भारत बायोटेक द्वारा कोवैक्सीन पर जारी की गई फैक्टशीट, लगवाने से पहले जानें ये तथ्य..

लगातार सामने आ रही एडवर्स रिएक्शन की वजह से भारत बायोटेक ने मंगलवार को फैक्टशीट जारी की और कहा कि कमजोर इम्युनिटी वाले और इम्युनिटी बढ़ाने की दवा ले रहे मरीज कोवैक्सिन न लगवाएं।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): लंबे समय से कोरोना के इलाज का इंतजार कर रहे भारतीयान के ले अब वैक्सीन या गयी है लेकिन एलर्जी आदि से बचने से पहले कुछ तथ्य जाना आवश्यक है। केंद्र सरकार ने कहा था कि कमजोर इम्युनिटी वाले या इम्युनिटी बढ़ाने की दवा ले रहे मरीज भी कोरोना वैक्सीन लगवा सकते हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही एडवर्स रिएक्शन की वजह से भारत बायोटेक ने मंगलवार को फैक्टशीट जारी की और कहा कि कमजोर इम्युनिटी वाले और इम्युनिटी बढ़ाने की दवा ले रहे मरीज कोवैक्सिन न लगवाएं। अगर ऐसे लोग कोवैक्सिन लगवाते हैं तो उन्हें गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हो सकते हैं। इसके साथ ही जिन्हें बुखार है, वे भी वैक्सीन न लगवाएं। आइए जानते हैं कि कोवैक्सिन की फैक्टशीट क्या कहती है…
आपको वैक्सीनेशन सेंटर पर कोवैक्सिन लगवाने से पहले क्या बताना है?
कोई भी वैक्सीन लगवाने जाते हैं तो वैक्सीनेशन अधिकारी को कुछ बातें बतानी होती हैं। मसलन- क्या आप किसी बीमारी के लिए नियमित दवा ले रहे हैं? अगर हां, तो कितने समय से और किस बीमारी के लिए? बेहतर होगा कि अगर आपको इनमें से कुछ है तो वैक्सीन न लगवाएं-
किसी तरह की एलर्जी है, बुखार है, खून से जुड़ा कोई विकार या खून को पतला करने की दवा ले रहे हैं, क्या आप इम्युनोकॉम्प्रमाइज्ड हैं या इम्युन सिस्टम को प्रभावित करने वाली दवा ले रहे हैं, आप गर्भवती हैं, आप स्तनपान कराती हैं, आपने कोई और कोरोना वैक्सीन लगवाई है?
भारत बायोटेक की कोवैक्सिन किसे लगाई जा सकती है?
CDSCO ने कोवैक्सिन को क्लीनिकल ट्रायल मोड में सीमित इस्तेमाल की मंजूरी दी है। भारत सरकार ने जिन लोगों को कोरोना वैक्सीनेशन के प्रायोरिटी ग्रुप्स में रखा है, उन्हें वैक्सीन लगाई जा रही है। वैक्सीनेशन सेंटर पर प्रोग्राम अधिकारी उन्हें वैक्सीन के बारे में जानकारी देंगे। इसके बाद भी अगर कोई व्यक्ति कोवैक्सिन लगवाने से इनकार करता है तो उसे यह नहीं लगाई जाएगी।
क्या इससे पहले कोवैक्सिन का इस्तेमाल हुआ है?
सेंट्रल ड्रग लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने सतर्कता के साथ ही कोवैक्सिन को क्लीनिकल ट्रायल मोड में बेचने और लगाने की अनुमति दी है। क्लीनिकल ट्रायल्स के फेज-1 में 300 लोगों को और फेज-2 में 380 वॉलंटियर्स को वैक्सीन लगाई गई थी। क्लीनिकल ट्रायल्स के फेज-3 में 25,800 वॉलंटियर्स को वैक्सीन लगाई गई है और 6 जनवरी 2021 की स्थिति में सभी वॉलंटियर्स को कम से कम एक डोज दिया जा चुका है।
कोवैक्सिन लगाने से क्या लाभ है?
अब तक के क्लीनिकल ट्रायल्स में कोवैक्सिन ने चार हफ्ते के अंतर से दो डोज देने पर वॉलंटियर्स में इम्युनिटी डेवलप की है। वैसे, कोवैक्सिन की क्लीनिकल एफिकेसी (इफेक्टिवनेस) अभी सामने नहीं आई है। इस वजह से यह वैक्सीन लगने का मतलब यह नहीं है कि आपको कोविड-19 से जुड़ी सावधानी नहीं रखनी है।
कोवैक्सिन के क्या साइड इफेक्ट्स हैं?
भारत बायोटेक के मुताबिक कोवैक्सिन के साइड इफेक्ट्स में यह शामिल हैं-
इंजेक्शन की जगह पर दर्द, सूजन, लाली, खुजली
हाथ के ऊपरी हिस्से में जकड़न
जिस हाथ में इंजेक्शन लगा है, उसमें कमजोरी
शरीर दर्द
सिरदर्द
बुखार
कमजोरी
उल्टी-मतली
क्या कोई गंभीर साइड इफेक्ट भी हो सकता है?
कोवैक्सिन की वजह से गंभीर एलर्जिक रिएक्शन होने का जोखिम है, पर बहुत कम। इस वजह से वैक्सीनेशन अधिकारी आपको सेंटर पर 30 मिनट रुकने को कहेंगे, ताकि वैक्सीन देने के बाद आपकी निगरानी की जा सके। गंभीर एलर्जिक रिएक्शन के लक्षण इस प्रकार हैं-
सांस लेने में दिक्कत
चेहरे और गले में सूजन
दिल की धड़कन तेज होना
पूरे शरीर में चकत्ते पड़ना
बेहोशी और कमजोरी
इसके अलावा भी कोई गंभीर या अप्रत्याशित साइड-इफेक्ट्स सामने आ सकते हैं क्योंकि कोवैक्सिन की स्टडी अभी जारी है।
साइड इफेक्ट्स होने पर क्या करना चाहिए?
अगर आपको कोवैक्सिन लगाने के बाद कोई साइड इफेक्ट होता है तो आपको डॉक्टर या वैक्सीनेशन अधिकारी से संपर्क करना चाहिए या आपको तत्काल पास के अस्पताल जाना चाहिए।
क्या कोवैक्सिन की वजह से कोरोना इंफेक्शन हो सकता है?
नहीं। यह एक इनएक्टिवेटेड वैक्सीन है और मरा हुआ वायरस आपके शरीर में इंजेक्ट किया जाता है। इस वजह से इस वैक्सीन की वजह से कोरोना इंफेक्शन होने का खतरा बिल्कुल भी नहीं है।
आपको वैक्सीन लगाने के बाद कितने महीने तक प्रोग्राम का हिस्सा बने रहना होगा?
कोवैक्सिन लगवाने वाले सभी लोगों की दूसरा डोज देने के बाद तीन महीने तक निगरानी होगी। इस दौरान अगर कोई गंभीर साइड इफेक्ट होता है तो भारत बायोटेक की ओर से उसका इलाज किया जाएगा। साथ ही मुआवजा भी दिया जाएगा। मुआवजे की राशि ICMR की सेंट्रल एथिकल कमेटी तय करेगी। फिलहाल लोगों मे कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभावों से चिंताऐं बढ़ी हैं।

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