PFI के खिलाफ एक्शन ले सकती है सरकार, पीएम मोदी की हत्या करने की साजिश रची थी

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ):  देश के कई राज्यों में पिछले कुछ महीनों से लगातार हिंसा और आतंक से जुड़े मामलों में पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (PFI) से जुड़े संदिग्धों का नाम सामने आने से सुरक्षा एजेंसियां चिंतित थीं। उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केरल जैसे राज्यों में हुए हिंसा में PFI से जुड़े आरोपियों का नाम सामने आने से ये जरूरी हो गया था कि उस पर कड़ी कार्रवाई की जाए।  PFI पर प्रतिबंध की मांग 2017 से चल रही है। लेकिन अभी तक उसे प्रतिबंधित नहीं कर पाने की एक बड़ी वजह एजेंसियों का एकमत नहीं होना है। विदेशी फंडिंग सहित, देश विरोधी गतिविधियों में इस धन के उपयोग सहित कई गंभीर आरोप पीएफआई पर लगे हैं। एजेंसियां डोजियर के आधार पर एक ठोस योजना तैयार कर रही हैं जिसके आधार पर भविष्य में संगठन की गतिविधियों पर पूरी तरह नकेल कसी जा सके।

भारत के लोगों में आतंक फैलाना, दहशत का माहौल पैदा करना था। इसके लिए हथियारों का इस्तेमाल करके आतंकी गतिविधि को अंजाम देना भी था। साथ ही साथ अन्य धर्मों को मानने वाले संगठनों से जुड़े व्यक्तियों की निर्मम हत्या करना, टारगेट करके विभिन्न समूहों और स्थानों पर बम विस्फोट करना, ISIS का समर्थन करना और अन्य को इसके लिए तैयार करना, आम नागरिकों के दिल में आतंक का डर भरना था। धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों में शत्रुता पैदा करना, सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्मों का इसके लिए इस्तेमाल करना था। सीएए और एनआरसी के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में महीनों तक सरकार के खिलाफ किए गए विरोध प्रदर्शन में भी पीएफआइ का हाथ सामने आया था।

29 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, आईबी चीफ तपन डेका समेत रा चीफ समंत गोयल भी मौजूद थे। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने सभी एजेंसियों को PFI और उससे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी इकट्ठी करने के लिए निर्देश दिया था। एनआईए, ईडी और कुछ राज्यों की पुलिस के जरिये PFI के 93 लोकेशन पर छापे डाले गये थे, जिसमें कुल PFI के 106 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। रेड के अगले ही दिन एक बार फिर से गृह मंत्री अमित शाह ने एनएसए अजीत डोभाल और एनआईए चीफ दिनकर गुप्ता के साथ PFI के खिलाफ एक्शन लेने की बात की।

PFI ने ISIS के साथ मिलकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश भी रची थी। NIA के सूत्रों के अनुसार इसके लिए PFI को 200 करोड़ रुपये का फंड भी मिला था। प्रधानमंत्री मोदी की 12 जुलाई को हुई पटना यात्रा इसके लिए निशाने पर थी। यहां वारदात को अंजाम देने के लिए कई PFI के सदस्यों को ट्रेनिंग भी दी गई थी। हालांकि वह इस घटना को अंजाम नहीं दे पाए।
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