जलवायु परिवर्तन से भी सुरक्षित होगी असम में तैयार हो रही विशेष चाय।

गुवाहाटी में ब्रिटिश उप उच्चायुक्त ने जलवायु परिवर्तन और चाय पर इसका प्रभाव विषय पर सत्र आयोजन कराया था।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) :   एक खास तरह की चाय असम में विकसित की जा रही है। इस चाय पर जलवायु परिवर्तन का भी असर नहीं होगा। इसे चाय का ‘क्लोन’ कहा जा रहा है। गुवाहाटी में ब्रिटिश उप उच्चायुक्त ने जलवायु परिवर्तन और चाय पर इसका प्रभाव विषय पर सत्र आयोजन कराया था। इसी कार्यक्रम में चाय बोर्ड के अध्यक्ष पी के बेजबरुआ ने कहा कि ऊपरी असम में तापमान की बढ़ोतरी होती जा रही है और साथ ही बरसात भी कम हो रही है। इसी वजह से ‘टी रिसर्च एसोसिएशन’ (टीआरए) इन स्थितियों को झेलने वाली चाय किस्म के क्लोनों को विकसित कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि कोई भी क्लोन जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को पूरी तरह से झेल नहीं सकता है। फिर भी हम इसके प्रभावों को कम से कम करना सुनिश्चित करने में लगे हैं। उन्होंने बताया कि इस परेशानी की सबसे बड़ी वजह अनियमित मौसम है। खासतौर से मानसून में कम बारिश होना। बड़े पैमाने पर जंगल काटे जाने की वजह से यह समस्या पैदा हो रही है। इसी कारण से ब्रह्मपुत्र नदी के जलग्रहण वाले क्षेत्र असुरक्षित हो गए हैं।  बेजबरुआ ने वनों को काटकर चाय की खेती के तहत लाए जा रहे रकबों के बारे में चिंता जताई, जिसके कारण इस क्षेत्र में चाय उद्योग के लिए समस्याएं पैदा हो गई हैं।

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