सरकार-संघ की ओर से नेताओं को बयानबाजी से बचने का निर्देश दिया गया, कांग्रेस भी सौहार्द्र के स्टैंड पर।

संयम के साथ संयत भाषा इस्तेमाल करने की सलाह की वजह से भाजपा ने कोई जश्न नहीं मनाया।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या केस का निर्णायक फैसला सुना दिया। वहीं, फैसले के बाद भाजपा, सरकार और कांग्रेस की तरफ से कोई तीखी बयानबाजी नहीं हुई। सरकार और संघ ने जहां अपने नेताओं को बयानबाजी न करने का निर्देश दिया। उधर, कांग्रेस भी सौहार्द कायम रखने के अपने पुराने स्टैंड पर कायम रही। शुक्रवार की देर रात जैसे ही अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीख तय हुई, भाजपा और सरकार में एहतियाती कदम उठाने का दौर शुरू हो गया। सरकार, भाजपा और संघ पूरी तरह से आश्वस्त था कि फैसला मंदिर के हक में आ सकता है, इसलिए राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संगठन को साफ निर्देश दिया कि फैसले के बाद कोई भी प्रवक्ता या नेता ऐसी बयानबाजी नहीं करेगा, जिससे दूसरे समाज के लोगों में आक्रोश पैदा हो। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा और सरकार में शामिल नेताओं ने सौहार्दपूर्ण बयान दिए। संयम के साथ संयत भाषा इस्तेमाल करने की सलाह की वजह से भाजपा ने कोई जश्न नहीं मनाया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संघ भी बेहद गदगद हुआ और खास तौर से मुस्लिम पक्ष को अलग से पांच एकड़ जमीन देने के फैसले को भी वह अच्छा कदम मान रहा है। शनिवार सुबह भाजपा मुख्यालय में सभी प्रवक्ताओं का जमावड़ा हो चुका था। फैसला पूरा होने के बाद करीब 11 बजे भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्‌डा ने प्रवक्ताओं को शाह के निर्देश के मुताबिक संयम के साथ संयत भाषा का इस्तेमाल करने की नसीहत दी, ताकि सामाजिक सौहार्द का माहौल कायम रहे। सरकार के स्तर पर शाह ने सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ अपने सरकारी निवास पर ही बैठक की। गृह मंत्रालय छुट्‌टी के दिन भी सामान्य दिनों की तरह खोला गया। शाह अपने आवास से ही देशभर की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते रहे। उधर, संघ परिवार इससे खुश है कि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए अलग से जमीन देने का फैसला दिया है, लेकिन वह अयोध्या में मंदिर के आसपास किसी जगह पर मस्जिद के लिए जमीन देने के पक्ष में नहीं है। संघ के नेताओं का मानना है कि फैजाबाद बड़ा जिला है और उस जिले में कहीं भी मस्जिद के लिए जमीन दी जा सकती है। शुक्रवार रात अयोध्या विवाद में शनिवार को फैसला आने की सूचना मिलते ही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी तुरंत एक्शन में आ गई। उन्होंने नवगठित थिंक टैंक के सदस्यों को देर रात 10, जनपथ स्थित अपने आवास पर तलब कर लिया। इस बैठक में अहमद पटेल, एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, प्रियंका गांधी, रणदीप सुरजेवाला और केसी वेणुगोपाल शामिल थे। अदालती फैसले के संभावित पहलुओं पर इस 6 सदस्यीय थिंक टैंक से दो घंटे तक गहन विचार विमर्श करने के बाद उन्होंने रविवार दोपहर प्रस्तावित पार्टी कार्यसमिति की बैठक शनिवार सुबह पौने दस बजे ही अपने आवास पर बुलाने को कहा। इससे पहले कि दिल्ली में मौजूद करीब ढाई दर्जन कार्यसमिति सदस्य बैठक के लिए दस जनपथ पहुंचते, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सुबह 8.50 बजे ट्वीट के जरिए रात को थिंक टैंक के साथ हुई चर्चा के संकेत दे दिए। प्रियंका ने लिखा, ‘‘इस घड़ी में न्यायालय का जो भी निर्णय हो, देश की एकता, सामाजिक सद्भाव और आपसी प्रेम की हजारों साल पुरानी परंपरा को बनाए रखने की जिम्मेदारी हम सबकी है।’’ पौने दस बजे बैठक शुरू होने से पहले सुप्रीम कोर्ट के 3 वरिष्ठ वकीलों को मिनट दर मिनट अपडेट के निर्देश दिए गए, ताकि समय रहते पार्टी लाइन तय की जा सके। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मौजूद अधिकांश सदस्य अपने मोबाइल फोन के जरिए सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही रियल टाइम में हासिल कर रहे थे, जबकि सोनिया को सीधी रिपोर्ट कोर्ट में मौजूद वकीलों से मिल रही थी। सवा 11 बजे जैसे ही फैसले की घोषणा पूरी हुई, कार्यसमिति ने साढ़े 11 बजे अदालती आदेश का सम्मान और सौहार्द बनाए रखने के पुराने स्टैंड पर कायम रहते हुए तीन लाइन का सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करके 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सार्वजनिक कर दिया।

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