पीएम मोदी क्वाड की शिखर बैठक में हिस्सा लेने जाएंगे जापान ।

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन ने इस बैठक को हिंद प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थायित्व को मजबूत करने के लिए बुलाई गई सबसे महत्वपूर्ण बैठक करार दिया है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): विश्व में भारत का स्थान अत्यंत मजबूत है और दुनिया के चार शक्तिशाली राष्ट्रों के क्वाड समूह में भारत भी है। क्वाड संगठन को लेकर इसके चारों सदस्य देशों भारत, अमेरिका, जापान व आस्ट्रेलिया की प्रतिबद्धता बहुत तेजी से बढ़ रही है। अगले हफ्ते (24 मई) क्वाड की तीसरी शिखर बैठक टोक्यो में होने जा रही है। पीएम नरेन्द्र मोदी इसमें हिस्सा लेने के लिए 24 मई को ही टोक्यो पहुंचेंगे जहां वो क्वाड में शिरकत करने के अलावा अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और जापान के पीएम फूमियो किशिदा के साथ अलग अलग द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे।
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन ने इस बैठक को हिंद प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थायित्व को मजबूत करने के लिए बुलाई गई सबसे महत्वपूर्ण बैठक करार दिया है। आगामी क्वाड बैठक की एक खासियत यह होगी कि इसमें इंडो पैसिफिक इकोनोमिक फ्रेमवर्क (IPEF) की घोषणा होगी।
यह फ्रेमवर्क हिंद प्रशांत क्षेत्र को 21वीं सदी के लिए सबसे बड़े आर्थिक गठबंधन के तौर पर देखा जा रहा है। यह कोरोना महामारी और यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों का समाधान निकालने के साथ ही डिजिटल इकोनोमी के लिए नए नियम बनाने, सशक्त सप्लाई चेन को स्थापित करने, ऊर्जा उपभोग के मौजूदा तंत्र को बदलने और ढांचागत सुविधाओं को स्थापित करने का काम करेगा। यह फ्रेमवर्क पूरे हिंद प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में भारत के महत्व को बढ़ाएगा। माना जा रहा है कि इससे वैश्विक सप्लाई चेन में चीन के विकल्प के तौर पर भारत के स्थापित होने की संभावना मजबूत होगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि भारत को इस फ्रेमवर्क की भावी रणनीति के बारे में एक प्रस्ताव मिला है जिस पर विचार किया जा रहा है। बागची ने बताया कि 24 मई, 2022 को पीएम मोदी की जापान के प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय मुलाकात के अलावा टोक्यो में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की भी योजना है। इसके अलावा वो वहां जापान के कारोबारी समुदाय के साथ भी बैठक करेंगे।
क्वाड के बारे में भारत की सोच को लेकर उन्होंने कहा कि, भारत इस संगठन को बहुत ही ज्यादा महत्व देता है। इस बैठक में क्वाड के उद्देश्यों के बारे में बात होगी और समसामयिक विषयों के बारे में भी बात होगी। अगर सदस्य कोई दूसरा मुद्दा उठाना चाहते हैं तो उस पर भी बात होगी।
यूक्रेन पर रूस के हमले के कुछ ही दिनों बाद मार्च महीने में वर्चुअल तौर पर क्वाड देशों की एक बैठक हुई थी। इसमें वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों और हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सहअस्तित्व को लेकर भी चर्चा हुई थी। इसके पहले सितंबर, 2021 में जब चारों देशों के शीर्ष नेताओं की वाशिंगटन में बैठक हुई थी जब उसमें तकनीकी विकास, डिजाइन, गवर्नेंस व इसके इस्तेमाल का एजेंडा जारी किया गया था। तब यह भी बताया गया था क्वाड सदस्य 5जी तकनीकी से लेकर सभी अत्याधुनिक तकनीक बाजार में चीन के दबदबे को खत्म करेंगे।
आगामी क्वाड बैठक में जारी किये जाने वाले हिंद प्रशांत आर्थिक फ्रेमवर्क के बारे में अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा है कि हम एक मजबूत संदेश देना चाहते हैं और हमें उम्मीद है कि चीन भी इस संदेश को सुनेगा। क्वाड देश अपने आर्थिक सहयोग के बारे में पहले ही कह चुके हैं कि वो किसी दूसरे देश की सार्वभौमिकता के लिए खतरा पैदा नहीं करेंगे। फिलहाल यह शिखर वार्ता भारत के साथ ही दुनिया के लिए भी मअहत्वपूर्ण रहने वाली है।

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