100 सालों से चली आ रही है परम्‍परा, दीपावली के दिन भी फुंका जाता है रावण

(एन एल एन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : हमीरपुर जिले के राठ कस्बे में एक ऐसी परंपरा सौ साल से कायम है, जिसमें दीपावली के दिन रावण का पुतला फूंककर दशहरा मनाया जाता है। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए भारी जन सैलाब उमड़ता है। रावण जलने के बाद लोग एक दूसरे से गले मिलते हैं, इसके बाद अपने घरों में जाकर दीये जलाते हैं। हमीरपुर: पूरे देश में वैसे तो रावण के पुतले का दहन कर दशहरा मनाए जाने की परंपरा कायम है। लेकिन हमीरपुर जिले के बड़े कस्बे में दीपावली के दिन रावण के पुतले का दहन करने की अनोखी परंपरा आज भी कायम है। यह परंपरा भी सौ साल पुरानी है, जिसे लेकर इलाके में अभी से तैयारियां चल रही हैं। दशहरा से शुरू रामलीला का समापन भी दीपावली के दिन होगा।

हमीरपुर जिला मुख्यालय से 84 किमी दूर राठ नगर है, जहां दीपावली का रावण का पुतला फूंककर दीपक जलाये जाते है। यूं तो रावण के पुतले का दहन दशहरा में होता है, मगर राठ नगर की अनोखी परंपरा में दीपावली के दिन ही लंकेश का पुतला फूंका जाता है। राठ के बुजुर्गों ने बताया कि दीपावली के दिन दशहरा मनाने और रावण का पुतला दहन करने की परंपरा सौ सालों से चली आ रही है। कोरोना संक्रमण काल में यह परंपरा एक बार टूटी थी। लेकिन इस बार दीपावली के दिन रावण के पुतले का दहन कर दशहरा मनाए जाने के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

रामलीला कमेटी के सदस्य हरीमोहन चंदसौरिया ने बताया कि दशहरे के दिन से यहां चौदह दिवसीय रामलीला का मंचन वृंदावन के कलाकार कर रहे हैं। जिसे देखने के लिए लोगों की रोजाना भीड़ उमड़ती है। बताया कि दीपावली की शाम रावण के पुतले का दहन के साथ रामलीला का समापन हो जाएगा। बताया कि बुंदेलखंड के इसी कस्बे में ही यह परंपरा कायम है, जिसमें दीपावली की शाम रावण का पुतला फूंककर दशहरा मनाया जाता है। इसके बाद लोग घरों में दीये जलाते हैं।

ऐसे पड़ी दीपावली के दिन दशहरा मनाए जाने की परंपरा
रामलीला कमेटी के आजीवन ने बताया कि सौ वर्ष पहले जब रामलीला महोत्सव की शुरूआत हुयी थी, तब उस समय रामलीला स्थान पर बरसात का पानी भरा रहता था। पानी सूखने में दशहरा पर्व निकल जाता था। राठ कस्बे में दशहरे का रावण पुतला फूंकने के लिये कोई जगह नहीं है। जो जगह है उसका पानी सूखने में दस दिन लग जाते है। इसीलिये राठ नगर में दीपावली के दिन रावण का पुतला फूंकने कर दशहरा त्यौहार मनाने की परम्परा पड़ गयी है जो अभी तक कायम भी है।
रामलीला मैदान में खड़ा है रावण के लोहे का फ्रेम
रामलीला कमेटी के सदस्य ने बताया कि कई दशक पहले रावण का पुतला तैयार कर रामलीला मैदान में खड़ा किया जाता था मगर अब कई सालों से रावण के लिये कमेटी ने लोहे का फ्रेम तैयार कराया था जो साल भर तक ऐसे ही खड़ा रहता है। इसकी ऊंचाई करीब तीस फिट है। इसी फ्रेम में मैटेरियल लगाकर रावण का रूप दिया जाता है। आतिशबाजी के पटाखे भी इसमें भरे जाते है। दीपावली के दिन राम रावण युद्ध के बाद इस पुतले को आग के हवाले किया जाता है।

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