तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति सालेह ने अपनी बेटी-पत्नी के जलाए थे फोटो ।

सालेह ने एक लेख के जरिए कई बातों का खुलासा किया है। इसमें उन्होंने अमेरिका के अचानक अफगानिस्तान से चले जाने वाले निर्णय की भी निंदा की है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): पूरा अफगानिस्तान अब तालिबान के कब्जे में है। उसका दावा है कि पंजशीर पर भी उसने कब्जा कर लिया है, लेकिन नॉर्दन एलायंस ने उसके दावे को खारिज किया है। पंजशीर की लड़ाई के बीच तालिबान जल्द ही अफगानिस्तान में अपनी सरकार के गठन का एलान कर सकता है। अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह पंजशीर में तालिबान से लोहा ले रहे हैं। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह तालिबान के सामने सरेंडर नहीं करेंगे।
सालेह ने एक लेख के जरिए कई बातों का खुलासा किया है। इसमें उन्होंने अमेरिका के अचानक अफगानिस्तान से चले जाने वाले निर्णय की भी निंदा की है। साथ ही पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि अफगानिस्तान की इस हालात के पीछे उसका ही हाथ है।
एक अखबार में छपे लेख में सालेह ने अफगानिस्तान के हालात के बारे में लिखा है। अमरुल्लाह सालेह ने बताया कि काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद उन्होंने अपनी पत्नी और बेटी की तस्वीरों को नष्ट कर दिया था। कंप्यूटर और जरूरी सामान को भी नष्ट कर दिया। उन्होंने लिखा कि मैंने अपने सुरक्षा गार्ड को भी कह रखा है कि अगर मैं घायल हो गया तो वो मेरे सिर में गोली मार दे। सालेह पहले ही कह चुके हैं कि वह कभी तालिबान के सामने सरेंडर नहीं करेंगे।
पूर्व उपराष्ट्रपति ने लिखा कि तालिबान को पाकिस्तानी दूतावास की तरफ से निर्देश मिल रहे थे। तालिबान के प्रवक्ता को हर घंटे निर्देश मिल रहे थे। बता दें कि शनिवार को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख फैज हमीद भी काबुल पहुंचे। पाकिस्तान के किसी अधिकारी का इस तरह तालिबान सरकार के गठन से पहले अफगानिस्तान पहुंचना अपने आप में कई सवाल और कयासों को जन्म दे रहा है।
सालेह ने लिखा कि अफगानिस्तान आतंकियों से घिर चुका है। काबुल की सड़कों पर अब अलकायदा आ चुका है। तालिबान में कोई सुधार नहीं हुआ है। काबुल पर कब्जे के समय तालिबानी कैदियों ने गैर-तालिबानी कैदियों से संपर्क करने की कोशिश की थी और इसके बाद विद्रोह हुआ था। मैंने रक्षा मंत्री और गृहमंत्री से संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
उन्होने लिखा कि मैंने अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को मैसेज किया था, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया। 15 अगस्त को जब काबुल पर कब्जा हुआ तो लोग परेशान थे, उस समय सेना सक्रिय नहीं थी। उन्होंने लिखा कि मैंने अपने प्रमुख गार्ड रहीम से कहा था कि अगर मैं जख्मी हो जाता हूं तो वो मुझे गोली मार दे। क्योंकि मैं तालिबान के सामने सरेंडर नहीं करना चाहता हूं।  
तालिबान प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने भी एक हफ्ते पहले कहा था कि तालिबान पाकिस्तान को अपना दूसरा घर मानता है और अफगानिस्तान की धरती पर ऐसी किसी भी गतिविधि की इजाजत नहीं देगा जो पाकिस्तान के हितों के खिलाफ हो। हालांकि, मुजाहिद ने यह भी कहा था कि हम अपनी सरजमीं को किसी मुल्क के खिलाफ इस्तेमाल नहीं करने देंगे। भारत और पाकिस्तान को चाहिए वे अपने द्विपक्षीय मामले सुलझाएं। फिलहाल तालिबान ही अफगानिस्तान के लोगों का अब भविष्य ते करेगा।

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