रूसी कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक V को मार्च में उपयोग की मिल सकती है अनुमति।

इस समय दुनियाभर में जो 10 वैक्सीन अप्रूवल हुई है, उनमें स्पुतनिक V के साथ-साथ अमेरिकी कंपनियों फाइजर और मॉर्डना की वैक्सीन ही 90% से ज्यादा इफेक्टिव साबित हुई है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): भारत को जल्द ही तीसरी कोरोना की वैक्सीन मिल सकती है। इस समय भारत में कोरोना के खिलाफ चल रहे वैक्सीनेशन अभियान में दो वैक्सीन-कोवीशील्ड और कोवैक्सिन का इस्तेमाल हो रहा है। जल्द ही इसमें तीसरी वैक्सीन जुड़ सकती है। यह रूसी वैक्सीन स्पुतनिक V होने की उम्मीद है। भारत में हैदराबाद की कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरी इसके ट्रायल्स कर रही है और उम्मीद की जा रही है कि मार्च में वह भी इमरजेंसी अप्रूवल के लिए ड्रग रेगुलेटर से संपर्क कर सकती है। यह वैक्सीन भारत में 10 डॉलर (लगभग 730 रुपए) में मिलेगी।
इस समय दुनियाभर में जो 10 वैक्सीन अप्रूवल हुई है, उनमें स्पुतनिक V के साथ-साथ अमेरिकी कंपनियों फाइजर और मॉर्डना की वैक्सीन ही 90% से ज्यादा इफेक्टिव साबित हुई है। इस वजह से रूसी वैक्सीन के भारत में उपलब्ध होने से कोरोना के खिलाफ लड़ाई को मजबूती मिलने की उम्मीद की जा सकती है। रूसी वैक्सीन को रूस के गामालेया इंस्टीट्यूट ने बनाया है और इसकी फंडिंग रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) ने की है। दुनियाभर से इस वैक्सीन को लेकर डील भी RDIF ही कर रहा है।
RDIF के सीईओ किरिल दिमित्रेव ने कहा कि इस समय 90% से अधिक इफेक्टिवनेस साबित करने वाली मॉर्डना और फाइजर की वैक्सीन की कीमत स्पुतनिक V की कीमत से तीन गुना अधिक है। इससे रुसी वैक्सीन को पूरी दुनिया में ज्यादा से ज्यादा देशों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। अच्छी बात यह है कि इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर स्टोर किया जा सकता है जो मौजूदा सप्लाई चेन में आसानी से उपलब्ध है।रुसी वैक्सीन दो एडेनोवायरस वेक्टर से बनी है। कंपनी इस समय ब्रिटिश फर्म एस्ट्राजेनेका से उसकी वैक्सीन- कोवीशील्ड- के साथ कंबाइंड ट्रायल्स पर बात कर रही है। कंपनी का दावा है कि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन की इफेक्टिवनेस इससे और बढ़ जाएगी।
अगर रुसी वैक्सीन सभी ट्रायल्स में खरी उतरती है और भारत में अप्रूवल पाती है तो यह ट्रायल्स में सबसे ज्यादा इफेक्टिवनेस साबित करने वाली वैक्सीन होगी। भारत में इस्तेमाल हो रही कोवीशील्ड वैक्सीन की इफेक्टिवनेस 70% रही है जबकि कोवैक्सिन के फेज-3 ट्रायल्स अब तक खत्म नहीं हुए हैं। इस वजह से इसकी इफेक्टिवनेस को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सरकार को कोवीशील्ड का एक डोज 200 रुपए में और कोवैक्सिन का एक डोज 295 रुपए में मिल रहा है। वहीं, बाजार में कोवीशील्ड का डोज 1,000 रुपए का होगा। कोवैक्सिन ने अब तक बाजार कीमत का खुलासा नहीं किया है। ऐसे में 730 रुपए वाली स्पुतनिक V बाजार में सबसे सस्ती और इफेक्टिव वैक्सीन रह सकती है।
​​​​​​​दिमित्रेव ने कहा कि स्पुतनिक V को अब तक रूस, बेलारूस, सर्बिया, अर्जेंटीना, बोलिविया, अल्जीरिया, फिलिस्तीन, वेनेजुएला, पैराग्वे, यूएई, तुर्कमेनिस्तान में अप्रूवल मिल चुका है। हंगरी इसे अप्रूवल देने वाला यूरोपीय यूनियन का पहला देश बन गया है। यूरोपीय यूनियन के ड्रग रेगुलेटर से जल्द ही अप्रूवल मिल सकता है। स्पुतनिक V को रूस ने बहुत जल्द ही विकसित कर लिया था।

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