जवाहरलाल नेहरू पोर्ट के लिए पब्लिक-प्राइवेट इन्वेस्टमेंट से सरकार इकट्ठा करेगी 4 हजार करोड़ रुपए।

इस इन्वेस्टमेंट के तहत सरकार घरेलू और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कार्गो के लॉजिस्टिक लागत को कम करना चाहती है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ):देश के बंदरगाहों की स्थिति मजबूत करने के लिए सरकार ‘सागरमाला’ पॉलिसी का प्रयोग कर रही है। साथ ही लॉजिस्टिक लागत भी कम करने का भी लक्ष्य है। इसी दिशा में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) के विकास के लिए भारी इन्वेस्टमेंट जुटाने की योजना है।
जहाज मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय ‘सागरमाला’ पॉलिसी के तहत पोर्ट में स्पेशल इकोनॉमी जोन (SEZ) के लिए पब्लिक और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट के तहत 4 हजार करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट आएगा। खासबात यह है कि इससे 72.6 हजार नई नौकरियों के अवसर भी खुलेंगे। SEZ के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में 1.50 लाख रोजगार पैदा करने की है।
इकोनॉमी जोन में डेवलेपमेंट से घरों की जरूरत पैदा होगी, जिसे JNPT और सीडको द्वारा हाउसिंग स्कीम के तहत तैयार किया जाएगा। ड्राफ्ट के मुताबिक सेज में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 500 करोड़ रुपए से अधिक रकम अनुमानित है। दरअसल, सरकार का उद्देश्य सागरमाला पॉलिसी के तहत देश के लॉजिस्टिक क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधारना है। इस इन्वेस्टमेंट के तहत सरकार घरेलू और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कार्गो के लॉजिस्टिक लागत को कम करना चाहती है।
जवाहरलाल नेहरू पोर्ट देश के शीर्ष 12 बंदरगाहों में शुमार है। महाराष्ट्र के नवी मुंबई में स्थित इस पोर्ट को पहले नवा शिवा पोर्ट भी कहा जाता था। यह भारत के पश्चिमी तटीय क्षेत्र का प्रमुख पोर्ट है। 80 लाख TEU की क्षमता के साथ यह दुनिया का 28वां सबसे बड़ा कंटेनर टर्मिनल है। खासबात यह है कि देश में आने वाले कुल कार्गो कंटेनर का आधा हिस्सा इसी पोर्ट पर उतरते हैं। देश के पोर्ट कंटेनर ट्रैफिक में इसकी हिस्सेदारी 52% है। 2022 में इसकी योजना एक करोड़ TEU क्षमता तक करने की है। यहां TEU एक मापक है, जो कंटेनर के साइज को मापता है। यह बीस फुट के बराबर होता है। यह बंदरगाह की परियोजना निवेश व रोजगार के लिए अवसर खोलेगी।

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