छत्तीसगढ़ : बीजापुर में नक्सलियों से मुठभेड़ में पांच सुरक्षाकर्मी शहीद, 15 नक्सली ढेर।

छत्तीसगढ़ के डीजीपी डीएम अवस्थी ने कहा कि मुठभेड़ में जवानों की शहादत हुई है। नक्सलियों को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): छत्तीसगढ़ में सुरक्षा कर्मियों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ की खबर है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के धुर नक्सल प्रभावित तर्रेम थाना क्षेत्र के जोन्नागुड़ा के जंगल में शनिवार दोपहर पुलिस व नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में पांच जवान शहीद हो गए, जबकि 28 घायल हैं। जिस इलाके में मुठभेड़ हुई, वह बेहद दुर्गम है। इसके चलते देर शाम तक विरोधाभासी सूचनाएं मिलती रहीं। पुलिस मुख्यालय ने पांच जवानों के शहादत की पुष्टि की है, जबकि बस्तर आइजी सुंदरराज पी ने कोबरा बटालियन के सिर्फ एक जवान की शहादत की बात स्वीकारी है। उन्होंने मौके से एक महिला नक्सली का शव बरामद होने की भी जानकारी दी है। साथ ही दावा किया है कि मुठभेड़ में कम से कम 15 अन्य नक्सली मारे गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, शहीद और घायल जवानों की संख्या बढ़ सकती है। रात आठ बजे तक फोर्स लौटी नहीं है। बीजापुर जिला अस्पताल में 21 घायल जवानों को लाया गया है। वहीं गंभीर रूप से घायल सात जवानों को हेलीकॉफ्टर से रायपुर रेफर किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जवानों की शहादत पर दुख व्यक्त करते हुए उनके स्वजनों के प्रति संवेदना जताई है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरी संवेदना छत्तीसगढ़ में माओवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए लोगों के परिवारों के साथ है। वीर शहीदों की कुर्बानियों को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। घायल जल्द से जल्द ठीक होंगे।
नक्सली इन दिनों टेक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन (टीसीओसी) चला रहे हैं। इसमें वे हर साल बड़ी वारदातों को अंजाम देते रहे हैं। नारायणपुर जिले में 23 मार्च को जवानों से भरी बस को विस्फोट कर नक्सलियों ने उड़ा दिया था। इसमें पांच जवान शहीद हुए थे। शनिवार को नक्सलियों ने दस दिन के भीतर दूसरी बड़ी वारदात कर डाली। जिला मुख्यालय से करीब 75 किमी दूर तर्रेंम थाना क्षेत्र सिलगेर गांव के पास के जंगल में नक्सलियों की बटालियन नंबर एक के कमांडर दुर्दांत नक्सली हिड़मा की मौजूदगी की सूचना मिल रही थी। इस आधार पर शुक्रवार को डीआरजी (डिस्टि्रक्ट रिजर्व गार्ड), सीआरपीएफ, एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) व कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम रवाना की गई थी।
इसमें तर्रेम से 760 जवान, उसूर से 200, पामेड़ से 195, सुकमा जिले के मिनपा से 483 व नरसापुरम से 420 जवानों को मिलाकर कुल 2059 जवान शामिल थे। शनिवार को सर्चिंग से वापसी के दौरान बीजापुर के तर्रेम व सुकमा के सिलगेर के बीच जोन्नागुड़ा के जंगल में फोर्स की एक टुकड़ी को नक्सलियों ने एंबुश (चौतरफा घेर लेना) में फंसा लिया। बताया जा रहा है कि नक्सली पहाड़ी पर थे जबकि फोर्स खुले मैदान में। अनुमान लगाया गया है कि मौके पर करीब ढाई सौ नक्सली मौजूद थे। अचानक शुरू हुई फाय¨रग के बाद जवानों ने भी मोर्चा संभाला और बहादुरी के साथ मुकाबला किया। दोपहर 12 बजे से करीब तीन घंटे तक दोनों ओर से लगातार फाय¨रग चलती रही।
मुठभेड़ में कोबरा बटालियन का एक, बस्तरिया बटालियन के दो व डीआरजी के दो जवान शहीद हुए हैं। मौके से एक महिला नक्सली का शव मिला है, जिसकी शिनाख्त नहीं हो पाई है। शहीद व घायल जवानों का नाम नहीं मिल पाए हैं। सीआरपीएफ कोबरा के शहीद जवान बबलू रब्बा हैं, जो मूल रूप से असम के निवासी थे।
छत्तीसगढ़ के डीजीपी डीएम अवस्थी ने कहा कि मुठभेड़ में जवानों की शहादत हुई है। नक्सलियों को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। टीम अभी लौटी नहीं है। उसके पहुंचने पर ही वस्तुस्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
छत्तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सुरक्षा बलों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। हमारे जवानों ने शौर्य का परिचय देते हुए नक्सलियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। नक्सलियों के विरद्घ सुरक्षा बल और तेजी से अभियान चलाएंगे। इस घटना में घायल जवानों को बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
इससे पहले 23 मार्च को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में नक्सलियों ने गश्त से लौट रहे डीआरजी जवानों की बस को आइइडी ब्लास्ट से उड़ा दिया। बस में 25 जवान सवार थे। इस हमले में ड्राइवर समेत पांच जवान शहीद हो गए, जबकि सात जवान घायल हैं।
– 6 अप्रैल 2010 में ताड़मेटला हमले में सीआरपीएफ के 76 जवानों की शहादत ।
– 25 मई 2013 झीरम घाटी हमले में 30 से अधिक कांग्रेसी व जवान शहीद।
– 11 मार्च 2014 को नक्‍सलियों के टहकवाड़ा हमले में 15 जवान शहीद।
– 12 अप्रैल 2015 को दरभा में 5 जवानों सहित ड्राइवर व एएमटी शहीद।
– मार्च 2017 में भेज्जी हमले में 11 सीआरपीएफ जवान शहीद।
नक्सलियों संग सुरक्षकर्मियों की अनेक मुठभेड़ों में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी हताहत हुए हैं।

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