आज भारत पहुंचेंगे 5 अत्याधुनिक राफेल विमान, वायुसेना प्रमुख करेंगे अगवानी

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया बुधवार को अंबाला हवाई अड्डे पर पांच राफेल लड़ाकू विमान की अगवानी और स्वागत करेंगे। जेट विमानों ने सोमवार को फ्रांसीसी शहर बोर्डो में मेरिनैक एयर बेस से उड़ान भरी थी। बेड़े में तीन सिंगल सीटर और दो जुड़वा सीट वाले विमान शामिल हैं। इन्हें भारतीय वायुसेना में इसके 17वें स्क्वैड्रन के हिस्से के रूप में शामिल किया जाएगा, जिसे अंबाला एयर बेस पर ‘गोल्डन एरो’ के रूप में भी जाना जाता है। ये विमान लगभग सात हजार किलोमीटर का सफर तय करके अंबाला वायुसेना अड्डे पर उतरेंगे।वायुसेना के सूत्रों ने कहा, ‘एयरफोर्स चीफ कल (बुधवार को) युद्धक विमानों को रिसीव करने अंबाला में होंगे जिन्हें 2016 में 60 हजार करोड़ रुपये के देश के सबसे बड़े रक्षा सौदे के हिस्से के रूप में शामिल किया जा रहा है।’ उन्होंने बताया कि अभी पांचों राफेल विमान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अल दफ्रा एयरबेस पर खड़े हैं। वो बुधवार को सुबह 11 बजे भारत के लिए उड़ान भरेंगे और दोपहर 2 बजे अंबाला एयरबेस पहुंच जाएंगे। राफेल को उड़ाकर लाने वाले पायलट्स अपने ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह की अगुवाई में अंबाला में ही एयर चीफ को बताएंगे कि उन्हें फ्रांस में किस प्रकार की ट्रेनिंग मिली है।शेड्यूल के मुताबिक, राफेल जल्द ही अंबाला से दूसरे एयरबेस रवाना होंगे। 17 स्क्वैड्रन के कमांडिंग ऑफिसर हरकीरत सिंह ग्रुप कमांडर की भूमिका में हैं जबकि उनके साथ विंग कमांडर एमके सिंह और विंग कमांडर आर कटारिया भी पायलट दल में शामिल हैं। अगर अंबाला में मौसम खराब हो गया तो फिर सभी राफेल को राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर उतारा जाएगा। वायुसेना में राफेल को शामिल किए जाने का समारोह बाद में आयोजित किया जाएगा। फ्रांस से पांच राफेल लड़ाकू विमानों के आने के पहले मंगलवार को अंबाला वायु सेना केंद्र के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई और निषेधाज्ञा लागू की गई है। वहां वीडयोग्राफी और फोटो खिंचने पर रोक लगा दी गई। एक अधिकारी ने बताया कि अंबाला जिला प्रशासन ने वायुसेना केंद्र के तीन किलोमीटर के दायरे में लोगों के ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। उपायुक्त अशोक शर्मा ने एक आदेश में कहा कि धुलकोट, बलदेव नगर, गरनाला और पंजखोड़ा समेत वायु सेना के आसपास के गांवों में धारा 144 लगा दी गयी है जिसके तहत चार या अधिक लोगों के जमा होने पर प्रतिबंध है।राफेल लड़ाकू विमानों में एक फ्रांसीसी टैंकर ने 30 हजार फुट की ऊंचाई पर बीच हवा में ही ईंधन भरा। भारतीय वायुसेना ने इसकी तस्वीरों के साथ ट्वीट किया, ‘भारतीय वायुसेना हमारे राफेल विमानों की घर वापसी की यात्रा में फ्रांसीसी वायुसेना द्वारा उपलब्ध कराए गए सहयोग के लिए उनकी सराहना करती है।’ अधिकारियों ने कहा कि पांच राफेल विमान सोमवार की शाम को करीब सात घंटों की उड़ान के बाद संयुक्त अरब अमीरात के अल दाफरा हवाईअड्डे पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि फ्रांस से भारत आ रहे इन लड़ाकू विमानों के लिए यही एक ठहराव था। वायुसेना के बेड़े में राफेल के शामिल होने से उसकी युद्ध क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होने की उम्मीद है। यह विमान विभिन्न प्रकार के शक्तिशाली हथियारों को ले जाने में सक्षम है। यूरोपीय मिसाइल निर्माता एमबीडीएस की मिटोर, स्कैल्प क्रूज मिसाइल, मीका हथियार प्रणाली राफेल लड़ाकू विमानों के हथियार पैकेज में शामिल है। भारत को यह लड़ाकू विमान ऐसे समय में मिल रहे हैं, जब उसका पूर्वी लद्दाख में सीमा के मुद्दे पर चीन के साथ गतिरोध चल रहा है। भारतीय वायुसेना पहले ही वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से लगे अपने अहम हवाई ठिकानों पर अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को तैनात कर चुकी है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि राफेल विमानों को लद्दाख सेक्टर में तैनात किए जाने की संभावना है जहां वायुसेना चीन के साथ लगने वाली एलएसी पर अपनी संचालन क्षमताओं को और मजबूत करना चाहती है। भारत ने वायुसेना के लिए 36 राफेल विमान खरीदने के लिए 23 सितंबर, 2016 को फ्रांस की विमानन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी दसॉ एविएशन के साथ 59 हजार करोड़ रुपये का करार किया था। वायुसेना को पहला राफेल विमान पिछले साल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की फ्रांस यात्रा के दौरान सौंपा गया था।

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