कम घातक माना जा रहा ओमीक्रॉन भी जाने कब और किसको हो सकता है जानलेवा, बरतें सतर्कता ।

जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है वो और लोगों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकते हैं।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): पूरी दुनिया सहित भारत में भी ओमीक्रॉन तेजी से फैल रहा है। ओमिक्रान वायरस को डेल्टा वायरस से कम घातक माना जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो लोगों को इस वायरस के प्रति भी बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। लापरवाही बरतने पर ओमिक्रान वायरस से भी जान जाने का खतरा है। भारत सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 149 देशों में कुल मिलाकर लगभग 5.52 लाख ओमिक्रान वायरस के संक्रमण के मामले सामने आए हैं और 115 मौतें हुई हैं। भारत में पिछले 24 घंटों में 2,64,202 नए मामले सामने आए। भारत में अब तक कुल सक्रिय मरीजों की संख्या 12,72,073 हो चुकी है। इनमें अब तक 5,753 ओमिक्रान के मामले सामने आ चुके हैं।
आईर्आइटी कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने इसके घातक होने को लेकर चेतावनी जारी की है। प्रो.मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि जिन लोगों ने अभी तक वैक्सीन नहीं लगवाई है, या मास्क पहनना बंद कर दिया है या फिर कोविड प्रोटोकॉल के किसी भी नियम को नहीं मान रहे है उनको ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। साथ ही जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर है और जिनकी नेचुरल इम्यूनिटी नहीं बन पा रही है उनको कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से बहुत ज्यादा खतरा हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) प्रमुख टेड्रोस अढानम घेब्रेयेसस का कहना है कि इसको कम लक्षण वाली श्रेणी में नहीं कहा जा सकता है। उन्‍होंने साफतौर पर कहा कि ओमिक्रोन से संक्रमित लोग अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं और इसकी वजह से मौत भी हो रही हैं, जैसे पहले भी हुई हैं। उन्होंने कहा कि अब तक वैश्विक आबादी के केवल 50 फीसदी लोगों को ही कोविड का टीका लगाया जा सका है, वहीं 9 प्रतिशत लोगों को सिर्फ एक डोज लगी है, जबकि 41 प्रतिशत लोग अब भी वायरस के लिए संवेदनशील हैं। जहां तक इसकी सुनामी की बात है तो ये काफी जल्‍द और काफी बड़ी है। इसके लिए हमें अपने स्‍वास्‍थ्‍य सेवा को जल्‍द से जल्‍द पूरी दुनिया में बेहतर करना होगा। अस्‍पताल पहले से ही मरीजों से भरे हुए हैं।
जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है वो और लोगों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। ऐसे लोगों के शरीर में वायरस काफी समय तक रहता है। ऐसे में वायरस के रूप में बदलाव होता है। अगला बदला हुआ वायरस कितना घातक होगा ये फिलहाल कहना मुश्किल है। ऐसे में जिन लोगों को संक्रमण हा या जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो उन्हें आइसोलेशन में ही रहना चाहिए।
रिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया है कि कोरोना वायरस लिवर में मौजूद महत्वपूर्ण एंजाइम्स की मात्रा बढ़ा देता है। इन एंजाइम्स का नाम एलेनिन एमिनोट्रांस्फरेज (ALT) और एस्परटेट एमिनोट्रांस्फरेज (AST) है। रिसर्च के मुताबिक कोरोना के 15 से 53 फीसदी मरीजों में इन लिवर एंजाइम्स को अधिक मात्रा में पाया गया। वायरस का कोई भी वैरिएंट, चाहे वो डेल्टा हो या ओमिक्रॉन, लिवर के मुख्य सेल्स (कोशिकाओं) पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
लेडी हार्डिंग की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी समीक्षा जैन का कहना है कि ओमिक्रॉन भी एक वायरस है। इससे सावधान रहने की जरूरत है। इसका इन्फेक्शन बढ़ने पर मौत भी हो रही है। हालांकि जिन लोगों को वैक्सीन लगी है बिना अस्पताल जाए जल्दी ठीक हो जा रहे हैं। पर जिन्हें वैक्सीन नहीं लगी है उन्हें इंफेक्शन होने पर अस्पताल में भर्ती करना पर रहा है। कुछ को तो आईसीयू की भी जरुरत पड़ रही हैं। अमेरिका सहित कई देशों में ऐसा देखा गया है कि कुछ मामलों में मरीज में मल्टी ऑर्गन फेलियोर की स्थिति हो जाती है। नाक या शरीर के अंदर से खून आने के कुछ मामले भी दर्ज किए गए है। ऐसे लोग जीने सांस की दिक्कत है या जिनके फेफड़ो में इन्फेक्शन है उन्हें ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। किडनी, लिवर, बीपी, सुगर और मोटापे के मरीजों को भी सावधान रहना चाहिए।
यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी बताती है कि वायरस का इंफेक्शन अपना असर छोड़ जाता है, फिर भले ही मरीजों में इसके लक्षण ना दिखते हों स्टडी के मुताबिक हल्का संक्रमण भी शरीर के अंगों को डैमेज कर सकता है। स्टडी के लिए 45 से 74 साल की उम्र के कुल 443 लोगों की बड़े पैमाने पर जांच की गई। स्टडी में शामिल किए गए संक्रमितों में हल्के या किसी तरह के लक्षण नहीं थे और स्टडी का रिजल्ट बताता है कि संक्रमितों के अंदर संक्रमित ना होने वाले लोगों के मुकाबले मीडियम टर्म ऑर्गेन डैमेज देखा गया।
यूरोपियन हार्ट जर्नल में छपी इस स्टडी के मुताबिक लंग फंक्शन टेस्ट में फेफड़े का वॉल्यूम तीन प्रतिशत घटा पाया गया और एयर-वे से जुड़ी दिक्कतें भी देखी गईं। हल्के लक्षण और कम लक्षण वाले संक्रमितों पर हुई स्टडी में संक्रमण के दिल पर पड़ने वाले असर को भी देखा गया। हार्ट की पम्पिंग पावर में औसतन 1 से 2 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई जबकि खून में प्रोटीन का स्तर 41 प्रतिशत तक बढ़ पाया गया, जो कि हार्ट पर पड़ने वाले तनाव के बारे में बताता है।
रिसर्च में वैज्ञानिकों को फिक्र बढ़ाने वाली एक और बात पता चली है और वो है पैरों की नसों में खून के थक्के ज्यादा बनना। स्टडी के नतीजों के मुताबिक हल्के या कम लक्षण वाले लोगों में दो से तीन गुना ज्यादा बार लेग वीन थ्रोम्बोसिस यानी पैरों की नसों में खून के थक्के बनते देखे गए हैं. पैर की नसों में खून का थक्का जमने से हुआ ब्लाकेज बेहद खतरनाक हो सकता है क्योंकि कई बार यह थक्का टूट कर फेफड़े की नली में रुकावट पैदा कर देता है जो मरीज के लिए जानलेवा हो जाता है।
पहले लक्षणों में स्क्रैची थ्रोट है। इसमें गला अंदर से छिल जाता है। वहीं डेल्टा वैरिएंट में गले में खराश की प्रॉब्लम होने लगती है। डिसकवरी हेल्थ, साउथ अफ्रीका के चीफ एग्जीक्यूटिव रयान रोच ने बताया कि नाक बंद होना, सूखी खांसी और पीठ में नीचे की तरफ दर्द की समस्या ओमिक्रोन पीड़ित को हो रही है।
आपकी आवाज फटी-फटी या गला बैठा हुआ भी महसूस हो सकता है।
दोनों वैक्सीन लगवा चुके लोगों में कफ एक प्रमुख लक्षण के तौर पर उभरकर सामने आया है। वहीं नाक का बहना भी एक प्रमुख संकेत है।
कई लोगों में इसकी वजह से थकान की दिक्कत हो रही है।
मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द भी इसके लक्षणों में से एक है। जिन लोगों को ओमिक्रोन हुआ उनमें से पचास फीसद लोगों में यह लक्षण देखा गया।
बहती नाक, बंद नाक, सिर दर्द, थकान, छींक आना, रात में पसीना और शरीर में दर्द होना जैसे ओमिक्रोन के अन्य शुरुआती लक्षण हैं।
वाशिंगटन के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड एविल्यूशन के निदेशक डॉक्टर क्रिस्टोफर के मुताबिक भारत में कोरोना की इस लहर का पीक फरवरी में आ सकता है। पीक आने पर एक दिन में 5 लाख केस आ सकते हैं। हालांकि डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन कम घातक है।
प्रधानमंत्री ने भी देश के लोगों को ओमिक्रोन वायरस से सावधान रहने के लिए कहा है। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि ऑमिक्रोन को लेकर पहले जो संशय की स्थिति थी, वो अब धीरे-धीरे साफ हो रही है। पहले जो वैरिएंट थे, उनकी अपेक्षा में कई गुना अधिक तेज़ी से ऑमिक्रोन वैरिएंट आम लोगों को संक्रमित कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमें सतर्क रहना है, सावधान रहना है लेकिन Panic की स्थिति ना आए, इसका भी ध्यान रखना है। हमें ये देखना होगा कि त्योहारों के इस मौसम में लोगों की और प्रशासन की एलर्टनेस कहीं से भी कम नहीं पड़े। उन्होंने कहा कि हम 130 करोड़ भारत के लोग, अपने प्रयासों से कोरोना से जीतकर अवश्य निकलेंगे।
कंफर्म ओमिक्रोन केस में वो लोग भी शामिल हैं जिन्हें दो-दो बार कोरोना हो चुका है, इसलिए पहले कोरोना से ग्रसित हो चुके लोगों को भी ओमीक्रॉन होने की पूरी संभावनाएं हैं।

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