पीएम मोदी ने सुषमा स्वराज से जुड़ी यादों का किया जिक्र ।

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की श्रद्धांजलि सभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कई बातो का जिक्र किया ।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) :पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की श्रद्धांजलि सभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कई बातो का जिक्र किया। जहां सब लोगों ने सुषमा स्वराज के साथ अपने संबंधों का जिक्र किया, वहीं पीएम मोदी ने उस समय का एक किस्सा सुनाया। पूर्व विदेश मंत्री के लिए आयोजित की गई श्रद्धांजलि सभा में पीएम मोदी ने कहा कि पीएम बनने के बाद पहला सबक उन्हें सुषमा स्वराज से ही मिला था। जहां सब लोगों ने सुषमा स्वराज के साथ अपने संबंधों का जिक्र किया, वहीं पीएम मोदी ने उस समय का एक किस्सा सुनाया, जब वह पहली बार संयुक्त राष्ट्र में भाषण देने वाले थे। पीएम मोदी ने कहा, ‘यूएन में मेरा भाषण होना था, मैं पहली बार वहां जा रहा था। सुषमा जी मुझसे पहले पहुंच गई थीं। मैं जब वहां पहुंचा तो मुझे रिसीव करने के लिए वह गेट पर थीं। मैंने कहा कि कल सुबह मुझे बोलना है, इस पर चर्चा कर लेते हैं तो सुषमा जी ने पूछा कि आपका भाषण कहां है? मैंने कहा कि ऐसे ही बोल देंगे। उन्होंने कहा कि अरे भाई ऐसे नहीं होता है। मोदी ने कहा, ‘सुषमा जी ने मुझसे कहा कि ऐसा नहीं होता जी, दुनिया से भारत की बात करनी है, आप अपनी मर्जी से नहीं बोल सकते हैं। मैं पीएम था और वह विदेश मंत्रालय को संभालने वाली साथी मंत्री थीं, लेकिन वह मुझे कहती हैं कि अरे भई ऐसा नहीं होता है। मैंने कहा कि पढ़कर बोलना मेरे लिए मुश्किल होता है, मैं ऐसे ही बोल दूंगा। उन्होंने कहा कि जी नहीं। रात को ही उन्होंने मुझसे स्पीच तैयार कराई। सुषमा जी का भाषण प्रभावी होने के साथ-साथ, प्रेरक भी होता था। सुषमा जी के वक्तव्य में विचारों की गहराई हर कोई अनुभव करता था, तो अनुभव की ऊंचाई भी हर पल नए मानक पार करती थी। ये दोनों होना एक साधना के बाद ही हो सकता है: पीएम मोदी। पीएम ने बताया, ‘सुषमा जी का बड़ा आग्रह था कि आप कितने ही अच्छे वक्ता क्यों न हों, आपके विचारों में कितनी ही साध्यता क्यों न हो, लेकिन कुछ फोरम होते हैं, जिनकी अपनी मर्यादा होती हैं और वे आवश्यक होती हैं। यह सुषमा जी ने मुझे पहला सबक सिखा दिया था। कहने का मतलब यह है कि जिम्मेदारी जो भी हो, लेकिन जो आवश्यक है उसे बेरोकटोक कहना चाहिए।’ पीएम ने कहा कि सब लोग कहते हैं कि सुषमा जी मृदु थी, नम्र थी, मगर दुश्मनों को करारा जवाब देना भी उन्हें अच्छी तरह से आता था ।

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