हिमाचल: रूस की सीमा पर मारे गए विशाल का पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा, लोगों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई !

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : शिमला। अभी कुछ ही समय पहले भारत में नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा हज सब्सिडी पर लिया गया बड़ा फैसला बन गया था न सिर्फ चर्चा बल्कि विवाद का विषय भी भारत की सरकार खुद को धर्मनिरपेक्ष विचारधारा वाली सरकार खुद को बताया करती है लेकिन धर्मनिरपेक्षता के नाम पर तुष्टिकरण की सीमा पार कर देने के लिए कुछ राजनेता व्याकुल रहते हैं मोदी सरकार के हज सब्सिडी के फैसले का विपक्ष के कुछ बड़े नेताओं ने व्यापक विरोध किया था। यहाँ तक कि उनको मुस्लिम विरोधी साबित करने की भी तमाम कोशिशे की गयी पर अगर ध्यान दिया जाय इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान पर तो वहां स्थिति कुछ और ही है यहाँ पर ये भी ध्यान रखने योग्य है कि पाकिस्तान में धर्मनिरपेक्षता का कहीं दूर दूर तक नामोनिशान भी नहीं है और वो इस्लामिक मुल्क है जहाँ पर वहां के कट्टरपंथी हिन्दू , सिख और ईसाई समाज का ऐसा दमन कर रहे हैं जो मानवता के सभी नियमो को तार तार कर रहा है। विदित हो कि पाकिस्तान की नवनियुक्त इमरान खान सरकार ने हज सब्सिडी के मुद्दे पर लिया है बड़ा फैसला । पाकिस्तान में इन दिनों हज के ख़र्च में हुई बढ़ोत्तरी का मुद्दा भी छाया हुआ है। इमरान ख़ान की सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस हफ़्ते अपनी पहली हज पॉलिसी जारी की। इसके तहत अब एक पाकिस्तानी को इस साल हज पर जाने के लिए चार लाख 76 हज़ार पाकिस्तानी रुपए देने होंगे जबकि पिछले साल ये रक़म दो लाख 80 हज़ार रुपए थे। यद्दपि इस विषय पर वहां के मजहबी मामलों के मंत्री ने अपनी रिपोर्ट में हज सब्सिडी देने की अपील की थी लेकिन इमरान ख़ान की सरकार ने अपने ही मंत्री की सिफ़ारिश को ठुकरा दिया।

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