ईरान और सऊदी अरब के बीच समझौते के होंगे दूरगामी परिणाम ।

बीते मई में इराक के राष्ट्रपति बरहाम सालीह ने इस बात की पुष्टि की थी कि वे इन कट्टर विरोधी देशों के बीच बातचीत की मेजबानी कर रहे हैं।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): ईरान और सऊदी अरब के बीच समझौता होने की संभावना है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर इस पर दस्तखत हो गए, तो उससे पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र की कूटनीति और शक्ति-संतुलन में भारी बदलाव आ जाएगा। वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक खबर के मुताबिक दोनों देशों के अधिकारियों की हाल में बैकचैनल के जरिए दो बैठकें हुई हैं। इनमें पहली इराक में हुई थी। ताजा बैठक ओमान में हुई है। सूत्रों ने बैठकों को ‘रचनात्मक’ बताया है।
बीते मई में इराक के राष्ट्रपति बरहाम सालीह ने इस बात की पुष्टि की थी कि वे इन कट्टर विरोधी देशों के बीच बातचीत की मेजबानी कर रहे हैं। बताया जाता है कि दोनों देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के बीच वार्ता पिछले अप्रैल में शुरू हुई। बातचीत में सऊदी अरब की तरफ से खुफिया निदेशालय के प्रमुख खालिद हुमैदान और ईरान की तरफ से वहां की सुप्रीम सिक्योरिटी काउंसिल के के उप सचिव सईद इरावानी भी शामिल रहे हैं।
एशिया टाइम्स की खबर के मताबिक जारी बातचीत के बीच पहली बड़ी सफलता अगले हफ्ते मिल  सकती है। ईरान के मीडिया में आई खबरों के मुताबिक सऊदी अरब नए ईरानी राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए अपना दूत भेज सकता है। रईसी पांच अगस्त को शपथ लेंगे। गौरतलब है कि सऊदी अरब और ईरान ने 2016 में राजनयिक संबंध तोड़ लिए थे। उसके बाद से उनके बीच कोई कूटनीतिक संबंध नहीं था। इस लिहाज से रईसी के शपथ ग्रहण समरोह में सऊदी दूत का जाना एक महत्वपूर्ण घटना होगी।
रईसी ने चुनाव जीतने के बाद अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि ईरान और सऊदी अरब एक दूसरे के यहां यहां अपने दूतावास फिर खोलें, इस रास्ते में कोई बाधा नहीं है। उन्होंने कहा था कि ईरान सऊदी अरब के साथ फिर से हाथ मिलाने को तैयार है। गौरतलब है कि ईरान शिया देश है, जबकि सऊदी अरब में बहुसंख्यक आबादी सुन्नी है। जनवरी 2016 में दोनों के संबंध तब बहुत बिगड़ गए थे, जब सऊदी अरब ने शिया मौलवी निमर अल-निमर को फांसी पर चढ़ा दिया। इससे ईरान में गुस्सा भड़का। तब तेहरान स्थित सऊदी दूतवास और मशाद शहर में मौजूद सऊदी वाणिज्य दूतावास पर भीड़ ने धावा बोल दिया था। उसके बाद दोनों देशों के राजयनिक संबंध टूट गए।
तब से हाल तक ईरान ने उन हमलों के लिए कभी माफी नहीं मांगी थी। लेकिन कुछ समय पहले ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने उन घटनाओं की जांच के आदेश दिए थे। उसके बाद हमलों में शामिल 40 लोगों को गिरफ्तार किया गया। बताया जाता है कि इससे सऊदी अरब की भावनाओं पर मरहम लगा है।
सऊदी अरब और ईरान में बढ़े तनाव का असर यमन के गृह युद्ध पर भी पड़ा, जहां सुन्नी राष्ट्रपति के खिलाफ शिया आबादी ने बगावत की हुई है। सीरिया के गृह युद्ध में भी ईरान और सऊदी अरब आमने-सामने खड़े रहे हैं। इसलिए पर्यवेक्षकों का कहना है कि सऊदी अरब और ईरान के बीच समझौता हुआ, तो उसका असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ेगा। इससे इस्राइल की गणनाएं भी गड़ब़ड़ा सकती हैं। इस्राइल सऊदी अरब से संबंध सुधारने में जुटा रहा है। लेकिन नई परिस्थितियों में हो सकता है कि उसके ये प्रयास निष्फल हो जाएं।

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