चीन ने रमजान में मुस्लिमों पर ढहाया गया कहर, गिरा दी कई मस्जिदें

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : भारत के पड़ोसी मुल्क चीन से अक्सर ये ख़बरें सामने आती रहती हैं कि वहां मुस्लिमों के साथ मजहब के आधार पर भेदभाव किया जाता है, उन्हें प्रताड़ित किया जाता है. चीन की सत्ता किसी भी हालात में इस्लामिक चरमपंथ को अपने देश में जड़ें नहीं जमाने देना चाहती है. चीन कभी मुस्लिमों को ट्रेनिंग के नाम पर शिविरों में कैद कर देता है तो कभी उन्हें जबरन सुअर का मांस खाने को मजबूर करता है.. ये बात सिर्फ हम नहीं कह रहे हैं बल्कि पूरी दुनिया कह रही है लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि दुनिया का कोई भी देश.. यहां तक इस्लामिक देश भी मुस्लिमों को लेकर चीन के इस खूंखार रूप के खिलाफ बयान तक नहीं दे पाते. मुस्लिमों को लेकर चीन से अब जो खबर सामने आई है वो और भी अधिक चौंकाने वाली है. खबर के मुताबिक़, हाल ही में समाप्त हुए रमजान माह में चीन में मुस्लिमों पर जमकर कहर ढहाया गया है. जानकारी मिली है कि चीन में रमजान माह में कई मस्जिदों को गिरा दिया गया ताकि इस्लामिक चरमपंथियों को कड़ा सन्देश दिया जा सके. स्थिति ये हो गई कि चीन के शिनजियांग प्रान्त समेत कई क्षेत्रों में ईद के दिन मुस्लिम मस्जिद में जाकर नमाज तक नहीं पढ़ सके. मीडिया सूत्रों के हवाले से मिली ख़बरों की मानें तो चीन के शिनजियांग क्षेत्र में हेयितका मस्जिद के इर्द-गिर्द एक वक्त रौनक सी रहती थी, लेकिन ऊंची गुंबददार इमारत की निशानी मिटने के साथ यह जगह अब वीरान हो चुकी है. दुनिया भर के मुसलमानों ने 5 मई को ईद मनाई लेकिन शिनजियांग में दर्जनों मस्जिदों को ढहाए जाने के कारण उइगुर और अन्य मुस्लिम लोग सुरक्षाकर्मियों की भारी मौजूदगी वाले इस क्षेत्र में ऐसा नहीं कर सके तथा रमजान भी फीका गुजरा. होतन शहर में इस जगह के पीछे एक प्राथमिक स्कूल की दीवार पर लाल रंग में लिखा है ‘पार्टी के लिए लोगों को पढ़ाएं’ और इस स्कूल में प्रवेश से पहले छात्रों को अपना चेहरा स्कैन कराना पड़ता है.

पास के बाजार के एक दुकानदार ने कहा कि मस्जिद की बनावट ‘शानदार’ थी.वहां पर कई लोग रहते थे. उपग्रह से मिली तथा अन्य तस्वीरों को खंगालने से पता चलता है कि 2017 के बाद से 36 मस्जिदों और मजहबी स्थलों को गिराया जा चुका है.जो मस्जिद खुले हैं, वहां जाने के लिए श्रद्धालुओं को मेटल डिटेक्टर से होकर गुजरना पड़ता है और सर्विलांस कैमरा से लगातार उनपर निगरानी रखी जाती है. दमन के डर से पहचान नहीं उजागर करने का अनुरोध करते हुए एक उइगुर मुसलमान ने कहा कि यहां पर हालात बहुत सख्त है, दिल कड़ा करके रहना पड़ता है. मीडिया सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक़, बुधवार को ईद मनाने वाले मुसलमान बड़ी खामोशी से ईदगाह मस्जिद पहुंचे. इस मस्जिद को प्रशासन ने मंजूरी दे रखी है और यह चीन की सबसे बड़ी मस्जिदों में एक है. आसपास की सड़कों, इमारतों पर सादी वर्दी में सुरक्षाकर्मी आने-जाने वालों पर कड़ी नजर रखे हुए थे. शिनजियांग में मुस्लिमों के लिए इस बार भी रमजान पर कोई रौनक नहीं थी. शुक्रवार को होतन में सूर्यास्त के बाद भी यह इकलौती मस्जिद सुनसान थी. इससे पहले दिन में करीब 100 लोग नमाज पढ़ने आए थे, लेकिन उनमें ज्यादातर बुजुर्ग मुसलमान थे. कहा जाता है चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी इस्लामिक कट्टरवाद को देश को लिए बड़ा को खतरा मानती है. इसे लेकर चीनी सरकार कहती है कि वह धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करती है और नागरिक कानून की सीमा के दायरे में रहते हुए रमजान मना सकते हैं. घातक हमले की आशंका के मद्देनजर सरकार ने पूरे क्षेत्र में कैमरे लगा रखे हैं. मोबाइल पुलिस थाने और जगह-जगह जांच चौकी बनायी गयी है. अनुमानों के मुताबिक दस लाख उइगुर और तुर्की भाषी लोगों को अस्थायी शिविरों में रखा गया है. शुरुआत में उनकी मौजूदगी से इनकार करते हुए चीनी प्रशासन ने पिछले साल माना कि वे व्यावसायिक शिक्षा केंद्र चला रहे हैं, जिसका मकसद है कि लोग मंदारिन और चीनी कानूनों से वाकिफ होकर मजहबी चरमपंथ का रास्ता त्याग दें.

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