महाराष्ट्र के शिरगाँव का तालिबानी शासन ।

कुल मिलाकर अभिप्राय यह कि तुम हमारे इलाके में रह रहे हो तो हम तुम्हारी निजी संपत्ति के अंदर जब चाहे आकर घूम कर जा सकते हैं, तुम अपनी प्राइवेसी के बारे में सोच भी कैसे सकते हो।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ):  2 सितंबर 2021 को शाम लगभग 3:00 बजे बड़ी संख्या में 40 से 50 के लगभग ग्रामीण महाराष्ट्र के सातारा जिला के शिरगांव स्थित सिद्ध विद्यापीठ के मेन गेट से अंदर आ गए। इस पूरी भीड़ में पास के गांव के लोगों के साथ ही पंचायत की कार्यकारिणी के सदस्य भी थे।

इतने सारे लोगों को देखकर सिद्ध विद्यापीठ के सदस्यों में अफरा-तफरी मच गई। इन आने वाले आगंतुकों में से कई लोग विद्यापीठ के पूरे प्रांगण में घुसकर घूमने लगे। जब उनको बाहर ऑफिस में रुकने के लिए कहा गया तो वह बत्तमीजी करने लगे। 

जब उनसे यह कहा गया कि यह एक निजी संपत्ति है और यहां पर किसी को अपनी इच्छा से आने-जाने का अधिकार नहीं है, क्योंकि यहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी आवश्यक होती है। इसके साथ ही कानूनी रूप से भी किसी के यहां बिना किसी पूर्व सूचना के और इतनी बड़ी संख्या में जाना अपराध माना जाता है। यह सुनकर भीड़ में कई लोग बदतमीजी पर उतर आए। उनमें से कुछ लोगों ने यह तक प्रश्न पूछना शुरू किया कि आप यहाँ पर पूजा पाठ क्यों करते हैं और इतने लंबे-लंबे समय तक क्यों करते हैं।

अब क्योंकि सिद्ध विद्यापीठ धर्म की प्राचीन परंपराओं का ज्ञान देता है तो यदि यहां पूजा पाठ और योग आदि नहीं किए जाएंगे तो कहां किए जाएंगे, किंतु बिना शोर मचाए शांतिपूर्वक अपने घर के अंदर धर्म का कार्य करना भी शायद लोगों को अब अखरने लगा है। 

इस भीड़ में लोग प्रांतवाद और भाषावाद को लेकर अत्यंत बत्तमीजी भी कर रहे थे और साफ दिख रहा था कि ये लोग यहाँ चल रहे धार्मिक कार्यों को रोकने की इच्छा से आए थे। इसके बाद हद तो तब हो गई जब ये लोग प्रांगण में लगे CCTV कैमरों को लेकर भी बत्तमीजी करने लगे और कहने लगे कि आप लोगों ने सीसीटीवी कैमरा यहाँ क्यों लगा रखे हैं। बत्तमीजी से चिल्ला रही इस भीड़ के लोगों को देखकर सिद्ध विद्या पीठ के लोगों को भीड़ के बेकाबू होने और मॉब लिंचिंग के हिंसा का खतरा सताने लगा, इसलिए वे लोग इन लोगों को शांत करने में लगे रहे। किन्तु देखा जाए तो यह पूरा घटनाक्रम मॉब लिंचिंग का हो जाता है क्योंकि किसी के निजी स्थान पर घुसकर यह भीड़ उनको डराती धमकाती है और उनको प्रताड़ित करती है। 

सिद्ध विद्यापीठ के प्रवक्ता महायोगी योगेंद्र नाथ ने कहा कि सिद्ध विद्यापीठ में रहने वाले साधक गण अपने रहने के स्थानों को पवित्र और अपनी पूजा पाठ के नियमों के अनुकूल रखते हैं, जिसके कारण वहां पर अन्य लोगों का आना-जाना निषिद्ध होता है, किंतु यह भीड़ सभी लोगों और साधकों के रहने के स्थानों मे घुस गई और उनकी साधनास्थली को अपवित्र कर दिया।

योगेंद्र नाथ ने आगे महाराष्ट्र की धरती पर हिंदू साधु-संतों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर दुख भी जताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की धरती वीर शिवाजी की धरती है जहां पर हिंदुओं की रक्षा और हिंदू साधु संतों की सुरक्षा सुनिश्चित होती थी, लेकिन शायद अब वह समय बीत गया है और अब इसी धरती पर साधु-संतों की मॉब लिंचिंग उनकी हत्या और उनके धर्म-कर्म के कार्यों में व्यवधान डालने का कार्य शुरू हो चुका है। अब यहां धर्म और संतों की रक्षा नहीं होती बल्कि साधुओं की हत्याओं और अधर्म का बोलबाला है।

योगेंद्र नाथ ने कहा कि सिद्ध विद्यापीठ में पंचायत कार्यकारिणी के सदस्य भी भीड़ के साथ ही थे जिसमें पंचायत की पदस्थ पुलिस पाटील भी थी। पुलिस पाटील की उपस्थिति को देखकर हम यह समझ रहे हैं कि पुलिस को भी अब इस घटनाक्रम की जानकारी है। इसलिए अभी हम पुलिस के पास स्वयं नहीं गए हैं।

कोरोनाग्रस्त इलाके में बिना मास्क के IKSVP प्रांगण में घूम रहे हैं और पूछते हैं – तुम हमें घूमने से कैसे रोक सकते हो? ये हमारा इलाका है।

IKSVP प्रांगण में आज के कोरोना काल में लोग बिना मास्क के घूमने लगे और निजी स्थानों की ताकाझाँकी करने लगे, मना करने पर धमका ये लोग धमकाने लगे कि तुम लोग हमारे इलाके में रह रहे हो! तुम हमें किसी जगह जाने से कैसे रोक सकते हो? कुल मिलाकर अभिप्राय यह कि तुम हमारे इलाके में रह रहे हो तो हम तुम्हारी निजी संपत्ति के अंदर जब चाहे आकर घूम कर जा सकते हैं, तुम अपनी प्राइवेसी के बारे में सोच भी कैसे सकते हो। इस मानसिकता को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यहाँ किसी की निजता कोई मायने नहीं रखती। प्रश्न यह भी है क्या इस इलाके में रहने वाले को यहाँ के सभी लोगों को अपने घर में किसी भी समय घुसने की इजाजत देनी होगी?

इनमें से एक एक महिला मांग करने लगीं कि हम आपके रहने के निजी स्थानों को देख कर ही जाएंगे, और आपके प्रांगण में हमारे गाँव के 2 लोग रहेंगे।

– हमारे गाँव के 2 आदमी आपकी प्रॉपर्टी में रहेंगे। – हम आपके प्राइवेट रूम्स को देखेंगे।

किसी के रहने के निजी स्थानों को देखने की मांग करने के साथ ही धार्मिक क्रियाकलापों को लेकर भी सवाल उठाए गए। IKSVP प्राचीन हिन्दू संस्कृति और धर्म की शिक्षा देने वाला संस्थान है इसलिए स्वभावतः यहाँ ये ज्ञान सिखाने के लिए धार्मिक क्रियाकलाप होते हैं। इसके साथ ही इन महिला ने 2 आदमियों को IKSVP के प्रांगण में ठहराने की मांग भी की। योगेंद्र नाथ ने कहा कि यह संस्थान अपने यहाँ रह लोगों की सुरक्षा को लेकर अत्यंत सतर्क रहता है ऐसे में बाहर के गाँव के दो अनजान लोगों को अपने यहाँ स्थान देने की बात हम स्वीकार कर ही नहीं सकते। वैसे भी किसी के निजी घर में बाहर के लोगों को रखने को यदि बाध्य होना पड़े तो यह भारतीय लोकतंत्र नहीं; तालिबान का तानाशाही शासन माना जाएगा।

पत्रकार को धमका रहे हैं और और मना करने के बावजूद IKSVP प्रांगण को फिल्मा रहे हैं।

भीड़ में कुछ लोग सिद्ध विद्यापीठ के प्रांगण का अपने मोबाइल से वीडियो बनाने लगे तब न्यूज़ लाइव नाउ ने उनसे पूछा कि आप किसी की प्राइवेट प्रॉपर्टी के अंदर उसका वीडियो क्यों बना रहे हैं। इस पर वीडियो बनाने वाले लोग पत्रकार से बदतमीजी करने लगे और धमकी देने लगे।

योगेंद्र नाथ ने कहा कि लोग यहाँ का वीडियो बना कर गए हैं उनके पास यहाँ के चप्पे-चप्पे की जानकारी है अब हमें खतरा है कि यहाँ कोई चोरी, डकैती या मर्डर तक भी आसानी से हो सकता है। यहाँ स्त्रियाँ भी हैं और उन्होंने उन सबके वीडियो बना लिए हैं। वैसे भी महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की हत्याएं हो चुकी हैं और साधु सन्यासियों के आश्रम में घुसकर उनको जान से मारने की साजिशें चल रही हैं। हम यति नरसिंहानंद पर हुए जानलेवा हमलों को कैसे भूल सकते हैं?

उन्होंने यह भी कहा कि अब हमें रात में अपनी सुरक्षा का भय है साथ ही अब यहाँ की स्त्रियों के साथ अभद्रता या हिंसा भी होने की आशंका है।  ऐसे में प्रशासन हमारी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगा? आज पूरा गाँव गुंडागर्दी में उतर आया है ऐसे में प्रशासन को इस मामले में दखल देना ही चाहिए।

अंत में यह पूरी भीड़ यहां रहने वाले लोगों और साधकों की निजी साधनास्थली और उनके आवास के साथ ही और पूरे के पूरे सिद्ध विद्यापीठ के प्रांगण की तलाशी ले कर ही गई। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि महाराष्ट्र के इस गाँव में भारत का लोकतंत्र नहीं तालिबान का शासन लागू है, और यहाँ के लोगों की मर्जी ही यहाँ का कानून है।

किसी के निजी निवास स्थान में जबरदस्ती बड़ी संख्या में घुस जाना, वहां जाकर वीडियो बनाना यह सब कानूनन अपराध है। 

अपने संख्या बल से मॉब लिंचिंग के हालात बनाकर किसी को डराना और धमकाना अत्यंत गलत होने के साथ ही अपराध भी है। ऐसे मामलों को देख कर भारत के एक सामान्य नागरिक के अधिकारों की रक्षा कौन करेगा यह सवाल उठना स्वाभाविक है।

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