गृह मंत्रालय में जम्मू-कश्मीर में हुई टारगेट किलिंग के बाद हो रही हैं हाई लेवल मीटिंग्स ।

सूत्रों के मुताबिक पहले दौर की बैठक खत्म हो गई है। 3 बजे से दूसरे दौर की बैठक भी शुरु हो गई है, जिसके बाद मंत्रालय की ओर से बयान जारी किया जा सकता है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): जम्मू-कश्मीर में हुई टारगेट किलिंग के बाद गृह मंत्रालय एक्शन पर है। मामले को लेकर हाई लेवल मीटिंग हुई है। गृह मंत्री अमित शाह के अलावा जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, NSA अजीत डोवाल, रॉ चीफ, आर्मी चीफ, जम्मू-कश्मीर के DGP दिलबाग सिंह, केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, CRPF के महानिदेशक कुलदीप सिंह और SSB के प्रमुख शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक पहले दौर की बैठक खत्म हो गई है। 3 बजे से दूसरे दौर की बैठक भी शुरु हो गई है, जिसके बाद मंत्रालय की ओर से बयान जारी किया जा सकता है।
इससे पहले, घाटी में लगातार हो रही हिंदुओं की हत्या के बाद कश्मीरी पंडितों ने पलायन करने की चेतावनी दी है। कुलगाम और अनंतनाग में हालात और खराब होते जा रहे हैं। गुरुवार को यहां आतंकियों ने दो हमले किए।
अनंतनाग के मट्टन में गुरुवार को आतंकी हमलों से डरे पंडित अपना सामान लेकर जम्मू के बनिहाल जाने की कोशिश में जुट गए हैं। जम्मू-कश्मीर में PM पैकेज के तहत नौकरी पाने वाले कर्मचारी अमित कौल ने बताया कि हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। आज 4 लोगों की हत्या हुई है, इसके चलते 30-40 परिवार शहर छोड़कर जा चुके हैं। सरकार हमारी मांग पूरी नहीं कर रही है, श्रीनगर में कोई भी सुरक्षित जगह नहीं है।
सरकारी आश्वासनों और जिला मुख्यालयों पर सुरक्षित पोस्टिंग के वादे के बावजूद गुरुवार को लगातार दूसरे दिन कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने श्रीनगर से जम्मू की ओर पलायन किया। अब अन्य हिंदू कर्मचारी भी जम्मू की ओर रुख कर रहे हैं। सैकड़ों परिवार कश्मीर छोड़ चुके हैं, वहीं सैकड़ों छोड़ने वाले हैं। कई लोग रात के अंधेरे में पलायन कर रहे हैं।
गांदरबल, श्रीनगर और दक्षिण कश्मीर के ट्रांजिट कैंपों में रहने वाले हिंदुओं ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें गेट के बाहर नहीं जाने दे रही। श्रीनगर के देहाती इलाके से गाड़ी पकड़ने शहर पहुंचे एक कर्मचारी ने बताया, ‘सरकार ने हमें जिला मुख्यालयों पर पोस्टिंग दी है, लेकिन यह काफी नहीं है। दूध-किराना के लिए बाजार जाना होता है। बच्चे स्कूल कैसे जाएंगे? पुलिस हर जगह तो सुरक्षा नहीं दे सकती। इसलिए यही विकल्प है कि किसी तरह जम्मू पहुंच जाएं। बाकी बातें बाद में सोचेंगे।’
फिलहाल मामले को लेकर प्रतीत होता है कि सरकार कड़ी कार्रवाई कर सकती है।

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