ईशपुत्र ने शिवमंदिर में की मूर्ति स्थापना और पूजा ।

भगवान महादेव शिव की प्रतिमा की स्थापना व प्राण प्रतिष्ठा के इस शुभ अवसर पर पूरा गांव मंदिर प्रांगण में उपस्थित था।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): यह बड़ा ही उत्सुकता का विषय बन गया जब पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के दूरदराज क्षेत्र में स्थित रामाम नाम के गांव में कौलांतक पीठ के पीठाधीश्वर महासिद्ध ईशपुत्र एक छोटे से शिव मंदिर में शिवमूर्ति की स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा हेतु पधारे। इस कार्यक्रम को 12 अगस्त 2022 को संपन्न किया गया।

यह रामाम गांव दार्जिलिंग के दूरदराज के स्थान पर स्थित है। यहाँ पर शिंघलीला राष्ट्रीय वन उद्यान का अत्यंत सुंदर क्षेत्र है। भगवान महादेव शिव की प्रतिमा की स्थापना व प्राण प्रतिष्ठा के इस शुभ अवसर पर पूरा गांव मंदिर प्रांगण में उपस्थित था। मंदिर में पहुंचकर महासिद्ध ईशपुत्र ने सभी लोगों का अभिवादन किया और मंदिर प्रांगण स्थित गुफा में भगवान शिव की पूजा अर्चना की। इसके पश्चात भगवान शिव की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम भव्य तरीके से संपन्न किया गया।
प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में महासिद्ध ईशपुत्र ने मंत्रोच्चार सहित यज्ञ को संपन्न किया। यज्ञ के पश्चात अभिमंत्रित और प्राण प्रतिष्ठित शिवयंत्रों को विधि सहित भगवान शिव की प्रतिमा में स्थापित किया गया।

इस कार्यक्रम के दौरान महासिद्ध ईशपुत्र के साथ कौलांतक पीठ संस्था और ट्रस्ट के प्रमुख संजीव ब्रह्मा नाथ जी भी उपस्थित थे। ब्रह्मा नाथ जी ने बातचीत में बताया कि यह क्षेत्र महासिद्ध ईशपुत्र की तपस्या स्थली रहा है। इसलिए लंबे समय पश्चात जब ईशपुत्र पुनः इस क्षेत्र में पधारे और उन्होंने इस मंदिर प्रांगण में स्थित गुफा में साधना की तो गाँव के लोगों ने स्वयं श्रमदान कर मंदिर का निर्माण किया और भगवान शिव की प्रतिमा की स्थापना की। साथ ही उन्होंने बताया कि इस गाँव में महासिद्ध ईशपुत्र की अर्धांगिनी कौलांतक पीठाधीश्वरी माँ पद्म प्रिया नाथ के भाई व अन्य रिश्तेदार भी रहते हैं।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद महासिद्ध ईशपुत्र ने वहाँ उपस्थित सभी शिव भक्तों से बातचीत करते हुए कहा कि शिंघलीला वन का यह पूरा क्षेत्र प्राचीन सिद्धों और ऋषियों की तपःस्थली रहा है जिसके कारण यह समस्त क्षेत्र तपोबल से प्रकाशित है। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रांगण एक ऐसा स्थान है जहाँ सभी लोगों को अपने सभी आपसी मनमुटाव भुलाकर एकत्रित होना चाहिए और अपने सुख-दुख का आदान-प्रदान एवं सभी समस्याओं का निवारण यहाँ करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इस संस्कृति की रक्षा के लिए अनगिनत बलिदान हुए हैं इसलिए इसकी रक्षा और मंदिरों की रक्षा करना अपना कर्त्तव्य व धर्म की सेवा समझना चाहिए।
संबोधन के पश्चात प्रसाद वितरण और भोज समारोह हुआ जिसके पश्चात कार्यक्रम का समापन हुआ।

महासिद्ध ईशपुत्र के इस क्षेत्र में आने और मूर्ति स्थापना की बात सुनकर कई अन्य गणमान्य और प्रतिष्ठित लोग भी यहां उपस्थित हुए। सिद्ध मार्ग की प्रमुख योगिनी माँ शिवाग्नी जी इस कार्यक्रम में शामिल रहीं। उड़ीसा के बीजेडी युवा नेता रामकृष्ण पाढ़ी जी के साथ उड़ीसा में ही कल्कि मिशन चला रहे सावर्णी नाथ मनुजी भी उपस्थित हुए। इस कार्यक्रम में न्यूजलाइव नाऊ के एडिटर ओम तिवारी भी उपस्थित रहे। अनमास्कर मीडिया के संस्थापक राघव गुप्ता जी भी इस कार्यक्रम शामिल हुए।

सिद्ध मार्ग की प्रमुख और धर्मगुरू योगिनी माँ शिवाग्नी ने कहा, “आज की तकनीक से भरी दुनिया में एक सामान्य मनुष्य अपने प्रतिदिन के कामों में बड़ा व्यस्त है और जो भी थोड़ा बहुत समय उसके पास होता है उसमें वह मोबाइल, टीवी, कम्प्यूटर आदि में मनोरंजन ढूढ़ता है किंतु सच्चाई यह है कि उसे यहाँ और ज्यादा तनाव और बीमारियां ही मिलती हैं। इसलिए मैं तो स्वयं यह महादेव का वरदान ही समझती हूँ कि हिमालय का यह इतना सुंदर स्थान सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग जैसे शहर के इतना समीप है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति बीमारियों और तनाव से छुटकारा चाहता है तो उसे इस सुंदर स्थान पर आकर प्रकृति के बीच अवश्य कुछ समय व्यतीत करना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा – “कुछ दिनों तक यहाँ रहने के कारण मैंने अनुभव से जाना है कि यह स्थान सिद्धों के तपोबल और देवताओं की उपस्थिति से भरा है। उसके ऊपर से विष्णु स्वरूप भगवान ईशपुत्र का स्वयं यहाँ आकर भगवान महादेव की प्रतिष्ठा करने से यह मंदिर पूर्ण जाग्रत हो चुका है। यहाँ आने वाले लोगों के मन की सभी इच्छाएँ अवश्य पूरी होंगी।”

बीजेडी नेता रामकृष्ण पाढ़ी जी ने कहा कि महासिद्ध ईशपुत्र की तपस्या स्थली के दर्शन और साथ ही महादेव के मंदिर में मूर्ति स्थापना के समारोह में शामिल होना उनका बड़ा सौभाग्य है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण और मूर्तिकी प्राण प्रतिष्ठा के समारोह में सभी उम्र के लोगों की भागीदारी अत्यंत सुंदर है, इससे समाज में एकता आती है व मंदिर से अच्छे संस्कार नई पीढ़ी में जाते हैं और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने का बल भी मिलता है।

कल्कि मिशन के प्रमुख सावर्णि नाथ मनु जी ने कहा कि ” मैं समझता हूँ कि यह क्षेत्र महासिद्ध ईशपुत्र का सान्निध्य पाकर अमर हो गया है।” उन्होंने बताया कि “मैंने हिमालय के विभिन्न क्षेत्रों में महासिद्ध ईशपुत्र के साथ समय बिताया है और पाया है कि उन्हें पूरे हिमालय का ही बड़ा अनुभवजनित ज्ञान है। उन्होंने पूरे हिमालय में घूम-घूम कर अपनी साधनाएँ की हैं और तप किया है। प्रत्येक क्षेत्र में हमने उनकी साधनाकाल की गुफाएँ देखी हैं, उन झरनों का पानी पिया है जिनमें कभी उन्होंने साधनाकाल में अपनी प्यास बुझाई थी और हिमालय की उन संकरी पगडंडियों में चलने का सौभाग्य भी अनुभव किया है जिनमें वर्षों पहले भगवान ईशपुत्र अपने साधना में चला करते थे। हमारे लिए वो स्वयं विष्णु अवतार कल्कि हैं। उनका दर्शन मात्र ही मोक्ष देने वाला है और सभी इच्छाओं को पूरा करने वाला है। इसलिए मैंने अपने जीवन का उद्देश्य इस दुनिया में भगवान कल्कि का संदेश पहुंचाना और उनके मंदिरों की स्थापना करना बना लिया है।

अनमास्कर मीडिया के संस्थापक राघव गुप्ता जी ने कहा कि आज अनेक प्रकार की शक्तियां मिलकर हिंदू समाज की प्राचीन संस्कृति और विरासत को नष्ट करना चाह रही हैं। इसलिए मंदिरों की स्थापना करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। महासिद्ध ईशपुत्र द्वारा मंदिर की पुनःस्थापना का यह कार्य सभी सनातन के अनुयायियों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत है। उन्होंने यह भी कहा कि मेरी दृष्टि में महासिद्ध ईशपुत्र के दिशानिर्देश में ही इस आधुनिक काल में हिंदुओं और सनातन संस्कृति को बचाने का रास्ता निकल सकता है।

न्यूजलाइव नाऊ से कार्यक्रम में पहुंचे एडिटर ओम तिवारी ने कहा कि हिमालय के जंगलों के बीच स्थित यह स्थान अत्यंत सुंदर है और जितना सुंदर यह स्थान है उतने ही सुंदर यहाँ के लोग हैं जिन्होंने बड़े ही प्रेम से हमारा स्वागत अपने गाँव में किया है। उन्होंने कहा कि हिमालय के जंगलों के बीच स्थित यह रामाम गाँव पर्यटकों को बड़ा पसंद है। किंतु इसकी सुंदरता और सुलभता को देखकर लगता है कि इसकी प्रसिद्धि अभी कम ही है। किंतु महासिद्ध ईशपुत्र के यहां पधारकर मंदिर में जाने के बाद और उनके द्वारा इस क्षेत्र के महत्व को सुनकर यह अवश्य दिखता है कि इस क्षेत्र में अब दुनिया भर से धार्मिक जन और भक्त जन यहाँ आएंगे। साथ ही ओम तिवारी ने आह्वाहन किया कि हिमालय के इस क्षेत्र को प्रदूषण और प्लास्टिक आदि के कचरे से मुक्त रखें ताकि यहाँ की सुंदरता अनवरत बनी रहे।

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