सुप्रीम कोर्ट का आदेश : टेलीकॉम कंपनियों को ब्याज सहित चुकाना होगा बकाया 92 हजार करोड़ रुपये।

DoT की याचिका को शीर्ष अदालत ने मंजूरी देते हुए कहा कि टेलीकॉम कंपनियों को 92 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया चुकाना ही होगा।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : देश की बड़ी टेलीकाम कंपनियों पर सुप्रीम कोर्ट ने गाज गिराई है। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्‍पतिवार को भारती एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया समेत टेलीफोन कंपनियों को उन पर बकाया 92 हजार करोड़ रुपये मय ब्‍याज और जुर्माना समेत चुकाने के निर्देश जारी किए हैं। DoT की याचिका को शीर्ष अदालत ने मंजूरी देते हुए कहा कि टेलीकॉम कंपनियों को 92 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया चुकाना ही होगा। अदालत ने इस मामले में अगस्‍त में ही फैसला सुरक्षित रख लिया था। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि दूरसंचार कंपनियों को एडजेस्टेड ग्रॉस रेवेन्यु (AGR) का भुगतान करना ही होगा। बता दें कि दूरसंचार विभाग (डीओटी) की कुल मांग लगभग 92,000 करोड़ रुपये है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि हम DoT की अपीलों को इजाजत दे रहे हैं। हम दूरसंचार विभाग की याचिका को स्वीकार करते हैं, जबकि कंपनियों की याचिका खारिज करते हैं। मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से गुजारिश की कि वह उचित समय सीमा आवंटित करें क्योंकि गणना को चुनौती देने वाले मुकदमे का तीसरा दौर हो सकता है। इस पर अदालत ने साफ किया कि मामले में आगे कोई भी मुकदमा नहीं होना चाहिए। अदालत ने रकम चुकाने के लिए कंपनियों को छह महीने का वक्‍त द‍िया है। अदालत ने कहा कि रकम चुकाने को लेकर वह जल्‍द अलग आदेश पारित करेगी। बता दें कि टेलीकॉम कंपनियां एजीआर के तहत सरकार के साथ लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूज चार्ज शेयर करती हैं। गौरतलब है कि AGR में क्या शामिल होगा इसको लेकर टेलीकॉम कंपनियों और सरकार के बीच विवाद है। दूरसंचार विभाग के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियों का लाइसेंस और स्पेक्ट्रम फीस का करीब 92 हजार करोड़ रुपए बकाया हैं। इसमें भारती एयरटेल पर 21,682.13 करोड़ रुपए, वोडाफोन-आइडिया पर 19,822.71 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया हैं। आदेश के मुताबिक, इस रकम के साथ ही टेलीकॉम कंपनियों को पेनल्टी भी देनी होगी।

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