तानाशाह जनरल हलिंग बने म्यांमार के प्रधानमंत्री ।

म्यांमार में सैन्य शासन के खिलाफ लगातार हिंसक विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): म्यांमार मे सत्ता का समीकरण बदल रहा है। म्यांमार की लोकतांत्रित सरकार को अपदस्थ करने वाले सैन्य तानाशाह मिन आंग हलिंग ने खुद को देश का नया प्रधानमंत्री घोषित किया है। आज से छह महीने पहले म्यांमार की सेना ने आंग सांग सू की के नेतृत्व वाली लोकतांत्रित सरकार को हटा दिया था। इतना ही नहीं, सेना ने सु की को नजरबंद कर दिया, जबकि बाकी नेताओं में से कई को जेल में डाल दिया है। तब से ही म्यांमार में सैन्य शासन के खिलाफ लगातार हिंसक विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है।
तख्तापलट के बाद सैन्य शासन ने सू की के ऊपर कई तरह के आरोप लगाए हैं। अवैध रूप से वॉकी-टॉकी रेडियो रखने और कोरोना वायरस प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप में आंग सांग सू की के खिलाफ सोमवार को फिर से कोर्ट का ट्रायल शुरू होने वाला है। ऐसे में माना जा रहा है कि म्यांमार का सैन्य प्रशासन आंग सांग सू की को कई मामलों में फंसाकर देश की राजनीति के दूर रखने का प्रयास कर रहा है।
रविवार को टेलिविजन पर दिए गए संदेश में जनरल मिन आंग हलिंग ने अपने वादे को दोहराया कि दो साल के भीतर 2023 ततक देश में चुनाव कराए जाएंगे और संकट के राजनीतिक समाधान के लिए दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ सहयोग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हमें स्वतंत्र और निष्पक्ष बहुदलीय चुनाव कराने के लिए स्थितियां बनानी चाहिए। हमें इसकी तैयारी करनी होगी। मैं इस अवधि में बहुदलीय चुनाव कराने का वादा करता हूं।
उल्लेखनीय है कि एक फरवरी 2021 को आंग सान सू ची की निर्वाचित सरकार का तख्ता पलट करने के बाद आपातकाल की घोषणा की गई थी। सैन्य अधिकारियों ने अपनी इस कार्रवाई को उचित ठहराते हुए कहा कि सैन्य प्रमुखता वाले 2008 के संविधान में ऐसा करने की अनुमति है। सेना का दावा है कि सू की की पार्टी को पिछले साल आम चुनाव में भारी जीत फर्जीवाड़े से मिली। हालांकि, सेना ने अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है।
मिन आंग हलिंग ने राज्य प्रशासन परिषद (एसएसी) की अध्यक्षता की जो तख्तापलट के ठीक बाद बनाई गई थी। यही परिषद 1 फरवरी से म्यांमार का शासन चला रही थी। अब कार्यवाहक सरकार इस परिषद की जगह लेगी और देश की बागडोर संभालेगी। मिन आंग हलिंग ने यह भी कहा कि उनका प्रशासन एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस (आसियान) द्वारा नामित किसी भी विशेष दूत के साथ काम करेगा।
सोमवार को म्यांमार के लिए एक विशेष दूत नामित करने को लेकर आसियान की बैठक होनी है। यह विशेष दूत म्यांमार की सेना और वहां के लोकतांत्रिक नेताओं के बीच बातचीत को बढ़ावा देगा और शांति की स्थापना में सहयोग देगा। आंग सांग सू की की सत्ताधारी पार्टी के चुनाव जीतने के बाद सेना ने धांधली का आरोप लगाकर म्यांमार की सत्ता पर कब्जा कर लिया था। हालांकि, देश के चुनाव आयोग ने धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज कर दिया है। फिलहाल म्यांमार में चल रही अस्थिरता भारत के लिए भी चिंता का विषय है।

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