UP जिला पंचायत चुनाव परिणाम 2021में BJP की 75 में से 67 सीटों पर जीत ।

भाजपा ने कुल 75 जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर 67 में जीत दर्ज की है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): यूपी के जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावों के नतीजेन आ गए हैं। उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में अपना परचम लहरा दिया है। भाजपा के 21 प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध जीते थे और शनिवार को 53 पदों पर मतदान के बाद आए परिणाम में भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष का मैदान समेट दिया।
भाजपा ने शनिवार को 53 जिलों में हुए मतदान में बेहतरीन जीत दर्ज की। भाजपा को एटा, संतकबीरनगर, आजमगढ़, बलिया, बागपत, जौनपुर और प्रतापगढ़ में छोड़कर अन्य 44 जिलों में जीत मिली है। 75 जिलों में से भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 14 जिलों में से 13 में, बृज क्षेत्र के 12 जिलों में 11, कानपुर क्षेत्र के 14 जिलों में 13, अवध क्षेत्र के 13 जिलों में 13, काशी क्षेत्र के 12 जिलों में दस तथा गोरखपुर क्षेत्र के 10 जिलों में से सात में जीत मिली है।
भाजपा ने कुल 75 जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर 67 में जीत दर्ज की है। प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के खाते में पांच में सीट हैं। राष्ट्रीय लोकदल ने एक सीट पर जीत दर्ज की। जौनपुर से निर्दल श्रीकला रेड्डी और प्रतापगढ़ में जनसत्ता दल जनतांत्रिक की माधुरी पटेल जीती हैं। भाजपा ने समाजवादी पार्टी को उनके गढ़ मैनपुरी, रामपुर, बदायूं व आजमगढ़ के साथ ही कांग्रेस के किले रायबरेली में भी भाजपा के प्रत्याशियों ने शिकसत दी है।
उत्तर प्रदेश की सत्ता का सेमीफाइनल माने जा रहे जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा को प्रत्याशियों को निर्दलियों का काफी समर्थन मिला है। इसके साथ ही भाजपा के साथ गठबंधन करने वाली अपना दल (एस) को भी दो में से एक सीट पर जीत मिली है। जौनपुर में बाहुबली बसपा के पूर्व सांसद धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला सिंह को जीत मिली है। इसके साथ ही समाजवादी पार्टी ने बलिया व आजमगढ़, रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का दबदबा प्रतापगढ़ में कायम है। उनकी पार्टी जनसत्ता दल ने खाता खोला तो बागपत में रालोद ने तमाम उठापटक के बाद भी जीत दर्ज करने में सफलता प्राप्त की।
प्रदेश के 75 जिलों में जिन 22 जिलों में निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए हैं, उनमें 21 भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। इटावा में समाजवादी पार्टी ने अपना गढ़ बचाने में सफलता प्राप्त की है। 29 जून को नाम वापसी की अवधि गुजरते ही सभी के चुने जाने की घोषणा कर दी गई। निर्विरोध चुने गए अध्यक्षों में जहां 21 भाजपा के हैं वहीं एक मात्र इटावा के जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी ही सपा के हाथ लगी है। फिलहाल इस जीत से भाजपा का मनोबल बढ़ा है।

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