अमेरिका की कानून प्रोफेसर एमी वैक्स द्वारा भारतवंशियों पर जहर उगलने वाली टिप्पणी के बाद सांसद कृष्णमूर्ति ने की बयान की निंदा ।

एक साक्षात्कार में प्रोफेसर एमी वैक्स ने आरोप लगाया कि पश्चिमी देशों के लोगों की शानदार उपलब्धियों और योगदान को लेकर अश्वेतों व गैर-पश्चिमी समूहों में जबरदस्त आक्रोश और शर्मिंदगी का भाव है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): अमेरिका में भारतवंशियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी पर कड़ा विरोध वहाँ के भारतवंशी सांसद ने जताया है। भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति समेत भारतीय मूल के प्रमुखों ने एशियाई-अमेरिकी समुदाय को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करने वाली पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय की कानून प्रोफेसर एमी वैक्स की निंदा की है। प्रोफेसर ने एशियाई-अमेरिकी समुदाय के लिए भारतवंशियों के संदर्भ में जहर बुझी भाषा का इस्तेमाल किया था।
एक साक्षात्कार में प्रोफेसर एमी वैक्स ने आरोप लगाया कि पश्चिमी देशों के लोगों की शानदार उपलब्धियों और योगदान को लेकर अश्वेतों व गैर-पश्चिमी समूहों में जबरदस्त आक्रोश और शर्मिंदगी का भाव है। वैक्स ने कहा, उन्हें सिखाया जाता है कि वे बेहतर हैं क्योंकि वे ब्राह्मण कुल से आते हैं। उन्होंने अभद्र शब्दों के साथ कहा, लेकिन किसी स्तर पर उनका देश निचले स्तर का ही है। वैक्स ने भारतवंशी डॉक्टर समुदाय को भी निशाना बनाया।
इस टिप्पणी की पूरे अमेरिका में भारतवंशियों ने निंदा की है। कृष्णमूर्ति ने कहा, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पद छोड़ने के बाद मुझे लगा कि दूसरों के नीचा दिखाने वाले शब्द कहने के दिन खत्म हो गए, लेकिन एक प्रोफेसर के ऐसे शब्द बेहद अपमानजनक हैं। कानून के प्रोफेसर नील मखीजा ने भी इन टिप्पणियों पर वैक्स की खिंचाई की।
एमी वैक्स ने यह भी कहा कि पश्चिमी लोगों ने एशियाई अमेरिकियों को हर तरह से पछाड़ दिया है। मैंने महसूस किया है कि हमने उन्हें हर तरह से पछाड़ दिया है, उन्हें गुस्सा आता है। वे ईर्ष्या करते हैं, उन्हें शर्मिंदगी होती है। इस पर राजा कृष्णमूर्ति ने कहा, ऐसी टिप्पणियां नफरत व भय पैदा करती हैं, और अल्पसंख्यक समुदायों को वास्तविक नुकसान पहुंचाती हैं। राजा ने कहा, यह सब गैर-जिम्मेदाराना है।
वैक्स की भड़काऊ टिप्पणियां करने का लंबा इतिहास रहा है। अमेरिकी मीडिया ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब वैक्स की विवादित नस्ली टिप्पणी वायरल हुई है। दिसंबर में एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि भारतीय-अमेरिकियों को अमेरिका में रहने के लिए अधिक ‘आभारी’ होना चाहिए और देश ‘कम एशियाई लोगों के साथ बेहतर’ होगा। फिलहाल एसियाई लोगों के प्रति नस्लभेद की समस्या से अमेरिका अभी भी जूझता दिख रहा है।

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