भारतीय लोकतंत्र ने तोड़ा ट्विटर का घमंड – ट्विटर ने रेजिडेंट ग्रीवांस ऑफिसर नियुक्त किया ।

नए IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने 8 जुलाई को अपना मंत्रालय संभाला था। इसके तुरंत बाद उन्होंने सबसे पहले ट्विटर को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि देश का कानून सबसे ऊपर है और ट्विटर को इसे लागू करना ही होगा।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): ट्विटर को भारतीय कानूनों के सामने झुकना पड़ा है। कंपनी ने भारत में अपना रेजिडेंट ग्रीवांस ऑफिसर नियुक्त किया है। ट्विटर ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर बताया है कि उसने विनय प्रकाश को शिकायत अधिकारी बनाया है। सरकार ने 25 फरवरी को नए कानून लागू किए थे। इन नियमों का 3 महीने के भीतर यानी 25 मई से पहले पालन किया जाना था, लेकिन ट्विटर ने डेडलाइन खत्म होने के 46 दिन बाद इन नियमों का पालन किया है।
इससे पहले 27 जून को ट्विटर इंडिया के अंतरिम शिकायत अधिकारी धर्मेंद्र चतुर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इनकी नियुक्ति कुछ हफ्ते पहले ही ट्विटर इंडिया ने नए IT नियमों के पालन के लिए की गई थी।
नए IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने 8 जुलाई को अपना मंत्रालय संभाला था। इसके तुरंत बाद उन्होंने सबसे पहले ट्विटर को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि देश का कानून सबसे ऊपर है और ट्विटर को इसे लागू करना ही होगा।

दरअसल, मंत्रिमंडल विस्तार से पहले IT मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया था। माना जा रहा है कि नए IT कानून को लेकर रविशंकर प्रसाद सोशल मीडिया कंपनियों के सामने देश की साख बचाने में नाकाम रहे और इसी वजह से उनकी मंत्रालय से विदाई हुई।
दिल्ली हाईकोर्ट और संसदीय समिति ने ट्विटर से साफ शब्दों में कहा था कि देश का कानून सबसे ऊपर है और उसे मानना ही होगा। संसदीय समिति ने ट्विटर से पूछा था कि क्या आप भारत के कानून का पालन करते हैं? इस पर ट्विटर ने कहा था कि हम अपनी पॉलिसी को फॉलो करते हैं, जो देश के कानून के अनुसार है। इस दलील पर समिति ने आपत्ति जताते हुए कंपनी से तल्ख लहजे में कहा था कि हमारे यहां देश का कानून सबसे बड़ा है, आपकी पॉलिसी नहीं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कहा था कि अगर ट्विटर कानून नहीं लागू करता है तो उसे किसी तरह की सुरक्षा नहीं दी जा सकती। जस्टिस रेखा पिल्लई ने कहा था कि अगली सुनवाई में IT कानून लागू करने पर आप स्पष्ट जवाब के साथ आइएगा, वर्ना मुश्किल में पड़ जाएंगे।
इससे पहले नए कानून न मानने की वजह से ही ट्विटर ने भारत में थर्ड पार्टी कंटेंट के लिए लीगल शील्ड को खो दी थी। यानी सरकार की तरफ से उसे कंटेंट को लेकर किसी तरह की सुरक्षा नहीं दी जाएगी।
आसान शब्दों में कहा जाए तो अब ट्विटर के ऊपर आईपीसी की धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है। अब जब उसने कानून मानना शुरू कर दिया है, ऐसे में सरकार इस पर दोबारा विचार कर सकती है।
25 जून को ट्विटर ने तब के IT मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद का अकाउंट एक घंटे के लिए ब्लॉक कर दिया था। तब ट्विटर ने अमेरिकी कॉपी राइट एक्ट का हवाला दिया था। इसका सरकार ने विरोध किया। इसके बाद ट्विटर पर 5 केस दर्ज किए गए, क्योंकि उसने नए IT कानूनों का पालन न करके अपनी लीगल शील्ड खो दी है।
सरकार की तरफ से उसे कंटेंट को लेकर किसी भी तरह की सुरक्षा नहीं दी जाएगी। ट्विटर के ऊपर आईपीसी की धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है। इस स्थिति के लिए ट्विटर खुद ही जिम्मेदार है।
1. गाजियाबाद पुलिस ने मुस्लिम बुजुर्ग से मारपीट और अभद्रता के मामले में ट्विटर के खिलाफ FIR दर्ज की थी।
2. देश का गलत झंडा दिखाने पर बुलंदशहर में मामला दर्ज किया गया।
3. देश का गलत झंडा दिखाने पर मध्य प्रदेश की साइबर सेल में केस दर्ज किया गया।
4. चाइल्ड पोर्नोग्राफिक कंटेंट के मामले में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने केस दर्ज किया। ये राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की शिकायत पर दर्ज किया गया।
5. हिंदू देवी को लेकर ट्विटर के प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कंटेंट को लेकर दिल्ली में केस दर्ज।
फिलहाल ट्विटर के खिलाफ देश की जनता में भी रोष बन चुका था।

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