राजस्थान के भरतपुर में बाबा विजय दास के आत्मदाह के बाद सरकार की सुस्ती से राजनीति गर्म, साधु को न्याय दिलाने की हो रही मांगों से अब प्रदेश सरकार दबाव में ।

आदिबद्री और कनकांचल में खनन को पूरी तरह बैन करने के लिए 2004 में आंदोलन शुरू हुआ था। आंदोलन बरसाना के मान मंदिर के संत रमेश बाबा के नेतृत्व में हुआ।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): भरतपुर के डीग-कामां व नगर क्षेत्र में आदि बद्री और कनकाचल क्षेत्र जिसे भगवान श्री कृष्ण की लीला स्थली होने के कारण अत्यंत पवित्र माना जाता है यहां हो रही वैध और अवैध माइनिंग के खिलाफ संत समाज 551 दिन से लगातार प्रदर्शन कर रहा था।
जब यह माइनिंग नहीं रुकी और संत समाज की मांगे पूरी नहीं हुई तब 20 जुलाई को डीग स्थित पसोपा के पशुपतिनाथ मंदिर के 65 साल के महंत विजय दास ने खुद को आग लगा ली। इस घटनाक्रम में विजय दास 85% झुलस गए। उन्हें सफदरगंज अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान 23 जुलाई को लगभग 3:00 बजे सुबह उनकी मृत्यु हो गई ।

क्या है मामला
भरतपुर के डीग-कामां व नगर इलाके में स्थित पहाड़ियों की श्रृंखलाएं ब्रज के चौरासी कोस में आती हैं। धार्मिक इतिहास की कथाओं में बताया जाता है कि भगवान कृष्ण यहां लीलाएं करते थे इसलिए पूरा संत समाज इन पहाड़ियों को अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल मानता है। इसलिए संत समाज यहां खनन रोकने की मांग के लिए लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे थे।
आंदोलन से जुड़े बाबा हरिबोल दास ने 4 जुलाई 2022 को खनन नहीं रुकने पर सीएम हाउस के सामने आत्मदाह की चेतावनी दी थी और उस समय हरिबोल के साथ 14 साधु-संत आत्मदाह के लिए तैयार हो गए। जिसमें बाबा विजय दास भी शामिल थे।
आदिबद्री और कनकांचल में खनन को पूरी तरह बैन करने के लिए 2004 में आंदोलन शुरू हुआ था। आंदोलन बरसाना के मान मंदिर के संत रमेश बाबा के नेतृत्व में हुआ। साल 2007 में भरतपुर के बोलखेड़ा में संतों ने पहला बड़ा आंदोलन किया। इस आंदोलन की अगुवाई बाबा हरिबोल दास ने की। हरिबोल दास वही संत हैं, जिन्होंने 4 जुलाई 2022 को सीएम हाउस के सामने आत्मदाह की चेतावनी दी थी।
2007 में राजस्थान में तत्कालीन सरकार ने आदिबद्री और कनकांचल के पहाड़ों में 5232 हेक्टेयर इलाके में खनन रोकने और वन क्षेत्र घोषित करने की मांग मानने का आश्वासन दिया। साल 2009 में गहलोत सरकार ने दोनों मांगों का नोटिफिकेशन जारी किया। आदिबद्री और कनकांचल पहाड़ों के 75 प्रतिशत क्षेत्र में खनन को रोक दिया गया। 25 फीसदी हिस्से में खनन जारी रहा। संत समाज इस 25 फीसदी इलाके में भी खनन को बैन कराना चाहता था। यह इलाका भरतपुर के पहाड़ी और नगर तहसील में था।

महंत बाबा विजय दास
1957 में ब्राह्मण परिवार में जन्मे बाबा विजय दास हरियाणा के फरीदाबाद जिले के बड़ाला गांव के रहने वाले थे। उनका जन्म का नाम मधुसूदन शर्मा था। 2009 में एक सड़क हादसे में अपने बहू और बेटे के मृत्यु से विचलित हो गए थे। 2010 में मधुसूदन अपनी 3 वर्ष की पोती दुर्गा को लेकर उत्तर प्रदेश में बरसाना के मान मंदिर आ गए। यहां संत रमेश बाबा के संपर्क में आकर वह मधुसूदन से विजय दास हो गए। उन्होंने अपना जीवन धर्म-कर्म में झोंक दिया और अपनी पोती को गुरूकुल में पढ़ने के लिए डाल दिया। उनकी पोती दुर्गा अब 16 साल की है और मान मंदिर के आश्रम के स्कूल में पढ़ाती है।
ताजा घटनाक्रम
20 जुलाई को हुई घटना की जांच के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कमेटी गठित की है। जांच कमेटी का नेतृत्व यूडीएच विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेट्री कुंजी लाल मीणा कर रहे हैं। भरतपुर में ब्रज इलाके की पहाड़ियों से खनन कार्य बंद करने की मांग पर साधु विजय दास ने 20 जुलाई को आग के हवाले कर लिया था। 23 जुलाई को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में निधन होने के बाद राजस्थान की राजनीति में उबाल आया हुआ है।
इस समय साधु के द्वारा आत्मदाह और उसके बाद हुई मृत्यु पर सरकार का सुस्त रवैया पूरे देश की जनता को नागवार गुजर रहा है । लगातार मामले परलोग आवाज उठा रहे हैं और त्वरित कार्यवाही की मांग हो रही है ‘

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