कोवैक्सीन की वैश्विक मान्यता को सुनिश्चित करने के लिए डब्ल्यूएचओ के साथ डाटा साझा कर रही सरकार ।

भारतीय कोविड-19 वैक्सीन निर्माताओं को क्षतिपूर्ति से राहत देने के सवाल पर पॉल ने कहा कि अभी किसी भी विदेशी या भारतीय कंपनी को वैक्सीन के प्रतिकूल प्रभाव पर क्षतिपूर्ति से राहत देने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): कोरोना के कहर के बीच भारत ने अपनी कोवैक्सीन नाम की कोरोना वैक्सीन बनाई है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि भारत बायोटेक की कोवाक्सिन वैक्सीन को वैश्विक मान्यता दिलाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ डाटा साझा किया जा रहा है। सरकार ने कहा कि हम जल्द से जल्द यह मील का पत्थर हासिल करना चाहते हैं।
कोवाक्सिन को वैश्विक मान्यता संबंधी सवाल पर नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वीके पॉल ने कहा कि सरकार इस पर काम कर रही है। 24 मई को हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (बीबीआईएल) ने सरकार को बताया था कि वह कोवाक्सिन वैक्सीन के लिए आपातकालीन उपयोग सूची (ईयूएल) हासिल करने के लिए डब्ल्यूएचओ को 90 फीसदी दस्तावेज पहले ही दे चुका है।
भारतीय कोविड-19 वैक्सीन निर्माताओं को क्षतिपूर्ति से राहत देने के सवाल पर पॉल ने कहा कि अभी किसी भी विदेशी या भारतीय कंपनी को वैक्सीन के प्रतिकूल प्रभाव पर क्षतिपूर्ति से राहत देने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
उन्होंने कहा कि कोई भी फैसला देश और लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मसला विदेशी कंपनियों खासकर फाइजर के संदर्भ में आया है। सरकार अमेरिकी कंपनी और अन्य लोगों के साथ ऐसी मांग पर बातचीत कर रही है। सैद्धांतिक रूप से विदेशी कंपनियां क्षतिपूर्ति से राहत दिए जाने की उम्मीद कर रही है। फिलहाल भारत को बड़े स्तर पर स्वयं के लिए ही कोरोना की वैक्सीन की आवश्यकता है।

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