महाशिवरात्रि 2019 : विश्‍वनाथ दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब, दशाश्वमेध घाट तक पहुंची कतार !

एक दिन पहले ही बाबा दरबार में लाखों की संख्या में भक्तों ने मत्था टेका और एक लाइन चौक थाने से होते हुए नीचीबाग के आगे तक नजर आई तो दूसरी लाइन बांसफाटक से गोदौलिया होते दशाश्वमेध घाट तक पहुंच गई ।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : महाशिवरात्रि पर देश के द्वादस ज्‍योतिर्लिंगों में से एक बाबा विश्‍वनाथ के दर्शन को काशी में जनसैलाब शाम से ही उमड़ पड़ा। आस्‍था के उफान का आलम यह था कि कतार दशाश्वमेध घाट स्थित गंगा तट तक जा पहुंची। महाशिवरात्रि से पहले ही देश विदेश से भक्तों का रेला काशी पहुंच चुका है। एक दिन पहले ही बाबा दरबार में लाखों की संख्या में भक्तों ने मत्था टेका और एक लाइन चौक थाने से होते हुए नीचीबाग के आगे तक नजर आई तो दूसरी लाइन बांसफाटक से गोदौलिया होते दशाश्वमेध घाट तक पहुंच गई ।देवाधिदेव महादेव भगवान आशुतोष को प्रसन्न करने के लिए फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाने की शास्त्रीय परंपरा है। इस बार महाशिवरात्रि देवाधिदेव महादेव के दिन सोमवार को पड़ी है तो रात में ही शिवयोग का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। फाल्‍गुन त्रयोदशी तिथि रविवार को दोपहर बाद 2.10 बजे लग गई माना जा रहा है इस कारण भी एक दिन पहले भक्तों का रेला काशी में उमड़ पड़ा। त्रयोदशी तिथि चार मार्च को शाम 4.10 बजे तक रहेगी। उसके बाद चतुर्दशी तिथि लगेगी जो पांच मार्च की शाम 6.18 बजे तक रहेगी। सुबह प्रयागराज से कुंभ स्‍नान कर लौटने वाले भी बाबा दरबार में हाजिरी लगाएंगे, लिहाजा कुंभ के पलट प्रवाह से काशी दिन भर आस्‍थावानों से बम-बम रहेगी।यही है बनारस, अपने अक्खड़पन व फक्कड़पन के लिए देश-दुनिया में ख्यात नगरी। बाबा के विवाहोत्सव यानी महाशिवरात्रि पर दर्शन के लिए एक दिन पहले रविवार को ही श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए रेला उमड़ पड़ा। गंगधार से बाबा द्वार तक रिकार्ड तोड़ भीड़ और भक्तों की मैदागिन व लक्सा तक कतार। इस उमड़े जनसैलाब को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने भक्त और भगवान के बीच की दूरी खत्म करने का निर्णय लिया और शयन आरती के लिए कुछ देर विश्राम के बाद मंदिर खोल दिया।यह ऐतिहासिक कदम परंपरावादियों को चौंकाने वाला जरूर रहा लेकिन कतार में घंटों से बेजार दूर-दराज से आए भक्तों ने बाबा को जलाभिषेक की अपनी मुराद पूरी होने पर खुद को धन्य मान लिया। इसके अलावा इसे भी ऐतिहासिक ही कहा जाएगा कि दरस-परस की मान्यता वाले बाबा दरबार में इस बार दोपहर बाद डेढ़ बजे से गर्भगृह में प्रवेश निषिद्ध कर दिया गया। इस कारण भक्तों को बाहर से झांकी दर्शन मिल पाया।सीईओ विशाल सिंह ने इसे भीड़ के कारण हर एक भक्त को दर्शन कराने के लिहाज से अपनी विवशता करार दिया। वास्तव में महाशिवरात्रि पर ही बाबा दरबार के पट रात्रि पर्यंत खुले रहते हैं जिसमें चार प्रहर की आरती-अनुष्ठान किए जाते हैं।इससे पूर्व काशी विश्वनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि व कॉरिडोर की तैयारियों का जायजा लेने के लिए जिलाधिकारी समेत आला अधिकारियों ने परिक्षेत्र का दौरा किया। जिलाधिकारी ने मन्दिर व्यवस्था के साथ कॉरिडोर के रास्तों को देखा और सुरक्षा के बाबत दिशा निर्देश भी जारी किए।बाबा का महापर्व महाशिवरात्रि के लिए बाबा दर्शन की घडियां जैसे जैसे करीब आ रही हैं वैसे ही आस्‍था की कतार जुटने लगी है। डीएम ने पहुंचते ही बाबा दरबार में सबसे पहले मंदिर परिसर में सुरक्षा व्‍यवस्‍था के साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं का जायजा लिया। उसके बाद मुख्य कार्यपालक आफिस गये जहां बाबा दरबार में आने वाले श्रद्धालुअों की व्‍यवस्‍था की जानकारी ली। उन्‍होंने कहा कि दर्शन में हम सब की पहली प्राथमिकता होगा कि सब को सुलभ दर्शन मिले। सुरक्षाकर्मियों से मिलकर उनको सुरक्षा के साथ भक्तों से उचित आचरण प्रदर्शित करने की अपेक्षा भी जताई। वहीं वापसी में आने जाने वाले रास्तों को लेकर डीएम ने स्‍वयं मौका मुआयना किया तो कहा कि साधु सन्तों के प्रवेश के समय का भी ध्यान रखा जाए।

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