फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रमुख उम्मीदवारों मैक्रों और मरिन के बीच चल रहा मुकाबला ।

फ्रांस की आबादी करीब 6 करोड़ 70 लाख है। फ्रांस दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): फ्रांस में नए राष्ट्रपति के चुनाव जारी हैं। ये दो चरणों में होता है। पहला चरण 10 अप्रैल को हुआ था। दूसरे और आखिरी चरण की वोटिंग चल रही है। इसके बाद 25 अप्रैल यानी कल नतीजों की घोषणा हो सकती है। रिजल्ट आने के बाद 13 मई से पहले नए राष्ट्रपति को शपथ दिलाई जाएगी।
अभी इमैनुएल मैक्रों फ्रांस के राष्ट्रपति हैं। वो इस बार भी मैदान में हैं। वैसे तो कुल 11 उम्मीदवार हैं, लेकिन सही मायनों में मुकाबला मैक्रों और नेशनल रैली पार्टी की नेता मरिन ले पेन के बीच है। पहले चरण में मैक्रों 27.85% वोट के साथ सबसे आगे रहे। पेन 23.15% वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहीं।
भारत की तरह ही फ्रांस में भी 18 साल या उससे ज्यादा की उम्र वाले नागरिक वोट डालते हैं। हालांकि यहां वोटिंग के लिए EVM मशीन नहीं, बल्कि बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है। दिलचस्प बात ये है कि फ्रांस में वोटिंग हमेशा रविवार को ही होती है, जिससे ज्यादा से ज्यादा नागरिक वोट डाल सकें।
दूसरे देशों में रह रहे फ्रेंच सिटीजन भी वोट डाल सकते हैं। 10 अप्रैल को हुए पहले चरण के चुनाव में केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में रह रहे 4,564 फ्रांसीसी नागरिकों ने भी मतदान किया था।
फ्रांस की आबादी करीब 6 करोड़ 70 लाख है। फ्रांस दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। टूरिज्म के लिहाज से फ्रांस दुनिया में अव्वल नंबर पर है। फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 5 परमानेंट मेंबर्स में से एक है। दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी न्यूक्लियर पावर है। फ्रांस यूरोपियन यूनियन (EU) के फाउंडर मेंबर्स में से एक है और इसके फैसलों में अहम भूमिका निभाता है।
फ्रांस के साथ भारत के बहुत अच्छे रिश्ते हैं। फ्रांस की अब तक की कोई सरकार कभी भारत विरोधी नहीं रही। मैक्रों आएं या पेन, दोनों ही अपनी रैलियों में साफ कर चुके हैं कि भारत उनके एजेंडे में फर्स्ट प्रायोरिटी के तौर पर है। फ्रांस ने हमेशा UN में भारत की परमानेंट मेंबरशिप का सपोर्ट किया है।
डिफेंस के लिहाज से भी फ्रांस भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। 2016 में दोनों देशों के बीच 36 राफेल लड़ाकू विमानों की डील हुई थी। ये इंडियन एयर फोर्स के लिए बड़ी उपलब्धि रही। ट्रेड सेक्टर में भी दोनों के बीच मजबूत संबंध हैं। चीन के साथ LAC विवाद के दौरान भी फ्रांस ने भारत का खुला समर्थन किया था।
वैसे तो फ्रांस धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) देश है, लेकिन इसकी परिभाषा बहुत अलग है। हमारे यहां तो सेक्युलरिज्म का मतलब सभी धर्मों को बराबर सम्मान और छूट देना है। फ्रांस में ऐसा नहीं है। वहां पब्लिक डिबेट में मजहब पर बात करने पर रोक है। इसी वजह से फ्रांस का सेक्युलरिज्म अक्सरइस्लाम को नाराज करता है। फ्रांस में करीब 5.7 मिलियन फ्रांसीसी मुस्लिम हैं, जो पश्चिम यूरोप में सबसे ज्यादा है।
फ्रांस में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मरिन ने वादा किया है कि अगर वो चुनाव जीतेंगी तो देश में हिजाब पहनने पर जुर्माना लगाया जाएगा। मरिन को कट्टर राष्ट्रवादी माना जाता है और वो कई बार हिजाब पर बैन और जुर्माने की मांग संसद में भी कर चुकी हैं।
इस बार राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और दक्षिणपंथी उम्मीदवार मरिन ले पेन के बीच कड़ा मुकाबला है। भारत समर्थक ले पेन ने वादा किया है कि अगर वो सरकार में आईं, तो हिजाब पहनने पर बैन लगाएंगी। वहीं, ला रिपब्लिक एन मार्च (रिपब्लिक ऑन द मूव) पार्टी के नेता इमैनुएल मैक्रों का चुनावी एजेंडा अर्थव्यवस्था और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित है। मैक्रों फ्रांस को सबसे बड़ी एटमी ताकत बनाने की बात भी कह चुके हैं। हां, ये बात और है कि उनके ही देश में इसका विरोध भी हुआ है।
फ्रांस के चुनाव में इस्लामिक कट्टरपंथ और हिजाब बेहद अहम मुद्दा है। मैक्रों का रुख कुछ नरम है तो ली पेन सीधे हिजाब बैन की मांग करती हैं। फिलहाल फ्रांस में कौन राष्ट्रपति बनकर आएगा इसका इंतजार पूरी दुनिया को है।

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