राफेल पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, डील की कीमतों का अभी खुलासा करने की जरूरत नहीं

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने राफेल डील की जांच कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ)  : सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को राफेल डील की कीमत और उसके ठेके की निर्णय प्रक्रिया पर सुनवाई जारी है। सरकार और याचिकाकर्ताओं के वकील शीर्ष अदालत में अपनी-अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने राफेल डील की जांच कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है। बता दें कि केंद्र सरकार ने सोमवार को सीलबंद लिफाफे में राफेल डील की कीमत सुप्रीम कोर्ट को सौंपी है। जबकि राफेल डील के ठेके से जुड़े निर्णय प्रक्रिया के दस्तावेज की एक प्रति याचिकाकर्ताओं को दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई अब दोपहर बाद 2 बजे शुरू होगी।सुनवाई के दौरान सीजेआई ने प्रशांत भूषण की खिंचाई की है। सीजेआई ने भूषण के नोट में गलतियों की ओर इशारा किया। प्रधान न्यायाधीश की इस टिप्पणी पर भूषण ने कहा कि नोट जल्दबादी में तैयार किया गया। इस पर सीजेआई ने कहा-‘जल्दबाजी में मत पड़िए मिस्टर भूषण’। प्रशात भूषण ने अनिल अंबानी की कंपनी को ऑफसेट कंपनी बनाए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने दलील दी कि डील में एक ऐसी कंपनी को भागीदार बनाया गया जिसका इस क्षेत्र में कोई अनुभव नहीं है।प्रशांत भूषण ने कोर्ट के समक्ष अपनी पांच मांगें रखी है। भूषण ने कोर्ट से कहा कि सरकार ने खुद संसद में राफेल डील की कीमत का खुलासा किया है, ऐसे में यहां गोपनीयता मुद्दा नहीं हो सकता। सरकार की यह दलील कि वह कीमत का खुलासा नहीं कर सकती, तर्कहीन है। भूषण ने कहा कि सरकार ने जो नई डील की है उसकी कीमत पहले की डील से 40 प्रतिशत ज्यादा है।प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सरकार का पक्ष रख रहे अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से जानना चाहा कि क्या वायु सेना का कोई अधिकारी यहां मौजूद है जिससे कोर्ट इस मामले में सवाल-जवाब कर सके? प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कुल मिलाकर हम वायु सेना के केस को देख रहे हैं। सीजेआई ने कहा, ‘हम इस मामले में वायु सेना के अधिकारी से पूछताछ करना चाहेंगे।’सरकार के पक्ष में दलीलें पेश कर रहे अटार्नी जनरल ने कहा कि गोपनीयता का मुद्दा लड़ाकू विमान की कीमत पर नहीं है बल्कि यह लड़ाकू विमान की वैमानिकी एवं उसमें लगे हथियारों पर है। हथियार और वैमानिकी के साथ राफेल की कीमत की जानकारी कोर्ट को सौंपा जा चुकी है लेकिन कोर्ट इसकी न्यायिक पुनर्समीक्षा नहीं कर सकती। सीजेआई ने कहा कि राफेल डील की कीमत पर चर्चा तभी होगी जब कोर्ट यह चाहेगा कि यह जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।मामले में आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह की तरफ से पेश वकील ने पीठ से कहा कि 36 लड़ाकू विमान की कीमत सरकार संसद में दो बार सार्वजनिक कर चुकी है। ऐसे में सरकार का यह कहना कि लड़ाकू विमान की कीमत की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती, यह स्वीकार करने योग्य नहीं है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने राफेल डील की जांच कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की।

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