हिमाचल – कौलांतक पीठ के बालीचौकी आश्रम में पधारे शाकटि-मराऊड़ के देवता आदि ब्रह्मा जी ।

इस अवसर पर कौलांतक पीठ के पीठाधीश्वर महायोगी सत्येंद्रनाथ (महासिद्ध ईशपुत्र) ने इसे देवता की अनुकम्पा बताया व इसे शुभ लक्षण के तौर पर लिया।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): हिमाचल प्रदेश के सेंज घाटी स्थित शाकटि – मराऊड़ नाम के गांव के देवता ‘आदि ब्रह्मा’ जी कौलांतक पीठ के बालीचौकी केन्द्र में पहुंचे। देवता आदि ब्रह्मा की उपस्थिति क्षेत्र और कौलांतक पीठ के स्थानीय आश्रम के लिए अत्यंत उत्साह और उल्लास का विषय बना हुआ है। शाकटि – मराऊड़ गाँव जहाँ के देवता आदि ब्रह्मा है, सेंज घाटी के काफी आंतरिक हिस्से के पहाड़ों में स्थित है।
वैसे तो यह समय देवताओं के शीतकालीन शयन का होता है किंतु इस समय देवता आदि ब्रह्मा; बाह्य सराज के आनी-दलास क्षेत्र के दौरे पर गए हुए थे। इस दौरे को पूरा करने के बाद वो अपने महल की ओर वापस जा रहे थे। इस वापसी यात्रा के समय, बाह्य सिराज को आंतरिक सिराज क्षेत्र से जोड़ने वाले जलोड़ी दर्रे से होकर देवता को यात्रा करनी थी। इस यात्रा के समय अत्यंत तेज हिमपात हुआ, जिसके बाद देवता का रथ बर्फ की मोटी चादर से होकर गुजरा।

यहाँ से आने के पश्चात देवता कौलांतक पीठ के बालीचौकी आश्रम में रुके जहाँ कुला देवी (कुरुकुल्ला देवी) का रथ विद्यमान है। कुलादेवी या कुरुकुल्ला देवी के कोटला स्थित जोगणीधार नाम के स्थान पर मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य चल रहा है इसलिए भगवती कुरुकुल्ला का रथ कौलांतक पीठ के बालीचौकी आश्रम में रखा गया है। इसी जगह पर देवता आदि ब्रह्मा ने रात्रि ठहराव किया। इस अवसर पर कौलान्तक पीठ के लोग और देवता आदि ब्रह्मा के साथ आए हारियान भी उपस्थित थे।
कुलादेवी जी (कुरुकुल्ला – शास्त्रीय नाम) ने देवता आदि ब्रह्मा के आगमन से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी को अपने कोष से चांदी का एक चन्द्रहार उपहार स्वरूप प्रदान किया। इस चंद्रहार को देवता आदि ब्रह्मा जी के रथ पर तुरंत लगा दिया गया जिसे आप तस्वीर में देख सकते हैं।

दोनों देवी देवताओं ने विश्व में शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान किया। ये पहला अवसर था जब कौलांतक पीठ में शाकटि-मराऊड़ के आदि-ब्रह्मा जी अपने प्रवास के दौरान पधारे थे।
इस अवसर पर कौलांतक पीठ के पीठाधीश्वर महायोगी सत्येंद्रनाथ (महासिद्ध ईशपुत्र) ने इसे देवता की अनुकम्पा बताया व इसे शुभ लक्षण के तौर पर लिया।

उन्होंने कहा कि कुला देवी अर्थात् कुरुकुल्ला व भगवान ब्रह्मा दोनों के मिलन से जगत का कल्याण होगा। साथ ही उन्होंनेे ब्रह्माजी के हारियानों का आभार जताते हुए पुनः ब्रह्मा जी के कौलांतक पीठ के आश्रम में भविष्य में आने की प्रार्थना को दोहराया। देवता के आगमन से आश्रम में बड़ा ही सुंदर उत्सव का माहौल बना रहा।

इस अवसर पर महासिद्ध ईशपुत्र की माताजी के साथ परिवारजनों व रिश्ते-नातेदारों ने भगवान आदि ब्रह्मा का परंपरानुसार स्वागत किया व अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ब्रह्माजी के आगमन से कौलांतक पीठ में खुशी की लहर है साथ ही ये खबर कौलांतक पीठ के देश-विदेश के साधकों तक भी पहुंच गई है जिससे उनको इन कड़कड़ाती सर्दियों में भी जोश का अनुभव हो रहा है।
ध्यान रहे कि दिसंबर से लेकर मकर संक्रांति या इससे कुछ अधिक समय तक कुल्लू के अधिकांश देवी देवता स्वर्ग प्रवास पर हैं। ऐसे में आदि ब्रह्मा की उपस्थिति ने सराज घाटी में चार चांद लगा दिए हैं।

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