सोना 143 रुपये की गिरावट के साथ 51,912 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर खुला

शुरुआती कारोबार में सोने ने 51,929 रुपये प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर और 51,814 रुपये प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर छू लिया।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): इस कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन सोने में तगड़ी गिरावट देखी गई है। कल शाम को सोना 52,055 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ था, जो आज सुबह 143 रुपये की गिरावट के साथ 51,912 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में सोने ने 51,929 रुपये प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर और 51,814 रुपये प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर छू लिया। हाजिर मांग बढ़ने से सटोरियों ने अपने सौदे बढ़ाये। इससे बृहस्पतिवार को सोना वायदा भाव 593 रुपये मजबूत होकर 51,413 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में दिसंबर माह में डिलिवरी वाले सोना वायदा की कीमत 593 रुपये यानी 1.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 51,413 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। इसमें 12,409 लॉट के लिये कारोबार किया गया। न्यूयार्क में सोना 0.94 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,914.00 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वैश्विक बाजारों के मजबूत रुख से बृहस्तिवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 158 रुपये की बढ़त के साथ 50,980 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने यह जानकारी दी है। पिछले कारोबारी सत्र में सोना 50,822 रुपये प्रति दस ग्राम पर बंद हुआ था। सोने की तर्ज पर चांदी भी 697 रुपये के उछाल के साथ 62,043 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। पिछले सत्र में चांदी 61,346 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना बढ़त के साथ 1,916 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। चांदी भी लाभ के साथ 24.34 डॉलर प्रति औंस पर थी। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के उपाध्यक्ष (जिंस शोध) नवनीत दमानी ने कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को लेकर अनिश्चितता के बीच सोना चढ़ा है। निवेशक बेसब्री से चुनावी नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। 7 अगस्त 2020, ये वो दिन था जब सोने-चांदी ने एक नया रेकॉर्ड बनाया। सोने और चांदी दोनों ने ही अपना ऑल टाइम हाई छुआ। 7 अगस्त को सोने ने 56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑल टाइम हाई का स्तर छुआ था, जबकि चांदी ने 77,840 रुपये प्रति किलो का स्तर छुआ था। सोना अब तक करीब 4200 रुपये प्रति ग्राम गिरा है, जबकी चांदी 13,300 रुपये प्रति किलो तक गिर चुकी है। कोरोना वायरस की वजह से शेयर बाजार में एक तगड़ी गिरावट देखने को मिली थी। समय बीतने के साथ-साथ शेयर बाजार उस तगड़ी गिरावट से लगातार उबर रहा है। दुनिया भर के अधिकतर शेयर बाजार कोरोना की वजह से आई गिरावट से मजबूती से लडते हुए रिकवर कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सोना (today gold price) अपना ऑल टाइम हाई छू कर वापस आ चुका है। आए दिन सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अब सवाल ये उठता है कि क्या सोना भी कोरोना काल से पहले वाली स्थिति में लौट आएगा, क्योंकि ये ट्रेंड देखा गया है कि शेयर बाजार मजबूत होता है तो सोना कमजोर होता है और इसका उल्टा भी होता है। तो क्या सोना अभी और सस्ता होगा, क्योंकि जनवरी में सेंसेक्स 41 हजार के करीब था, तब सोने की कीमत भी 41 हजार के करीब थी। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंसियल सविर्सिज के जिंस शोध के उपाध्यक्ष नवनीत दमानी कहते हैं कि सोना ऊंचाई से गिरकर 50 हजार रुपये के दायरे में आया है, जबकि चांदी 60 हजार रुपये के दायरे में आ चुकी है। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में भी उतार चढ़ाव जारी रह सकता है। केडिया कैपिटल के डायरेक्टर अजय केडिया मानते हैं कि स्टिमुलस पैकेज ने शेयर बाजारों के लिए स्टेरॉयड का काम किया। इसी की वजह से शेयर बाजार में तेजी आई है, लेकिन इसे नेचुरल नहीं कहा जा सकता। सोने में गिरावट की एक बड़ी वजह है पिछले 2 महीनों में रुपये में आई मजबूती। अभी रुपये 73-74 रुपये प्रति डॉलर तक मजबूत हो चुका है, जो कुछ महीने पहले 76-77 रुपये प्रति डॉलर तक कमजोर हो गया था। अगर फिर से डॉलर मजबूत होता है तो सोने में लॉन्ग टर्म में फिर से मजबूती देखने को मिलेगी और डॉलर का फिर से मजबूत होना लगभग तय ही है। यानी सोना अगले साल तक 60-70 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। 24 फरवरी 2020 को सोना 41 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था जबकि सेंसेक्स 40,363 के स्तर पर था। 15 मई तक सोना 47 हजार से भी ऊपर पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स गिरकर 27,500 के करीब आ गया। कोरोना काल के दौरान 7 अगस्त को सोने ने 56,254 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑल टाइ हाई छू लिया, जबकि सेंसेक्स भी काफी रिकवर होकर 37,600 के स्तर पर पहुंच गया। 30 सितंबर तक सोना गिरकर 50,400 के करीब पहुंच गया है, जबकि सेंसेक्स अभी भी 38 हजार के दायरे में है। अक्टूबर-नवंबर के दौरान अमूमन सोने की मांग काफी बढ़ जाती है। इसकी वजह है फेस्टिव सीजन का आना। दिवाली के करीब सोना हमेशा चमकता है, लेकिन कोरोना की वजह से इस बार लोगों को आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है, जिसका सीधा असर सोने की मांग पर पड़ा है। मुंबई के एक गोल्ड डीलर का कहना है कि इस बार फेस्टिव सीजन के दौरान भी मांग कम ही रहने का अनुमान है, क्योंकि कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं। सोना गहरे संकट में काम आने वाली संपत्ति है, मौजूदा कठिन वैश्विक परिस्थितियों में यह धारणा एक बार फिर सही साबित हो रही है। कोविड-19 महामारी और भू-राजनीतिक संकट के बीच सोना एक बार फिर रिकॉर्ड बना रहा है और अन्य संपत्तियों की तुलना में निवेशकों के लिए निवेश का बेहतर विकल्प साबित हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि उतार-चढ़ाव के बीच सोना अभी कम से कम एक-डेढ़ साल तक ऊंचे स्तर पर बना रहेगा। दिल्ली बुलियन एंड ज्वेलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विमल गोयल का मानना है कि कम एक साल तक सोना उच्चस्तर पर रही रहेगा। वह कहते हैं कि संकट के इस समय सोना निवेशकों के लिए ‘वरदान’ है। गोयल मानते हैं कि दिवाली के आसपास सोने में 10 से 15 प्रतिशत तक का उछाल आ सकता है। सोना हमेशा ही मुसीबत की घड़ी में खूब चमका है। 1979 में कई युद्ध हुए और उस साल सोना करीब 120 फीसदी उछला था। अभी हाल ही में 2014 में सीरिया पर अमेरिका का खतरा मंडरा रहा था तो भी सोने के दाम आसमान छूने लगे थे। हालांकि, बाद में यह अपने पुराने स्तर पर आ गया। जब ईरान से अमेरिका का तनाव बढ़ा या फिर जब चीन-अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर की स्थिति बनी, तब भी सोने की कीमत बढ़ी।

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