ज्ञानवापी विवाद : मस्जिद परिसर के साइंटिफिक सर्वे मामले की सुनवाई 30 नवंबर को

(एन एल एन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : एएसआई से पूछा क्या बिना नुकसान पहुचाए कार्बन डेटिंग की जा सकती है। ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के साइंटिफिक सर्वे मामले की सुनवाई 30 नवंबर को होगी। सोमवार को इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) से जवाब मांगा है। एएसआई से पूछा क्या बिना नुकसान पहुचाए कार्बन डेटिंग की जा सकती है। कोर्ट ने कहा अधीनस्थ अदालत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी यथास्थिति आदेश को देखते हुए साइंटिफिक सर्वे कराने की अर्जी खारिज की है। इसके साथ ही कोर्ट ने आशंका व्यक्त की गई है कि कार्बन डेटिंग से कथित शिवलिंग को क्षति हो सकती है। कोर्ट ने 30 नवंबर की तारीख तय की, जिसमें निचली अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पाए जाने वाले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग से इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने लक्ष्मी देवी और अन्य द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर आदेश पारित किया। बीते 14 अक्टूबर को वाराणसी के जिला न्यायाधीश एके विश्वेश ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को हवाला देते हुए शिवलिंग वैज्ञानिक जांच और कार्बन डेटिंग की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था, ताकि कोई छेड़छाड़ न की जा सके।

अंजुमन इंतेजामिया कमेटी की ओर से दायर होगा वकालतनामा
इसी मामले को लेकर कोर्ट में मामला उठाया तो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वकील ने कहा कि सर्वेक्षण के लिए समय बढ़ाने के लिए एक आवेदन दायर किया गया है। हालांकि कोर्ट ने टिप्पणी की कि शिवलिंग को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। तब एएसआई के वकील ने कहा कि उम्र निर्धारित करने के और भी तरीके हैं और कोई नुकसान नहीं हो सकता। दूसरी ओर ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करने वाली अंजुमन इंतेजामिया कमेटी की ओर से कहा गया कि इस बीच वकालतनामा दायर करना होगा। बता दें कि वकालतनामा एक मुवक्किल द्वारा हस्ताक्षरित एक लिखित दस्तावेज है, जो उसके अधिवक्ता को उसकी ओर से अदालत में एक मामले की पैरवी करने की अनुमति देता है।

वीडियोग्राफी सर्वेक्षण के दौरान पाए गए वजूखाना के बाद शुरू हुई थी मांग
आपको बता दें कि पांच हिंदू पक्षों में से चार ने अदालत द्वारा अनिवार्य वीडियोग्राफी सर्वेक्षण के दौरान पाए गए वजूखाना के पास मस्जिद परिसर के शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग की थी। 16 मई, 2022 को मिले शिवलिंग के नीचे निर्माण की प्रकृति का पता लगाने के लिए उपयुक्त सर्वेक्षण या उत्खनन की मांग की गई है। हिंदू पक्षकारों ने प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के प्रावधानों के अनुसार शिवलिंग की उम्र, प्रकृति और अन्य घटकों को निर्धारित करने के लिए कार्बन डेटिंग द्वारा वैज्ञानिक जांच की भी मांग की है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.