उत्तर पूर्वी राज्यों की सीमाओं का निर्धारण अब उपग्रह की मदद से किया जाएगा ।

अंतरराज्यीय सीमा विवाद हाल ही में असम व मिजोरम के बीच हुए हिंसक झड़प के बाद फिर सुर्खियो में आया है। इसमें असम पुलिस के पांच जवान व एक नागरिक शहीद हो गया था।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): देश के उत्तर पूर्वी राज्यों की सीमा बंटवारे को लेकर अब केंद्र ने बड़ा फैसला लिया है। असम व मिजोरम के बीच हाल ही में हुए हिंसक सीमा विवाद के बाद केंद्र सरकार ने उत्तर पूर्व के राज्यों के अंतरराज्यीय सीमा विवाद के निपटारे का फैसला किया है। इसके लिए सरकार उपग्रह से ली गई तस्वीरों की मदद लेगी। इन राज्यों के बीच अक्सर सीमा विवाद उठते रहते हैं। कई बार ये हिंसक रूप भी ले लेते हैं, जैसा कि हाल ही में असम व मिजोरम के बीच हुआ था, जिसमें पांच पुलिसकर्मी शहीद हो गए। 
केंद्र सरकार के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यह काम नार्थ ईस्टर्न स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (एनईएसएसी) को सौंपा गया है। यह अंतरिक्ष विभाग व उत्तर पूर्वी परिषद का साझा उपक्रम है। एनईएसएसी, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की मदद से उत्तर पूर्वी क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा देने का काम करता है। 
अंतरराज्यीय सीमा विवाद हाल ही में असम व मिजोरम के बीच हुए हिंसक झड़प के बाद फिर सुर्खियो में आया है। इसमें असम पुलिस के पांच जवान व एक नागरिक शहीद हो गया था। 26 जुलाई को हुए संघर्ष के दौरान मिजोरम पुलिस के जवानों ने असम पुलिस पर फायरिंग कर दी थी। इस संघर्ष में 50 अन्य लोग घायल हो गए थे।
सैटेलाइट इमेजिंग के माध्यम से सीमा विवाद के निपटारे का विचार कुछ माह पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बैठक में दिया था। शाह ने सीमा विवाद व जंगलों के निर्धारण के काम में एनईएसएसी के नक्शों की मदद लेने का सुझाव दिया था। बता दें, मेघालय की राजधानी शिलांग स्थित एनईएसएसी क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल पहले से कर रही है। 
अधिकारियों ने बताया कि चूंकि सीमाओं के निर्धारण का यह वैज्ञानिक तरीका होगा, इसलिए इसे लेकर असहमति व विवाद की गुंजाइश नहीं होगी व राज्यों के बीच स्वीकार्य हल निकल सकेगा। उन्होंने कहा कि एक बार सैटेलाइट मैपिंग हो जाने के बाद उत्तर पूर्वी राज्यों की सीमाओं का निर्धारण किया जा सकेगा और विवाद का स्थाई समाधान हो जाएगा। फिलहाल यह सीमा विवाद का मामला शायद अब हमेशा के लिए सुलझ पाएगा।

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