सुप्रीम कोर्ट ने विवादित रामजन्मभूमि पर सुनाया फैसला, बनेगा राममंदिर!

शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में विवादित स्‍थल पर राम मंदिर के निर्माण का रास्‍ता साफ करते हुए विवादित भूमि श्रीराम जन्मभूमि न्यास को सौंपने और सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में ही किसी दूसरे स्थान पर पांच एकड़ भूमि देने का फैसला सुनाया।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : अयोध्या में रामलला के जन्मभूमि पर चल रहा विवाद आखिरकार ख़त्म हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को 70 साल से कानूनी लड़ाई में उलझे और पांच सौ साल से अधिक पुराने देश के सबसे चर्चित अयोध्या भूमि विवाद मामले में अपना फैसला सुना दिया। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में विवादित स्‍थल पर राम मंदिर के निर्माण का रास्‍ता साफ करते हुए विवादित भूमि श्रीराम जन्मभूमि न्यास को सौंपने और सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में ही किसी दूसरे स्थान पर पांच एकड़ भूमि देने का फैसला सुनाया। मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ ने अपने फैसले में केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह तीन से चार महीने के भीतर सेंट्रल गवर्नमेंट ट्रस्ट की स्थापना करे और विवादित स्थल को मंदिर निर्माण के लिए सौंप दे। अदालत ने यह भी कहा कि अयोध्या में पांच एकड़ वैकल्‍प‍िक जमीन सुन्नी वक्‍फ बोर्ड को प्रदान करे। निर्देश में यह भी स्‍पष्‍ट किया कि मस्जिद का निर्माण भी किसी प्रतिष्ठित जगह पर होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज करते हुए रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड को ही पक्षकार माना। यही नहीं अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा विवादित भूमि को तीन पक्षों में बांटने के फैसले को अतार्किक बताया। अदालत ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ की जमीन दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा राम लला की मूर्ति का उपासक या सेवादार नहीं है। निर्मोही अखाड़े का दावा कानूनी समय सीमा के तहत प्रतिबंधित है। फैसला आने के बाद रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि अयोध्या का फैसला लोगों की जीत है। वहीं फैसले में विरोधाभास का जिक्र करते हुए सुन्नी केंद्रीय वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जीलानी ने इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मंशा जाहिर की।
राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने सर्वसम्मति यानी 5-0 से ऐतिहासिक फैसला सुनाया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस अब्दुल नजीर की संविधान पीठ ने राजनैतिक, धार्मिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील इस मुकदमें की 40 दिन तक मैराथन सुनवाई करने के बाद गत 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। देश के संवेदनशील मामले में फैसले के मद्देनजर देशभर में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।

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