कैसे अंकिती बोस ने चार साल में स्टार्टअप जिलिंगो को पहुंचाया 1 करोड़ डॉलर के वैल्यूएशन तक !

फैशन स्टार्ट-अप जिलिंगो ने मंगलवार को जानकारी दी है कि उनकी कंपनी ने दो निवेशकों से 1604.6 करोड़ रुपये (22.6 करोड़ डॉलर) की फंडिग जुटाई है। जिसके बाद जिलिंगो की वैल्यू 6,887 करोड़ रुपये (97 करोड़ डॉलर) हो गई है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ):  1 अरब डॉलर के वैल्यूएशन वाले फैशन प्लेटफॉर्म जिलिंगो का रास्ता दिसंबर 2014 में शुरू हुआ था। उस वक्त अंकिती बोस (27) सिक्योई इंडिया में एनालिस्ट का काम करती थीं। वह मूल रूप से मुंबई की रहने वाली हैं। ध्रुव कपूर (28) से उनकी मुलाकात बंगलूरू में एक फैमिली पार्टी में हुई, जो गेमिंट स्टूडियो किवी इन्क में सॉफ्टवेयर इंजीनियर का काम करते थे। थोड़े समय बाद ध्रुव और अंकिती दोनों को यह अहसास हुआ कि दोनों ही सटार्टअप शुरू करना चाहते हैं।

विज्ञापनइसके चार महीने बाद दोनों ने नौकरी छोड़ दी। दोनों ने जिलिंगो की स्थापना के लिए अपनी सेविंग्स से 30-30 हजार डॉलर लगाए। जिलिंगो एक ऑनलाइन प्लैटफॉर्म है जो दक्षिण पूर्व एशिया में छोटे व्यापारियों को अपने प्रोडक्ट बेचने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाती है।फैशन स्टार्ट-अप जिलिंगो ने मंगलवार को जानकारी दी है कि उनकी कंपनी ने दो निवेशकों से 1604.6 करोड़ रुपये (22.6 करोड़ डॉलर) की फंडिग जुटाई है। जिसके बाद जिलिंगो की वैल्यू 6,887 करोड़ रुपये (97 करोड़ डॉलर) हो गई है।इसी के साथ अंकिती उन कम उम्र की महिला सीईओ में शामिल हो गई हैं जो एशिया में करीब 1 अरब डॉलर की वैल्यू के स्टार्ट-अप को लीड कर रही हैं। इतनी ही वैल्यू के दुनियाभर के 239 स्टार्ट-अप में सिर्फ 23 की फाउंडर महिलाएं हैं। वह बीते साल फोर्ब्स की अंडर-30 एशिया लिस्ट में भी शामिल हो चुकी हैं।

जिलिंगो चार सालों में एक अरब डॉलर की वैल्यूएशन के करीब पहुंच गया है। इसकी शुरुआत 2015 में हुई थी।जिलिंगो में पहला निवेश सिक्योई ने ही किया था। कपूर जिलिंगो में चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर हैं। अंकिती को ये आईडिया साल 2013 में आया, तब वह थाईलैंड में छुट्टियां मना रही थीं। उन्होंने ये नोटिस किया कि वहां कोई ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस उपलब्ध नहीं है।सिंगापुर में रेग्युलेटरी फाइलिंग में जिलिंगो ने बताया कि मार्च 2018 को वित्त वर्ष समाप्त होने पर कंपनी का रेवेन्यू 12 गुना बढ़ा है। इससे पहले 31 मार्च, 2017 को खत्म वित्त वर्ष में जिलिंगो का रेवेन्यू 13 करोड़ रुपये (18 लाख डॉलर) रहा था। अब थाईलैंड और कंबोडिया समेत आठ देशों में जिलिंगो के ऑफिस हैं, जहां 400 कर्मचारी काम करते हैं।

 

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