सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सरेआम अवमानना दिव्यांगजनों की अधिसूचनाएं नहीं हुई लागु,हकों को लेकर दिव्यांगों ने बुलंद की आवाज

सुंदरनगर। रोशन लाल धर्म
एनएलएन मीडिया ।न्यूज़ लाइव नाउ:
दिव्यांगों के संबंध में प्रदेश सरकार द्वारा जारी की गई दो दो अधिसूचनाओं को अभी तक धरातल पर लागु नहीं किया गया है। इस बात का मुख्य समाजसेवी एवं दिव्यांगजनों के कानूनी सलाहकार कुशल कुमार सकलानी ने कड़ा संज्ञान लिया है और कहा कि पहली अधिसूचना दो अगस्त 1999 सेक्शन 47 एक्ट 1995 व दूसरी अधिसूचना 29 मार्च 2013 व 5 नवंबर 2018 को जारी की गई थी। लेकिन अफसरशाही ने प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के संबंध में दिव्यांगों के साथ साथ देश की सर्वोत्तम न्यायालय एवं महामहिम राष्ट्रपति का भी अपमान लज्जित करने का कार्य किया है। जबकि एक्ट 2016 अनुसार सेक्शन 92 व 93 की स्पष्ट अवहेलना प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा प्रदेश की जनता के पैसे का दुरुपयोग, प्रदेश उच्च न्यायालय एवं देश की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बार बार चेतावनी देने, न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय पर अपना व न्यायालय का समय धन बर्बाद ना करें। फिर भी समय व धन जानबूझकर बर्बाद करके दिव्यांगों के साथ सारेआम धोखा किया जा रहा है और उन्हें बरसों से मूर्ख बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दिव्यांगों के लिए बहुत सारी सुविधाएं दी जा रही हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 के संदर्भ में मार्च 2018 व दिसंबर 2018 तक 10 प्रतिशत सार्वजनिक परिवहन के साधनों को और राज्य की राजधानियों में आधे से ज्यादा सरकारी भवनों को एक्सेसिबिलिटी नॉर्मल के अनुरूप बनाना था। वहीं जून 2019 तक सभी सरकारी भवनों में दिव्यांगजनों की सुविधा बनाना समेत सभी प्रकार के प्रावधानों को दिव्यांगों के हित में लागू करना था। जो अभी तक प्रदेश में जारी विभिन्न भवनों में ऐसा प्रावधान भी प्रदेश के चिकित्सालयों में ही उपलब्ध नहीं है। अन्य सरकारी भवनों में तो बहुत दूर की बात है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से अनेकों बार विनम्र अनुरोध किया है कि प्रदेश के दिव्यांगों के संबंध में किसी भी प्रकार के सवाल जबाव का प्रश्र ही पैदा नहीं होता है। दिव्यांगों की सेवानिवृत्ति 58 से 60 वर्ष के निर्णय को लागू करने के आदेश देने चाहिए थे। जबकि मामले को फिर से अपील में जाने का निर्णय किया है। जो सही नहीं है। दिव्यांगों के हित में जो कार्य 40 वर्षों से किसी ने नहीं किया। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश द्वारा पांच नवंबर 2018 को दिए गए निर्णय को लागु करवाने के आदेश प्रदेश सरकार को दिव्यांगजनों के हित में देने का आग्रह किया है।

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