्रशंसा की. उन्होंने कहा, “हमारे पास अब मजबूत सीमा अवसंरचना है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना है और हम इस पर काम कर रहे हैं।” पूर्वोत्तर के विभिन्न हिस्सों से सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) को हाल ही में वापस लिए जाने पर रक्षा मंत्री ने कहा कि जब भी किसी स्थान की स्थिति में सुधार हुआ, सरकार ने ऐसा किया ।
देश की रक्षा में सेवारत सैनिकों और पूर्व सैनिकों की भूमिका की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, “सैनिक हमारी शक्ति हैं और पूर्व सैनिक एवं ‘वीर नारी’ (शहीदों की विधवाएं) हमारी प्रेरणा हैं।’’उन्होंने कहा कि यहां तक ​​​​कि जब कोई सैनिक सेवानिवृत्त हो जाता है और पूर्व सैनिक बन जाता है, तो भी उसके अंदर का योद्धा जीवित रहता है और यह उसके ‘तेवर’, शरीर की भाषा में देखा जा सकता है ।” सिंह ने यह भी कहा कि जब सैनिक सीमाओं पर शांति स्थापित रखते हैं तो आम लोगों को सुनिश्चित करना चाहिए कि देश में भाईचारा बना रहे ।

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