आतंकियो से भिड़ने वाले शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह की गोली मारकर हत्या।

बीते शुक्रवार को बलविंदर सिंह की पंजाब में गोली मारकर हत्या कर दी गई जिसके बाद मामला काफ़ी गम्भीर हो गया है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ):बीते शुक्रवार को बलविंदर सिंह की पंजाब में गोली मारकर हत्या कर दी गई जिसके बाद मामला काफ़ी गम्भीर हो गया है।बलविंदर सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ अग्रिम पंक्ति में मोर्चा संभाला था। आतंकवाद से ग्रस्त तरनतारन के कस्बा भिखीविंड में बलविंदर सिंह ने खालिस्तान कमांडो फोर्स के आतंकी परमजीत सिंह पंजवड़ को कड़ी चुनौती दी थी। बलविंदर सिंह ने 1980 से लेकर 1993 तक आतंकवादियों से इतनी ताकत से लड़ाई लड़ी थी कि तत्कालीन राज्यपाल जेएफ रिबेरो भी उनके प्रशंसक बन गए थे।सितंबर 1990 में पंजवड़ ने 200 आतंकवादियों के साथ बलविंदर सिंह के घर में हमला किया था। इसमें रॉकेट लांचर का भी इस्तेमाल किया गया था। बलविंदर के घर में पक्के बंकर बने थे। आतंकवादियों ने बलविंदर के घर को चारों तरफ से घेर लिया था, उनके घर की तरफ जाने वाले सभी रास्ते भी बंद कर दिए गए थे ताकि पुलिस व अर्धसैनिक बल मदद को न पहुंच सके।

पांच घंटे की इस मुठभेड़ में पंजवड़ भाग खड़ा हुआ था और उसके कई गुर्गे मारे गए थे। परिवार के सभी सदस्यों ने स्टेनगन आदि हथियारों से आतंकवादियों का बहादुरी से मुकाबला किया था। इसके बाद बलविंदर सिंह का नाम राष्ट्रीय पटल पर आ गया था। इसके बाद 1993 में गृह मंत्रालय की सिफारिश पर तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने बलविंदर सिंह, उनके बड़े भाई रंजीत सिंह और उनकी पत्नियों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया था।आतंकवाद के दौर में जब थानों के दरवाजे नहीं खुलते थे, तब बलविंदर सिंह ने पंजवड़ जैसे आतंकियों के साथ अपने घर में मोर्चा बना कर लोहा लेते थे। पंजवड़ और उसके गुर्गों ने बलविंदर के घर में 1980 से लेकर 1993 तक कई बार हमले किए। 1990 से लेकर 93 के बीच ही उनके घर पर 11 बार हमले हुए थे। वहीं इसी साल मार्च में पंजाब पुलिस ने बलविंदर सिंह की सुरक्षा वापस ले ली थी जिसे बाद ये दुर्घटना घटी।

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.