‘कृषि कानून विरोध’ के बीच कोरोना बना एक बड़ा ख़तरा।

बता दें की भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) में एपिडेमियोलाजी एंड कम्युनिकेबल डिजीज (ईसीडी) डिवीजन के प्रमुख समीरन पांडा ने कहा ।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): बता दें की भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) में एपिडेमियोलाजी एंड कम्युनिकेबल डिजीज (ईसीडी) डिवीजन के प्रमुख समीरन पांडा ने कहा कि विरोध प्रदर्शन में बड़े पैमाने पर लोगों का जमावड़ा होता है और लोगों के स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सुरक्षात्मक और रोकथाम के उपायों का सख्ती से अनुपालन किया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो यह कार्यक्रम ‘सुपर स्प्रेडर’ बन सकता है क्योंकि ऐसा जमावड़ा वायरस के प्रसार के अनुकूल है।कंफेडरेशन आफ मेडिकल एसोसिएशन आफ एशिया एंड ओशिनिया के प्रेसीडेंट और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के पूर्व प्रेसीडेंट डा. केके अग्रवाल ने कहा कि सरकार को इस आंदोलन की अनुमति नहीं देनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल किया, ‘ऐसे हर कदम के लिए हमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश या हस्तक्षेप की जरूरत क्यों होती है? महामारी रोग अधिनियम के तहत सरकार को उन हालात पर नियंत्रण करने का अधिकार है जिनसे संक्रमण फैल सकता है। भारतीय दंड संहिता की धारा-270 के तहत स्थानीय पुलिस थाने को भी मामले दर्ज करने का अधिकार है अगर उन्हें लगता है कि किसी कार्यक्रम से संक्रमण का प्रसार हो सकता है।’ उन्होंने कहा कि महामारी में राजनीति को कभी भी तरजीह नहीं मिलनी चाहिए। डॉ. अग्रवाल ने भी कहा कि किसानों का आंदोलन ‘सुपर स्प्रेडर’ कार्यक्रम साबित होगा जो न सिर्फ दिल्ली बल्कि पूरे देश के लिए खतरनाक होगा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में डिपार्टमेंट आफ कम्युनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर संजय राय ने कहा कि किसी भी प्रदर्शन या भीड़ से कोरोना वायरस का प्रसार हो सकता है, इसीलिए इस समय भीड़ से बचा जाना चाहिए।।

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