CM योगी ने निभाया ‘राजधर्म’, पिता के निधन के बावजूद आंखों में नमी के साथ करते रहे मीटिंग!

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पैतृक परिवार उत्तराखंड में रहता है। सोमवार (अप्रैल 20, 2020) को सीएम योगी के पिता आनंद सिंह बिष्ट का निधन हो गया। अब इसके साथ ही सोशल मीडिया पर वो समूह सक्रिय हो गया है, जो हिंदूवादी नेताओं के साथ भी दुःखद हो तो जम कर जश्न मनाता है। इसी तरह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता का निधन होने पर भी फेसबुक पर कुछ लोगों ने जम कर ‘हाहा’ रिएक्ट किया, जिनमें अधिकतर मुसलमान थे। इन्हें सीएम योगी के पिता के निधन से ख़ुशी हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बचपन में ही संन्यास ले लेने के कारण अपने परिवार के साथ नहीं रहते हैं लेकिन अपने उत्तराखंड दौरे के दौरान वो परिवार से कभी-कभी मुलाक़ात करते रहे हैं। 89 वर्षीय आनंद सिंह बिष्ट लम्बी बीमारी से जूझ रहे थे और उनका इलाज कई दिनों से एम्स दिल्ली में चल रहा था। जब उनके निधन की ख़बर आई, तब मुख्यमंत्री योगी लखनऊ में टीम-11 की बैठक में व्यस्त थे लेकिन उन्होंने बैठक नहीं रोकी। बैठक ख़त्म होने के बाद ही उन्होंने परिवार से सम्पर्क किया। बिष्ट की तबियत रविवार से ही गंभीर हो गई थी। एबीपी न्यूज़ ने फेसबुक पर जब सीएम योगी के पिता के निधन की ख़बर पोस्ट की, तो उस पर 30 लोगों ने ‘हाहा’ रिएक्ट किया, जिसमें लुकमान मिर्ज़ा, फैज़ रजा हाशमी, सोहैल शेख, आकिब जुनैद, शाहरुख़ पठान, मोहम्मद आदिल, सैयद नावेद रहमान और सादिक अली शामिल थे। ये सभी मुसलमान ही हैं। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की ख़बर वाली पोस्ट पर एक निसय किलाम नामक व्यक्ति ने लाफिंग इमोजी देते हुए लिखा कि उसे लगा कि योगी आदित्यनाथ की ही मृत्यु हो गई है। इसी तरह अन्य मीडिया पेजों की ख़बरों पर भी ‘हाहा’ रिएक्शन दिया गया। इससे पहले जब कमलेश तिवारी की इस्लामी कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी थी, तब भी बड़ी संख्या में मुसलमानों ने ‘हाहा’ रिएक्ट किया था। पुलवामा में हुए आतंकी हमले में जब सीआरपीएफ के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे, तब भी ‘हाहा’ रिएक्शन देने वालों की फ़ौज सामने आई थी। हिंदूवादी नेताओं के साथ कुछ भी बुरा हो तो सोशल मीडिया पर जम कर जश्न मनाया जाता है। ये सब तब हो रहा है, जब देश महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं की निर्मम मॉब-लिंचिंग से उबल रहा है, जिसे मीडिया ने छिपाने की भरसक कोशिश की। बता दें कि जब योगी आदित्यनाथ की माँ ने अपने बेटे को पहली बार संन्यासी की वेशभूषा में देखा था तो वो गोरखनाथ मंदिर में फूट-फूट कर रोने लगी थीं, तब योगी के पिता ने उन्हें समझाया था कि अब यहीं से लोक कल्याण होना है, ये रोने का समय नहीं है। इसके चार साल बाद योगी आदित्यनाथ अपने माता-पिता से भिक्षा लेने के लिए पंचूर पहुँचे थे। योगी के गुरु महंत अवैद्यनाथ ने कहा था कि संन्यासी होने का ये मतलब नहीं है कि परिवार से कभी नहीं मिल सकते।

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