जम्मू पहुंचा विदेशी 25 राजनयिकों का प्रतिनिधिमंडल

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) :   जम्मू कश्मीर में दूसरी बार विदेशी राजनयिकों का प्रतिनिधिमंडल आया है। 5 अगस्त 2019 को कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद 25 विदेशी प्रतिनिधिमंडल का दूसरा आधिकारिक जत्था आज दूसरे दिन जम्मू पहुंचा। सबसे पहले वे चिनार कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढ़िल्लन मुलाकात की। राजनयिकों को राज्य की सुरक्षा स्थितियों से अवगत कराया गया। इसके बाद सभी सदस्य जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के परिसर पहुंचे जहां वे चीफ जस्टिस गीता मित्तल से मुलाकात करेंगे। सभी सदस्य इसके बाद उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू और जिला प्रशासनिक अधिकारियों से भी मिलेंगे। इसके बाद सभी राजनयिकों का अन्य सिविल सोसाइटी के सदस्यों से मुलाकात का कार्यक्रम है। इससे पहले, कल पहले दिन सभी राजनयिकों ने प्रसिद्ध कारोबारी समुदायों और राजनेताओं से व्यापक चर्चा की। व्यापारियों ने राजनयिकों को बताया कि अनुच्छेद 370 हटने के उन्हें भारी नुकसान हुआ है लेकिन राज्य के विकास को लेकर सरकार के वादों पर उन्हें विश्वास है। कुछ व्यापारियों ने बताया कि वे चाहते हैं कि सरकार क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करे। सेब के उत्पादकों ने बताया कि पड़ोसी देश उनके कारोबार को खत्म करने में जुटे हैं। राजनयिकों को पहले दिन घाटी में विरोध का भी सामना करना पड़ा। कुछ युवाओं ने कहा कि हमारी जरूरत रोजगार है। विपक्षी नेताओं और लोगों सवाल उठाए कि क्या पाकिस्तान के झूठ को खत्म करने के लिए ये कोशिशें काफी हैं ? क्या कहीं ये दौरे केवल पब्लिसिटी स्टंट बनकर तो नहीं रह जाएंगे या इनसे कुछ फायदा भी होगा? इससे पहले उन्होंने श्रीनगर में शिकारों में बैठकर डल झील की सैर की। प्रतिनिधिमंडल में कनाडा, ऑस्ट्रिया, उज्बेकिस्तान, युगांडा, स्लोवाक रिपब्लिक, नीदरलैंड्स, नामीबिया, किर्गिज रिपब्लिक, बुल्गारिया, जर्मनी, ताजिकिस्तान, फ्रांस, मैक्सिको, डेनमार्क, इटली, अफगानिस्तान, न्यूजीलैंड, पोलैंड और रवांडा के प्रतिनिधि शामिल हैं। विदेशी राजनयिकों के दौरों को लेकर पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि विदेशी राजनयिक अधिकारियों से इंटरनेट पर प्रतिबंध और लोक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत बंद राजनेताओं के बारे में सवाल करेंगे। इल्तिजा ने ट्वीट किया, “उम्मीद है कि पांच अगस्त से इंटरनेट पर प्रतिबंध को लेकर विदेशी राजनयिक भारत सरकार से सवाल उठाएंगे। 5 अगस्त को ही जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन की घोषणा की गई थी।” प्रतिनिधिमंडल में शामिल अफगानिस्तान के ताहिर कादरी ने दौरे को लेकर कई ट्वीट किए और कश्मीर के हालात पर काफी खुशी जताई। एयरपोर्ट से होटल जाते हुए उन्हें इस बात का अंदाजा हुआ कि शहर में स्कूल और दुकानें खुली हुई हैं। देश में 80% सेब यहीं से जाता है और इस क्षेत्र में यहा व्यापार की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि उनकी दिली तमन्ना थी कि एक बार कश्मीर जरूर आएं। हालांकि, डेलिगेशन में लैटिन अमेरिकी सदस्य ने कहा कि वे केवल एक पर्यटक के तौर पर यहां आए हैं। प्रतिनिधिमंडल को बारामुला, श्रीनगर और जम्मू में जाना था, लेकिन वे बारामूला नहीं गए। डेलिगेशन ने श्रीनगर स्थित अपने होटल में ही कई लोगों से मुलाकात की। इसके अलावा राजनेताओं से भी मिले, जिन्होंने इनमें नजरबंद किए गए मुख्यमंत्रियों को रिहा करने की मांग की और बिगड़ते हुए हालात को जल्द सुधारे जाने की जरूरत है।

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