‘जय श्रीराम’ बुलवाने और पिटाई मामले में बड़ा खुलासा, झूठा निकला एक और आरोप

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : कभी भगवा आतंक का नाम लेकर हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए जिस तरह से तमाम नापाक साजिशों को अंजाम दिया गया था, अब जयश्रीराम ये उद्घोष की आड़ में हिन्दुओं के खिलाफ उससे भी बड़ी साजिशें रची जा रही हैं. मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव का है जहाँ मदरसे के छात्रों से कथित रूप से जय श्री राम बुलवाने और पिटाई मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. इस खुलासे से के बार उन लोगों के चेहरे बेनकाब हो गये हैं जो हिन्दुओं को निशाना बनाने की कोशिशों में लगे हुए थे. इस मामले की जांच रिपोर्ट में यह सामने आया है कि बच्चों के बीच में विवाद मैदान में क्रिकेट खेलने को लेकर हुआ था लेकिन योगी सरकार को बदनाम करने के लिए इसे साम्प्रदायिक रंग दिया गया और जय श्री राम से जोड़कर माहौल खराब करने की कोशिश की गयी. इसका खुलासा खुद एडीजी क़ानून व्यवस्था पीवी रामाशास्त्री ने किया. एडीजी क़ानून व्यवस्था ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि विवेचना के क्रम में इस तथ्य की पुष्टि हुई कि वास्तव में क्रिकेट खेलते समय बच्चों के बीच झगडा हो गया था, तथा कोई धार्मिक नारे लगाने को नहीं कहा गया था. उन्होंने बताया कि इससे पहले भी जनपद कानपुर नगर, अलीगढ़ एवं अन्य स्थलों पर भी इसी प्रकार भ्रामक ढंग से तथ्यों को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करते हुए सांप्रदायिक माहौल ख़राब करने का प्रयास किया गया था. परन्तु स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस की सक्रियता से उसे निष्फल कर दिया गया. पीवी रामाशास्त्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में पुलिस व् प्रशासन चौकन्ना है एवं बिना भेदभाव के यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति यदि भ्रामक अफवाह फैलाता है तो उसके विरुद्ध विधिक कार्यवाई की जायेगी. बता दें कि बता दें उन्नाव के मोहल्ला एबी नगर स्थित मदरसा दारुल उलूम फैज-ए-आम में दूसरे जिलों के भी बच्चे हॉस्टल में रहकर तालीम लेते हैं. गुरुवार की दोपहर 10 से 12 छात्र जीआईसी मैदान में क्रिकेट खेलने गए थे. जानकारी के मुताबिक, जीआईसी मैदान बड़ा होने की वजह से वहां ढेरों बच्चे क्रिकेट खेलने आते हैं. ऐसे में मदरसे के छात्रों का मैदान पर स्टम्प गाड़ने को लेकर विवाद हो गया. विवाद देखते ही देखते मारपीट में बदल गया. मदरसा छात्रों ने आरोप लगाया कि उस वक्त चार युवक वहां पहुंचे थे और उनसे जय श्री राम का नारा लगाने को कहा. इंकार करने पर युवकों ने बैट और स्टम्प छीन लिया और उनकी पिटाई भी कर दी. छात्रों ने आरोप लगाया है कि उनमें से एक की साइकिल भी तोड़ दी गई और जब उन्होंने भागने की कोशिश की तो पथराव भी किया गया. जैसे ही ये मामला वायरल हुआ, तमाम हिन्दू विरोधी तत्व सक्रिय हो गये तथा अपना एजेंडा शुरू कर दिया. लेकिन जब मामले की जांच हुई तो दूध का दूध पानी का पानी हो गया तथा जयश्रीराम के नाम पर फैलाए गये उन्मादी झूठ का भंडाफोड़ हो गया.

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