देश में 80% कोरोना संक्रमण के मामलों में लक्षण सामान्य, केवल 20% मरीजों की स्थिति गंभीर- स्वास्थ्य मंत्रालय

गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों से कहा कि इंट्रा स्टेट ट्रांसपोर्टेशन को नहीं रोका जाए और जिले स्तर पर जरूरी सेवा देने वाली सभी कंपनियों के कर्मचारियों को भी पास जारी किया जाए।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : ओम तिवारी : पूरी दुनिया सहित भारत में भी कोरोना के कारण व्याप्त भय के माहौल के बीच  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से रविवार को बताया गया कि देश में  कोरोना के 80% मामलों में लक्षण अत्यंत सामान्य हैं। केवल 20% केस ही गंभीर लक्षण वाले हैं। मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि कोविड मरीजों का तीन चरणों में इनका इलाज किया जा रहा है। पहले चरण में संदिग्ध मरीजों को क्वारैंटाइन सेंटर में रखा जाता है। पॉजिटिव केस आने पर उन्हें कोविड हेल्थ केयर सेंटर में शिफ्ट कर दिया जाता है। यहां भी आईसीयू की सुविधा होती है। लव अग्रवाल ने कहा कि इसमें अगर कोई गंभीर मरीज होता है तो उन्हें डेडीकेटेड कोविड अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। ऐसे मरीजों की संख्या 15% ही होती है। गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्रीय स्तर पर लॉकडाउन से होने वाली परेशानी को कम करने के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। इसमें रेलवे, सिविल एविएशन के अधिकारी मिलकर राज्यों में आ रही सभी परेशानियां सुलझा रहे हैं। श्रीवास्तव के मुताबिक देशभर में खाद्य पदार्थों, जरूरी सामानों के ट्रांसपोर्टेशन पर बिल्कुल भी रोक नहीं है। गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों से कहा कि इंट्रा स्टेट ट्रांसपोर्टेशन को नहीं रोका जाए और जिले स्तर पर जरूरी सेवा देने वाली सभी कंपनियों के कर्मचारियों को भी पास जारी किया जाए। अग्रवाल ने बताया कि अब तक 8 हजार से ज्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इसमें 1671 मरीज ही गंभीर हैं। मलतब आज की तारीख में कोविड-19 अस्पताल में 1671 बेड की ही जरूरत है, लेकिन हमारे पास 1 लाख 5 हजार 600 से अधिक बेड उपलब्ध हैं।
अग्रवाल ने बताया कि जिला स्तर पर अस्पतालों में कोरोना टेस्टिंग की सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। इसके लिए देश के 14 एम्स को नोडल अस्पताल बनाया गया है। इनके डॉक्टर्स देशभर के जिला अस्पतालों में टेस्टिंग की सुविधा बढ़ाने पर काम करेंगे। दिल्ली के सफदरजंग में 500 बेड का एक कोरोना डेडिकेटेड अस्पताल है। आंध्र प्रदेश में 1 हजार से ज्यादा बेड का अस्पताल तैयार हो चुका है। हर अस्पताल में वेंटिलेटर और आईसीयू की सुविधाएं मौजूद हैं। तमिलनाडु में 350, केरल में 950, अहमदाबाद में 1022, भुवनेश्वर में 1050, मुंबई में 700 बेड का कोविड-19 अस्पताल बनकर तैयार हो चुका है। कोरोना से निपटने के लिए निजी क्षेत्र का भी सहयोग लिया जा रहा है। अपोलो अस्पताल में चार टेस्टिंग लैब बनाए गए हैं। मैक्स वेलफेयर ने अपने दो अस्पतालों को कोरोना संक्रमितों के लिए दिया है।केंद्रीय विभागों के अन्य अस्पताल भी मिलकर काम कर रहे हैं। 9000 से ज्यादा बेड वाले अस्पताल चिन्हित किए गए हैं। जिन्हें कोरोना मरीजों के लिए तैयार किया जाएगा। 29 मार्च को देश में 979 पॉजिटिव केस थे। अभी 8356 संक्रमित हैं। इनमें से केवल 20% ही ऐसे हैं, जिन्हें आईसीयू की जरूरत है। हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि साउथ कोरिया की तरह हमारे देश में भी यह बीमारी वापसी ना करे। हम अपने कंटेनमेंट उपायों को सही ढंग से लागू कर रहे हैं। इसमें अगर कोई भी चूक हुई तो सारी कोशिशें बेकार हो जाएंगी। हर दिन 15 हजार सैंपल की जांच हो रही है। संक्रमितों के संपर्क में आने वाले लोगों और संदिग्धों की ट्रेसिंग तेज कर दी गई है। इन सबके साथ ही कोरोना की महामारी का वक्सीं धुन्धने पर बि तेजी से काम हो रहा है।

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