गुजरात ‘बम ब्लास्ट’ में बुलंदशहर का मोहम्मद शकील है मुख्य आरोपी ,जानिए पूरा मामला।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ):बता दें कि साल 2008 में बम ब्लास्ट में शकील का नाम सामने आने पर हर कोई हैरान था।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ):बता दें कि साल 2008 में बम ब्लास्ट में शकील का नाम सामने आने पर हर कोई हैरान था। उसने गांव में कभी ये जाहिर नहीं होने दिया कि वो देश विरोधी गतिविधियों में शामिल है। वो अपने अंदर किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने का मंसूबे बनाए हुए है।गांव के ही एक व्यक्ति ने बताया कि केस में नाम सामने आने के बाद परिवार के सदस्य किसी से बात नहीं करते थे। बाद में सभी ने गांव से पलायन कर दिया। अपना घरेलू सामान भी साथ ले गए। अब उनकी कोई जानकारी नहीं है। पता नहीं वो लोग कहां है।शकील की करतूतों से परिवार पर क्या गुजरी, इस पर गांव के लोग आज भी चर्चा करते हैं। गांव वालों का कहना है कि ये, तो साफ नहीं है कि, उसके परिवार को गैंग में शामिल होने की जानकारी थी या नहीं? लेकिन इस मामले के सामने आने के बाद परिवार ने जो दर्द झेला, उस यातना को वही जान सकते हैं। उन लोगों का खंडहर घर उनका दर्द बता रहा है। ये वही घर है जहां पर कभी पूरा परिवार खुशी-खुशी रहता था, लेकिन बेटे की करतूत ने उन्हें उनके ही घर में पराया कर दिया।शकील के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने उससे पूछताछ की। पुलिस ने उसके गांव के जंगलों में छानबीन की, तो सभी के होश उड़ गए। गांव के ही जंगलों में बड़ी मात्रा में धमाकों में काम आने वाली बारूद सामग्री बरामद हुई। करीब 20 से अधिक हैंड ग्रेनेड, आरडीएक्स, आधुनिक हथियार, कारतूस और बम बनाने का सामान बरामद हुआ। पुलिस टीमों ने करीब दो दिन तक पूरे जंगल मे सघन चेकिंग अभियान चलाया था।

साल 2008 में अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट होने के बाद देश ही नहीं दुनिया दहल गई थी। देश की इंटेलिजेंस एजंसियों ने 77 लोगों को आरोपी बनाया था। साक्ष्य के अभाव में विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को बरी कर दिया था। जबकि 49 लोग दोषी करार दिए गए। अदालत का ये निर्णय बुलंदशहर में चर्चा का विषय बना गया था, क्योंकि औरंगाबाद के गांव लोहारका निवासी मोहम्मद शकील का नाम इसमें सामने आया था।शकील को दोषी करार देने के बाद भास्कर की टीम ने उसके गांव का दौरा किया। शकील का घर अब खंडहर हो चुका है। घर का दरवाजा खुला रहता है। मकान से सीमेंट की पपड़ी बनकर झड़ रही है, जो बची है वो टूटकर गिर रही है। इस पूरे मामले में गांव वाले सामने आने से भी बच रहे हैं। घर के आसपास भी सन्नाटा पसरा हुआ है। नाम न छापने की शर्त पर गांव निवासी बुजुर्ग ने बताया कि साल 2008 में बम ब्लास्ट सामने आने के बाद घर में शकील की चर्चा होने लगी।

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