नेरचौक मेडिकल कॉलेज बन कर रह गया एक रेफर्ड अस्पताल,जहां गम्भीर बीमारी से ग्रस्त मरीज केवल रेफर किये जाते है

सुन्दरनगर ।रोशन लाल शर्मा
एन एल एन मीडिया।न्यूज़ लाइव नाउ:
आखिर जिस बात की आशंका थी वह आज स्पष्ट नजर आ रही है।एक आत्मनिर्भर के रूप में बना अस्प्ताल दूसरे अस्पतालों पर निर्भर हो गया।1200 करोड़ से निर्मित अस्प्ताल का ढांचा केवल दार्शनिक रूप में एक सफेद हाथी के रुप में खड़ा कर दिया गया। जिसमे सुविधाजनक कुछ नही।मरीज दाखिल हो रहे हैं और उन्हें चंडीगढ़ रैफर कर दिया जाता है क्योंकि यहां संगीन विमारियों का इलाज ही मौजूद नही।लोगों की परेशानी और बढ़ गई है ।जिले से उठाकर डॉक्टर नेर चौक लाये गए हैं।जिससे न अब जिला मंडी का अस्प्ताल चल रहा है और न ही नेर चौक। शुरू में ई एसआई इस अस्पताल को संभाले हुए थी।एक दम सरकार बदलने के साथ ही ई एस आई ने अपने हाथ खींच लिए।इसमे क्या राजनीति थी आजतक पता नही चल सकी।इसे शायद प्राइवेट के हाथ में भी देने की बात भी चली थी परन्तु इसमे भी नेता लोगों का क्या दिलचस्पी थी कि बात बिच में ही रह गई।फिर बात सामने आई कि हिमाचल सरकार इसे चलाएगी ।किस बल बूते पर कोइ पता नही।और देखते ही देखते काँग्रेस सरकार ने इसे अपने हाथ ले भी लिया जबकी सरकार जानती थी कि इस अस्पताल को चलाना उनके बस की बात नही।आज अस्प्ताल में बने ऑपरेशन थियेटरज पूर्ण तौर पर पूरी सुविधाओं के लिए तयार ही नही ।जब प्रदेश सरकार जानती थी कि वह इतने बड़े अस्पताल का संचालन अपने बल बूते पर नही कर सकती तो किस आशा से उस अस्प्ताल को अपने हाथ ले लिया गया । बेहतर होता इसे केंद्र के अंतर्गत रहने दिया जाता।कांग्रेस के तत्कालीन हेल्थ मिनिस्टर कॉल सिंह और केंद्र में कार्यरत हिमाचल से सम्बंध रखने वाले जे पी नड्डा का क्या आपस मे कोई तालमेल नही था जो स्थिति को भांप कर फैसला लेते।या फिर इन दोनों की जुगलबंदी से यह सब कुछ हुआ क्योंकि बिलासपुर में ऐमज की स्थापना भी की जानी है।जिसे नेरचौक मेडिकल कॉलेज से जानकर भी नही जोड़ने दिया गया।अगर ऐसा होता तो स्थिति और ही होती ।आज पूरे छे जिले जो मेडिकल कॉलेज नेरचौक से लाभन्तित होने थे आज चिकित्सा सम्बन्धी सुविधाएं न होने के कारण त्रस्त हो कर खड़े हैं।कुल मिलाकर हम देखें तो यह हिमाचल प्रदेश से ही सम्बन्ध रखने वाले इन स्वास्थ्य मंत्रियों की न बूझ नीति है जिसका परिणाम आज मंडी जिला के साथ साथ 5 अन्य जिले भुक्त रहे है।जिसके लिए लोग इन्हें कभी माफ नही करेंगे।आज नेर चौक मेडिकल कॉलेज का इंफ्रस्ट्रक्चर है बुरी तरह प्रयोग में लाया जा रहा है।जो सुवुधाएँ वहां दी गई है उनका प्रयोग बहुत ही गलत तरीके से हो रहा है और उस पर कोई नियंत्रण नही।हालात यही रही तो 6 महीने में ही चाहे लिफ्ट सिस्टम हो चाहे जुड़ीं अन्य सुविधाएं तहस नहस होने की पूरी संभावना है जिसे हिमाचल सरकार अपने बल बूते पर मुरमत भी नही करा सकती।

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