मोबाइल फोन हो जाएंगे महंगे, केंद्र ने GST दर बढ़ाकर 12 से 18 फीसदी किया।

निर्मला सीतारमण ने बताया कि इस समय मोबाइल फोन और इसके खास पुर्जो पर जीएसटी की दर 12 फीसदी है। परिषद ने इन दोनों पर जीएसटी दर बढ़ा कर 18 फीसदी करने पर सहमति दी है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) :    नए वित्त वर्ष के पहले दिन यानी 1 अप्रैल से मोबाइल फोन महंगे हो जाएंगे। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में शनिवार को यहां हुई वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 39वीं बैठक में मोबाइल फोन पर लगने वाले जीएसटी को 12 से बढ़ाकर 18 फीसदी करने का फैसला किया गया। दूसरी ओर सरकार ने हाथ से बनी और मशीन से बनी हर तरह की माचिस पर जीएसटी की दर बढ़ाकर 12 फीसदी कर दी है। निर्मला सीतारमण ने बताया कि इस समय मोबाइल फोन और इसके खास पुर्जो पर जीएसटी की दर 12 फीसदी है। परिषद ने इन दोनों पर जीएसटी दर बढ़ा कर 18 फीसदी करने पर सहमति दी है। देश में हवाई जहाज मरम्मत, रिपेयर और ओवहॉल (एमआरओ) सेवा को बढ़ावा देने के लिए इस सेवा पर जीएसटी दर में कटौती का फैसला किया गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि अभी इस पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी देय होता है। इसे घटा कर पांच फीसदी करने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही उन्हें पूर्ण इनपुट टैक्स क्रेडिट की भी सुविधा दी जाएगी। ये सभी निर्णय एक अप्रैल 2020 से प्रभावी होंगे। कोरोना वायरस के चलते चीन से मोबाइल उपकरणों की आपूर्ति प्रभावित होने से पहले ही हैंडसेट कंपनियां कीमतों में इजाफे की बात कह रही थीं।  परिषद की बैठक में माचिस पर लगने वाले जीएसटी की दर को भी युक्तिसंगत करने का फैसला किया गया। अभी हाथ से बनने वाले माचिस पर पांच फीसदी जीएसटी देय होता है, जबकि मशीन से बनी माचिस पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है। तमिलनाडु की तरफ से इसके युक्तिकरण की मांग आई थी क्योंकि वहां माचिस काफी मात्रा में बनाए जाते हैं। परिषद ने इस पर विचार कर सभी किस्म के माचिस पर जीएसटी की दर 12 फीसदी करने का फैसला किया। बैठक में जीएसटी भुगतान में देरी पर एक जुलाई से कुल कर पर ब्याज लगाने की बात कही गई है। हालांकि, छोटे कारोबारियों को कुछ राहत दी गई है। जीएसटीआर-9सी दाखिल करने की अंतिम समयसीमा में ढील दी गई है। पांच करोड़ तक सालाना टर्न ओवर वाले कारोबारियों को वित्त वर्ष 2018-19 के लिए सालाना रिटर्न दाखिल करने और विवरण के समाधान के लिए अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 जून 2020 तक बढ़ाया गया है। ये नियम विवरण के समाधान दाखिल करने में देरी होने पर भी लागू होगा। वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि जीएसटी नेटवर्क को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए अगली तीन जीएसटी परिषद की बैठकों में इंफोसिस के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी को उपस्थित होने के लिए कहा गया है। सीतारमण ने कहा कि जुलाई 2020 तक इंफोसिस द्वारा एक बेहतर जीएसटीएन प्रणाली सुनिश्चित की जानी है। जीएसटी की आईटी प्रणालियों के सुचारू संचालन के लिए नीलेकणी ने जनवरी 2021 तक का समय मांगा था। वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद ने इन्फोसिस को अधिक कुशल श्रमशक्ति की तैनाती तथा हार्डवेयर की क्षमता बढ़ाने के लिए कहा है। जीएसटी परिषद ने ई-बिल और क्यूआर कोड को लागू करने की समयसीमा भी बढ़ाकर एक अक्तूबर, 2020 कर दी। पहले यह एक अप्रैल से लागू होनी थी। इसके अलावा निर्यातकों के लिए ई-वॉलेट स्कीम की शुरुआत भी अब 31 मार्च, 2020 कर दी गई है। इसके अलावा परिषद ने एक नई सुविधा ‘अपने आपूर्तिकर्ता को जानें’ को भी मंजूरी दी है। इसके तहत हर रजिस्टर्ड व्यक्ति को उन आपूर्तिकर्ताओं के बारे में कुछ मूलभूत जानकारियां हासिल हो सकेंगी, जिनके साथ वे कारोबार कर रहे हैं।

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