सेवानिवृत्त होने के लिए आडवाणी को किया जा रहा मजबूर – शिवसेना का बयान

भाजपा के बड़े नेता लाल कृष्ण आडवाणी को टिकट ना देने को लेकर शनिवार को शिवसेना ने अपना बयान दिया।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : भाजपा ने हाल ही में अपनी लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) के लिए 184 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का भी नाम शामिल था। लेकिन गौर करने वाली बात यह थी कि इस सूची में लाल कृष्ण आडवाणी की सीट से बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का नाम दिया गया। भाजपा के बड़े नेता लाल कृष्ण आडवाणी को टिकट ना देने को लेकर शनिवार को शिवसेना ने अपना बयान दिया। शिवसेना ने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी अगर चुनाव ना भी लड़ेंगे तो वे जब भी भाजपा के “सबसे बड़े नेता” बने रहेंगे।पार्टी के मुखपत्र “सामना” के एक संपादकीय में, शिवसेना ने कहा कि आडवाणी के स्थान पर चुनाव लड़ रहे शाह को राजनीतिक रूप से भारतीय राजनीति के ‘भीष्मचर्य’ के रूप में अनुवादित किया जा रहा हैं। जिससे आडवाणी को भी सेवानिवृत्त होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।आगे कहा गया कि ‘लाल कृष्ण आडवाणी को भारतीय राजनीति के ‘भीष्मचर्य’ के रूप में जाना जाता है, लेकिन लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा के उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम ना होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है।’शिवसेना ने कहा कि आडवाणी युग समाप्त होने को आया है। संपादकीय में कहा गया है कि आडवाणी गुजरात के गांधीनगर निर्वाचन क्षेत्र से छह बार चुने गए हैं। अब, अमित शाह उस सीट से चुनाव लड़ेंगे। इसका सीधा मतलब है कि आडवाणी को सेवानिवृत्त होने के लिए मजबूर किया गया है।बता दें कि भाजपा ने एक पीढ़ीगत बदलाव को चिह्नित करते हुए, शाह की उम्मीदवारी की घोषणा की, जो गांधीनगर से अपना पहला संसदीय चुनाव लड़ेंगे। 91 वर्षीय आडवाणी ने केंद्रीय गृह मंत्री और उप प्रधान मंत्री के रूप में कार्य किया था। उन्होंने छह बार गांधीनगर सीट जीती थी।
2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को भारी जीत मिली और शाह को पार्टी अध्यक्ष बनाया गया। तो वहीं आडवाणी को मार्गदर्शक मंडल (संरक्षक समूह) का सदस्य बनाया गया।शिवसेना ने कहा, ‘आडवाणी भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक है, जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर पार्टी का रथ आगे बढ़ाया।’ लेकिन आज मोदी और शाह ने उनकी जगह ले ली है। पार्टी में यह सुनिश्चित करने के लिए माहौल पहले से ही बना दिया गया है कि इस बार वरिष्ठों को कोई जिम्मेदारी नहीं मिलेगी।शिवसेना ने आगे कहा कि आडवाणी ने राजनीति में “लंबी पारी” खेली है और वह भाजपा के “सबसे बड़े नेता” बने रहेंगे। शिवसेना ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘यह विश्वास नहीं था कि एक नेता केवल तभी शीर्ष पद पर बने रहेंगे जब वह सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे। ज्ञात हो शिवसेना अगले महीने भाजपा के साथ गठबंधन में लोकसभा चुनाव लड़ रही है।उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने कांग्रेस ने उस बयान पर भी हमला किया। जिसमें कहा गया था कि आडवाणी से गांधीनगर सीट छीन ली गई है। ठाकरे ने कहा, ‘पार्टी (कांग्रेस) को बड़ों के अपमान की बात नहीं करनी चाहिए। तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव, जिन्होंने कठिन समय में कांग्रेस की सरकारों को आगे बढ़ाया, उनकी मृत्यु के बाद भी पार्टी द्वारा उनका अपमान किया गया’।आडवाणी की प्रशंसा करते हुए शिवसेना ने कहा कि वह देश भर में भाजपा के पदचिह्न का विस्तार करने वाले व्यक्ति हैं। ‘हर चमकते सूरज को स्थापित करना पड़ता है। 1990 के दशक में अयोध्या में आडवाणी की ‘रथ यात्रा’ के कारण भाजपा शीर्ष पर पहुंच सकी थी।

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