दक्षिण कोरिया से अपनी दुश्मनी को छोड़ बातचीत को तैयार उत्तर कोरिया ?

किम के मंत्री री थे सॉन्ग का कहना है कि टकराव खत्म करने का मून का प्रस्ताव असामयिक है और इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि इससे उत्तर कोरिया के प्रति अमेरिका की कड़ी नीति खत्म हो जाएगी।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): दक्षिण कोरिया की नीतियों में बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की बहन ने कहा कि दक्षिण कोरिया अगर शत्रुतापूर्ण नीतियों और दोहरे मानदंडों के साथ उसे (उत्तर कोरिया को) उकसाना छोड़ देता है तो उनका देश उससे फिर बातचीत शुरू करने को तैयार है। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जेइ-इन ने इस सप्ताह 1950-53 के कोरियाई टकराव के समाप्त करने की घोषणा के लिए नए सिरे से आह्वान किया था, जिसके जवाब में किम यो जोंग ने शुक्रवार को ये टिप्पणियां की। वहीं, इससे उलट, तानाशाह के उपविदेशमंत्री का कहना है कि मून का प्रस्ताव ठोस नहीं है।
किम के मंत्री री थे सॉन्ग का कहना है कि टकराव खत्म करने का मून का प्रस्ताव असामयिक है और इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि इससे उत्तर कोरिया के प्रति अमेरिका की कड़ी नीति खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक DPRK के इर्द-गिर्द राजनीतिक परिस्थितियां नहीं बदलती हैं और अमेरिकी नीति नहीं बदलती है, भले ही सैकड़ों बार जंग खत्म करने की बात कही जा चुकी हो।
कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि किम जोंग उन की ऐश-ओ-आराम की जिंदगी इसे कमरे से चलती है। दरअसल, इनके मुताबिक यहां चलता अवैध व्यापार जिससे हर साल अरबों डॉलर की करंसी इधर से उधर की जाती है। उत्तर कोरिया पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का कहना है कि राजनीतिक समर्थन हो या परमाणु प्रोग्राम की फंडिंग, सब इसी रूम-39 से आता है। यहां होने वाली गतिविधियों की देख-रेख का जिम्मा है किम जोंग की बहन किम यो जोंग (Kim Yo Jong) का।
विदेशी निवेश, अवैध व्यापार, टैक्स चोरी के जरिए यहां विदेश करंसी का रिजर्व तैयार किया गया है। इसके बल पर पार्टी सत्ता में रहती है। डेली एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक अमेरिकी इंटेलिजेंस ऑफिसरों ने कई साल इसकी सिक्यॉरिटी को भेदने की कोशिश की ताकि इसके सच से पर्दा उठाया जा सके लेकिन ज्यादा सफलता नहीं मिली। रिपोर्ट में बताया गया है कि यहां सोने और जिंक से लेकर कृषि और मछली निर्यात तक का व्यापार होता है। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक यहां फर्जी वियाग्रा से लेकर नशीले पदार्थों तक में डीलिंग की जाती है।
इस संगठन को किम जोंग इल ने 1974 में शुरू किया था। इसका आधिकारिक नाम सेंट्रल कमिटी ब्यूरो 39 बताया जाता है लेकिन इसे रूम-39 के अलावा ऑफिस-39, ब्यूरो-39 या डिविजन-39 भी कहा जाता है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि विदेशों में काम करने वाले उत्तर कोरियाई लोगों, यहां तक की राजनयिकों को एक तय रकम यहां भेजनी होती है। जब अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों के कारण देश की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है, रूम-39 किम परिवार के लिए एक बड़ा खजाना बना हुआ है।
दूसरी ओर, आमतौर पर आक्रामक रहने वाली किम यो जोंग का कहना है कि टकराव खत्म करने की घोषणा की जा सकती है अगर कोरियाई देश एक-दूसरे के प्रति शत्रुतापूर्ण नीतियां और अनुचित दोहरे मानदंड और पक्षपातपूर्ण विचार छोड़ दें। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया संबंधों में सुधार लाने पर दक्षिण कोरिया के साथ ‘सार्थक बातचीत’ करने को तैयार है।
उनका यह बयान तब आया है जब कुछ दिनों पहले उत्तर कोरिया ने अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता में गतिरोध के बीच छह महीने बाद पहला मिसाइल परीक्षण किया। उत्तर कोरिया ने पहले कहा है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य अभ्यास और अमेरिका द्वारा लगाए प्रतिबंध प्योंगयांग के खिलाफ शत्रुतापूर्ण नीतियों के उदाहरण हैं। उत्तर कोरिया द्वारा दक्षिण कोरिया से बातचीत को तैयार होने की खबर से दुनिया चकित है।

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