अमेरिका ने चीन के ख़िलाफ़ भारत को अपना सहयोगी बताया।

एक इंटरव्यू में पोम्पियो ने कहा- चीन की सेना ने जो तरक्की हासिल की है, उसको सच माना जा सकता है। शी जिनपिंग सैन्य ताकत बढ़ाने चाहते हैं।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : ओम तिवारी : भारत और चीन के सीमा विवाद का अभी निपटारा नहीं हुआ है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि अमेरिका चीनी सेना की क्षमताओं को देखते हुए भारत समेत दुनिया में अपने सहयोगी देशों को साथ ले सकता है। एक  इंटरव्यू में पोम्पियो ने कहा- चीन की सेना ने जो तरक्की हासिल की है, उसको सच माना जा सकता है। शी जिनपिंग सैन्य ताकत बढ़ाने चाहते हैं। चीन लंबे समय से भारत के लिए खतरा पैदा कर रहा है। उससे निपटने के लिए कई देशों का साथ ले सकते हैं।
पोम्पियो के मुताबिक, “अमेरिकी  रक्षा विभाग चीनी सेना से होने वाले खतरे को समझने के लिए सभी जरूरी उपाय कर रहा है। मुझे भरोसा है कि राष्ट्रपति ट्रम्प के नेतृत्व में हमारी सेना, रक्षा विभाग और सैन्य संस्थान इतने मजबूत हैं कि अमेरिकी लोगों की हिफाजत हमेशा कर सकेंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, “ हम भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, जापान और ब्राजील समेत दुनिया के अपने सभी साथी देशों के अच्छे साझेदार हो सकते हैं। इससे यह भी तय हो जाएगा कि पश्चिमी देशों में आजादी का जो अमेरिकी मॉडल है वो इन देशों में भी हो।” भारत-चीन सीमा विवाद पर पोम्पियो ने कहा- यह मार्च से ही चल रहा है। चीन की कम्युनिस्ट अपने फायदे के लिए ऐसा कर रही है। हालांकि,  चीन लंबे समय से भारत के लिए यह खतरे पैदा कर रहा है।
पोम्पियो ने कहा- अमेरिका में पहली बार ऐसी सरकार है चीन को जवाब देने के लिए तैयार है। जिसने कहा है कि चीन की हरकतें सहन नहीं की जा सकतीं। इस सरकार ने कुछ ऐसे कदम उठाए हैं जो जरूरी थे। इससे यह भी पता चलता है कि हमारी सरकार चीन से अमेरिकी लोगों को बचाने के लिए कितनी गंभीर है।
अमेरिकी संसद में चीन के खिलाफ 60 बिल लंबित होने के बारे में उन्होंने कहा- मैं नहीं जानता कि इनमें से कौन से बिल राष्ट्रपति तक पहुंचेंगे। पिछले सप्ताह चीन के उईगर मुसलमानों से जुड़ा बिल लाया गया था। मैं सांसदों से अपील करूंगा कि वे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को आगे बढ़ने से रोकने और अमेरिकी लोगों को सुरक्षित रखने में प्रशासन की मदद करें। चीन और अमेरिका विवाद व्यापार से सम्बंधित मुद्दों पर लम्बे समय से रहा है।

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