इंदौर में क्वारैंटाइन सेंटर में सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी कर रहे लोग।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : ओम तिवारी : देश में चल रहे कोरोना के संकट की रोकथाम के लिए  कोरोना संक्रमण के संदिग्धों को क्वारंटीन किया जा रहा है। इसके बावजूद इंदौर के क्वारंटीन  सेंटर में ड्यूटी पर तैनात रहे आईडीए के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए। यहां संक्रमण कैसे फैला? यह जानने के लिए पड़ताल की तो पता चला ज्यादातर क्वारैंटाइन क्षेत्र में लोग आराम से घूम-फिर रहे हैं। कोई रोक-टोक नहीं है। कभी कोई गार्डन में दिखता है तो कभी गेट के आसपास घूमता दिखता है। यहां ड्यूटी पर लगा स्टाफ भी संक्रमण के डर से अंदर नहीं जाता। डॉक्टरों का कहना है कि इनके परिसर में घूमने से संक्रमण का खतरा है, क्योंकि क्वारैंटाइन में रहने वाले लोगों में से ही पॉजिटिव केस सामने आए हैं। प्रशासन ने शहर में फिलहाल 36 जगहों पर 1474 से ज्यादा लोगों को क्वारैंटाइन करके रखा है। यहां तैनात स्टाफ का कहना है कि कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है कि हमें क्या करना है और इन्हें क्या करना है। शुरुआत में अफसर बोले थे कि इन्हें कमरे में रहना चाहिए। तब से समझाइश दे रहे। वीडियो से बता रहे, पर कुछ लोग समझते हैं, बाकी नहीं सुनते। जिनकी क्वारैंटाइन अवधि पूरी होने को है, उनके साथ ही नए संदिग्धों को रख देते हैं, इससे भी दोबारा संक्रमण की आशंका बनी रहती है। आईडीए सीईओ और सेंटर प्रभारी विवेक श्रोत्रिय के मुताबिक, क्वारैंटाइन में रह रहे लोगों के लिए सुबह चाय-दूध, नाश्ता, दिन-रात के खाने के साथ केक, बिस्किट, टोस्ट जैसी व्यवस्थाएं भी हैं। आईडीए के 300 से ज्यादा अफसर-कर्मचारी इनकी देखरेख कर रहे हैं। हर सेंटर के पर एक-एक फार्मासिस्ट की ड्यूटी है, जो 12 घंटे यहीं रहता है। लगातार मॉनिटरिंग हो रही है। 1 ताराकुंज : 3 पॉजिटिव, 22 लोग अब भी, इनमें ज्यादातर जमाती, ये नीचे तक आते, गेट पर पहुंच जाते हैं। असम और अन्य जगहों के जमाती भी हैं। ऊपरी मंजिलों के 26 कमरों में इन्हें रखा है, लेकिन खाने-पीने और घूमने के लिए नीचे आवाजाही चलती रहती है। आसपास के रहवासी इस कारण बाहर दूध तक लेने नहीं जा रहे। 2 दस्तूर गार्डन : आवाजाही चलती रहती, इनकी देखरेख में लगा स्टाफ बोला- हम अंदर नहीं जाते- रानीपुरा और आसपास के 24 लोग हैं। 10 कमरे इन लोगों को दिए हैं। गार्डन इंचार्ज ने बताया कि कुछ परिवारों को खाने के पैकेट ज्यादा चाहिए थे, वह भी दिए। खाना लेते वक्त और शाम को ये गार्डन में घूमते हैं। किसी की सुनते ही नहीं हैं।  3 गोकुल गार्डन : साथ बैठकर ही खाना खाते, सब जगह चलती रहती आवाजाही- 10 लोग हैं। खाना भले ही एक व्यक्ति का आए, पर खाने सब साथ बैठ जाते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग नहीं है। इन्हें टोको तो सुन लेते हैं, पर बाद में फिर साथ बैठना, घूमना शुरू कर देते हैं। यहां शुरुआती दौर में दो लोग पॉजिटिव आए थे। 4 असरावदखुर्द : 58 लोग, संदेही ऊपरी मंजिल पर अलग, लोगों को अपने फ्लोर से नीचे नहीं आने देते हैं। तीनों मंजिलों पर अलग-अलग रखा है। सबसे ऊपर संदेही हैं। डॉ. शादाब खान कहते हैं, यहां जिन्हें क्वारैंटाइन किया था, उनमें से कई पॉजिटिव निकले। किसी को हम कमरे से बाहर नहीं आने देते। 5 सदर बाजार हज हाउस : फार्मासिस्ट कर रहे काउंसलिंग, ताकि रहें सकारात्मक- फार्मासिस्ट दिनेश साहू 12 घंटे इन लोगों के बीच रहते हैं। उनका कहना है कि यहां से कुछ लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, इसलिए अब सबको समझाते हैं कि डरने की जरूरत नहीं है। कोशिश हैं किसी को नकारात्मक भाव न आए। कोरोना से युद्ध में स्वास्थ्य कर्मी अपनी पूरी कोशिश करते हुए लगे हुए हैं, लेकिन लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

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